Self Learning in Career: बदलते पेशेवर माहौल में वही टिक सकता है, जो नए बदलावों के अनुरूप ढलने, लगातार सीखने और खुद को तराशने के लिए तैयार रहता है। इसलिए एक बात तो तय है कि जो व्यक्ति सीखना, भूलना और फिर से सीखना जानता है, वही भविष्य में आगे बढ़ सकता है।
Harvard Business Review: अधिकतर लोग अपनी नौकरी में ही भरपूर समय, ऊर्जा और प्रयास खपाते हुए देखे जाते हैं। देखा जाए तो यहीं से सीखने-समझने और आगे बढ़ने के अवसर भी मिलते हैं। हालांकि, फिर भी लोग इसमें ही इतने व्यस्त हो जाते हैं कि खुद के विकास को तवज्जो नहीं दे पाते, जो किसी भी लिहाज से ठीक नहीं है। ध्यान रखें, बदलते पेशेवर माहौल में वही टिक सकता है, जो नए बदलावों के अनुरूप ढलने, लगातार सीखने और खुद को तराशने के लिए तैयार रहता है।
इसलिए एक बात तो तय है कि जो व्यक्ति सीखना, भूलना और फिर से सीखना जानता है, वही भविष्य में आगे बढ़ सकता है। ऐसे में, अगर आप भी चाहते हैं कि आपका कॅरिअर समय के साथ निखरता रहे, तो आपको अपनी सीखने की आदत को मजबूत बनाना होगा। इसके कुछ बेहतरीक तरीके हैं।
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किताबों से इतर लोगों से भी सीखें
आपके आसपास के लोग आपके लिए ज्ञान का अथाह भंडार बन सकते हैं, बशर्ते आपके अंदर सीखने की ललक होनी चाहिए। चाहे कोई व्यक्ति आपके साथ काम करने वाला हो, अन्य विभाग के लोग हों या फिर आपके पेशे से इतर किसी अन्य काम से जुड़े हों, आप हर किसी से सीख सकते हैं। इसके लिए विविध नेटवर्क व लर्निंग कम्युनिटी बनाना जरूरी है। साथ ही, हर महीने नए लोगों से मिलने का प्रयास करें और हर बातचीत के अंत में यह सवाल पूछना न भूलें कि क्या कोई और ऐसा है, जिससे मिलना मेरे लिए उपयोगी हो सकता है? इससे न सिर्फ आपकी सोच का दायरा बढ़ेगा, बल्कि आपको नए दृष्टिकोणों को जानने का मौका भी मिलेगा।
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Career
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हर दिन एक नई कोशिश करें
सीखने का सबसे बेहतरीन तरीका है लगातार प्रयोग करते रहना। इसके लिए अपने कामों में नए-नए टूल्स आजमाएं, अपनी प्रेजेंटेशन में विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल करें तथा बातचीत के तरीके को बदलें। हर प्रयोग को सीखने के उद्देश्य से करें और यह जानने की कोशिश करें कि आपने उससे क्या सीखा? याद रखें हर प्रयोग एक सीखने का अवसर है, चाहे वह सफल हो या असफल। इसलिए, किसी प्रयोग में नाकामयाव होने पर हताश न हो।
सवालों में छिपा है समाधान
प्रेरक सवाल पूछना सीखें, जैसे कि मैं यह काम कैसे कर सकता हूं?, मैं अपनी गलतियों को कैसे सुधार सकता हूं?, अगर मैं कुछ नया प्रयोग करूं, तो क्या होगा?, मैं इस काम को और बेहतर ढंग से कैसे कर सकता हूं? आदि। ऐसे सवाल आपकी रचनात्मक सोच को बढ़ाते हैं और आपको काम के नए तरीके खोजने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके अलावा, प्रेरक प्रश्नों को प्रभावी बनाने के लिए किसी और के साथ मिलकर एक-दूसरे से प्रश्न पूछें और उनके उत्तर दें।
अगर किसी काम में आपकी प्रगति धीमी है, तो निराश न हों। दो हफ्तों तक हर दिन के अंत में अपनी तीन छोटी-छोटी सफलताएं लिखें, चाहे वह प्रतिक्रिया मांगना हो या किसी की मदद करना। दो हफ्ते बाद आपके पास 42 सफलताओं की लिस्ट होगी, जो आपको खुशियां मनाने की वजह भी देंगी और आगे बढ़ने का हौसला भी।