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Leadership Tips: जब टीम का भरोसा डगमगाने लगे, इन बातों का रखें ध्यान; जानिए जुड़ाव और प्रदर्शन बढ़ाने के उपाय

Wed, 17 Sep 2025 12:29 PM IST
शिवम गर्ग क्रिस्टिन ग्लीट्समैन, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू

सार

Workplace: आज के डिजिटल युग में तकनीक ने काम को आसान और तेज तो बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही कार्यस्थल पर टीम का जुड़ाव और अपनापन कम हो गया है। ऐसे में लीडरशिप की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik
Team Leadership: आज के दौर में जहां तकनीक ने काम को तेज और आसान बना दिया है, वहीं इसने कार्यस्थल पर जुड़ाव तथा अपनापन कम कर दिया है। डिजिटल बातचीत ने दूरियां तो बढ़ाई ही हैं, जुड़ाव को भी सतही बना दिया है। यही कारण है कि लोग पहले से ज्यादा अकेला महसूस करने लगे हैं। इस अकेलेपन का असर न केवल उनकी मानसिकता पर, बल्कि काम व टीम के सामूहिक प्रदर्शन पर भी दिखाई देता है। यहीं लीडरशिप की भूमिका अहम हो जाती है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
एक समझदार लीडर यह जानता है कि टीम को जोड़ना और रिश्तों को मजबूत करना, संगठन की सफलता की सबसे ठोस नींव है। अगर आपकी टीम के सदस्यों के साथ भी ऐसी ही दिक्कत है, तो आपको समझना होगा कि लोगों से जुड़ना कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी नहीं, बल्कि रोजमर्रा के काम का हिस्सा है। इसी से टीम में भरोसा, सहयोग और अपनापन आता है।
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जुड़ाव की डोर मजबूत करें

अकेलेपन की जड़ अक्सर यह होती है कि पेशेवर खुद को किसी साझा प्रोजेक्ट या इन्सान से जुड़ा हुआ महसूस नहीं कर पाते। ऐसे में, आपको अपनेपन और जुड़ाव की भावना को बढ़ावा देना चाहिए। इसके लिए अपनी टीम की कुछ ऐसी कहानियां साझा करें, जिनमें सफलता, गलतियां या साहसिक पल जुड़े हों। अपने फैसलों के पीछे की वजह स्पष्ट करने से भी टीम का विश्वास और दिशा, दोनों मजबूत होते हैं।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

भरोसेमंद बातचीत से शुरुआत

अकेलेपन को कम करने की शुरुआत भरोसेमंद बातचीत से होती है। बतौर लीडर जब आप रिश्तों को महत्व देते हैं, तो टीम में भरोसा, तालमेल और रचनात्मकता स्वाभाविक रूप से बढ़ती है। नए कर्मचारियों के लिए एक 'ऑनबोर्डिंग सहयोगी' नियुक्त करें, ताकि वे जल्दी से टीम से जुड़कर संगठन की संस्कृति को समझ सकें। प्रोजेक्ट को शुरुआत में एक छोटा सेशन रखें, जिसमें सदस्य अपना परिचय दें, अनुभव साझा करें व साझा लक्ष्य बनाएं।
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मनोवैज्ञानिक सुरक्षा को अहमियत दें

मनोवैज्ञानिक सुरक्षा ऐसा माहौल है, जहां हर कोई बिना डर के अपनी चुनौतियां साझा कर सके। यह अकेलेपन को कम करने के साथ भरोसा और सहयोग बढ़ाता है। जब आप भावनाओं पर खुलकर बात करते हैं, तो टीम भी वैसा ही करने के लिए प्रेरित होती है। इसके लिए मीटिंग की शुरुआत रेड/येलो/ग्रीन चेक-इन से करें, एक-एक से बातचीत करके पूछें कि आपकी ऊर्जा का स्तर क्या है और वह किससे बढ़ या घट रही है?
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रोजमर्रा की आदत बनाएं

जब टीम जुड़ाव को रोजमर्रा की आदत बना लेती है, तो अकेलापन घटता है और भरोसा व समावेशी संस्कृति मजबूत होती है। नए कर्मचारियों से कुछ दिन बाद पूछें कि क्या आप खुद को टीम का हिस्सा महसूस करते हैं, किसने आपकी मदद की और क्या सुधारा जा सकता है? इससे सकारात्मक तथा सुधारात्मक पहलू सामने आएंगे।
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