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Teacher: नेट-पीएचडी बिना बन सकेंगे विश्वविद्यालयों में शिक्षक, यूजीसी ने नियमों में किए बेहद महत्वपूर्ण बदलाव

Sun, 05 Jan 2025 06:28 PM IST
आकाश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

Teaching Job Rule: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शिक्षक नियमों में बदलाव पर आधारित यूजीसी निमयन 2025 जारी करेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उच्च शिक्षा में पढ़ने, पढ़ाने के नियमों में बदलाव के आधार पर इन नियमों को तैयार किया गया है।
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik
Teacher Eligibility: देश के विश्वविद्यालयों में अब तीन तरह के शिक्षक सेवाएं देंगे। इनमें दो तरह के नियमित और एक तरह के अस्थायी शिक्षक होंगे। अस्थायी शिक्षक का कार्यकाल 3 वर्ष होगा। नियमित शिक्षकों में यूजीसी नेट परीक्षा करने वालों के साथ ही विशेषज्ञ स्नातक शामिल होंगे, जिनके लिए यूजीसी नेट या पीएचडी की अनिवार्यता नहीं होगी।
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

नई शिक्षा नीति के अनुरूप होगा नियमों में बदलाव

नई शिक्षा नीति के अनुरूप विवि अनुदान आयोग (यूजीसी) नियमों में बदलाव कर रहा है जो अगले शैक्षिक वर्ष से लागू होंगे। एनईपी में छात्रों के लिए उच्च गुणवत्ता युक्त शिक्षा, समानता, उपलब्धता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। इसी के तहत अगले 20 से 40 सालों में रोजगार की बदलती मांग के आधार पर छात्रों को तैयार करना है।
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(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock

एक सााथ दो डिग्री की पढ़ाई

छात्रों को स्नातक में एक साथ दो डिग्री की पढ़ाई करने की अनुमति होगी। कौशल आधारित कोर्स जुड़ रहे हैं। प्रोजेक्ट और फील्ड वर्क, इंटर्नशिप पर फोकस होगा। छात्र एक विषय की पढ़ाई के साथ किसी अन्य विषय में इंटर्नशिप कर सकेंगे। उदाहरण के लिए, अर्थशास्त्र की पढ़ाई करने वाले छात्र इंटर्नशिप के लिए हॉस्पिटल को भी चुन सकते हैं। इसमें मरीजों की देखभाल और प्रबंधन का विषय शामिल होगा।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

इस तरह से बनेंगे शिक्षक

विश्वविद्यालयों में अब शिक्षक बनने के लिए एक ही विषय में यूजी, पीजी व पीएचडी की बाध्यता नहीं होगी। पीएचडी की डिग्री अस्सिटेंट प्रोफेसर से एसोसिएट व प्रोफेसर की पदोन्नति के लिए जरूरी होगी। योग, ड्रामा, फाइन आर्ट्स आदि क्षेत्रों में महारत हासिल स्नातक भी अस्सिटेंट प्रोफेसर बन सकेंगे। इनके लिए यूजीसी नेट या पीएचडी की डिग्री जरूरी नहीं होगी, लेकिन राष्ट्रीय स्तर का अवार्ड जरूरी होगा। विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी विश्वविद्यालयों में 3 वर्ष तक शिक्षक बनकर सेवाएं दे सकेंगे।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala

नए नियमों में छात्रों की सुविधाओं पर ध्यान

नए नियमों में हर तरह के छात्रों की सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है, ताकि वे पढ़ाई को बोझ न समझें। जिन छात्रों को सीखने और समझने की क्षमता कम है उन्हें अपनी सुविधा और पसंद से देरी से डिग्री हासिल करने की छूट होगी, वहीं तेजी से सीखने और समझने वाले 10 फीसदी छात्रों को डिग्री की पढ़ाई जल्द पूरी करने की अनुमति होगी।
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