बीते कुछ दिनों से देश के दो बड़े विश्वविद्यालय विवाद और विरोध के कारण सुर्खियों में हैं। एक है जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU - Jawaharlal Nehru University) और दूसरा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU - Banaras Hindu University)।
जेएनयू में जहां छात्र हॉस्टल की बढ़ी फीस को वापस लेने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, बीएचयू में एक मुस्लिम शख्स डॉ. फिरोज खान को संस्कृत का प्रोफेसर नियुक्त किए जाने को लेकर विवाद और विरोध चल रहा है।
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विरोध-प्रदर्शन करते बीएचयू के छात्र
- फोटो : अमर उजाला
इस बीच राजस्थान (जयपुर) का राजकीय ठाकुर हरिसिंह शेखावत मंडावा प्रवेशिका संस्कृत विद्यालय भी चर्चा में आ गया है। कारण - यहां के करीब 80 फीसदी बच्चे मुस्लिम हैं। पहले की तुलना में आज संस्कृत पढ़ने वालों की संख्या कम जरूर हुई है, लेकिन इसका महत्व और अस्तित्व बरकरार है।
आज हम आपको देश के ऐसे 10 संस्कृत विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने अपना नाम बनाए रखा है। आगे की स्लाइड्स में जानें उनके नाम और देखें उनकी तस्वीरें।
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द संस्कृत कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी, कोलकाता
- फोटो : sanskritcollegeanduniversity.org.in
द संस्कृत कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी, कोलकाता
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बने इस संस्कृत संस्थान की स्थापना ब्रिटिश काल में हुई थी।
तत्कालीन ब्रिटिश सचिव एचएच विल्सन ने 1824 में इसका शिलान्यास किया था।
1851 में इस संस्थान ने ब्राह्मणों के अलावा अन्य जाति व धर्म के छात्रों के लिए दरवाजे खोले।
संस्थान की लाइब्रेरी में दो लाख से ज्यादा किताबें और 20 हजार से ज्यादा पांडुलिपियां मौजूद हैं। जिनमें से कुछ तो दुर्लभ हैं।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
उत्तर प्रदेश के वारणसी में स्थित संस्कृत संस्थान।
आज से करीब 228 साल पहले 1791 में इसकी स्थापना हुई थी।
इसे पहले वाराणस्या संस्कृत विश्वविद्यालय एंड गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज के नाम से जाना जाता था।
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कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा
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कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा
यह संस्थान बिहार के दरभंगा में स्थित है।
इसकी स्थापना 26 जनवरी 1961 को हुई थी। तब पूरा भारत इसका अधिकारिताक्षेत्र था। लेकिन अब सिर्फ बिहार है। अभी यह विवि बिहार राज्य विवि अधिनियम 1976 के तहत संचालित हो रहा है।
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राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, लखनऊ
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राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, लखनऊ
देशभर में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए कई शहरों में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान की स्थापना हुई थी। इनमें से एक लखनऊ में भी है।
राष्ट्रीय संस्थान की स्थापना 15 अक्तूबर 1970 को हुई थी। केंद्र सरकार इसे फंड देती है।
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राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति
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राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति
केंद्रीय संस्कृत आयोग की सिफारिश पर भारत सरकार द्वारा 1961 में इसकी स्थापना हुई थी।
तत्कालीन उप राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने इसका शिलान्यास किया था।
बाद में इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला।
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जगद्गुरू रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर
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जगद्गुरू रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर
राजस्थान में संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 2 सितंबर 1998 को अनुमति दी गई।
संस्थान 6 फरवरी 2001 को बनकर तैयर हुआ।
पहले कुलपति पद्मश्री डॉ. मंडन मिश्र नियुक्त हुए थे।
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श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय विद्यापीठ, नई दिल्ली
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श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय विद्यापीठ, नई दिल्ली
नई दिल्ली में संस्कृत के लिए श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय विद्यापीठ की स्थापना 8 अक्तूबर 1962 को की गई थी।
इसे यूजीसी द्वारा डीम्स यूनिवर्सिटी का दर्जा 1987 में मिला।
संस्कृत और शास्त्रीय शिक्षा के लिए इसे उत्तर भारत का दूसरा सबसे प्रतिष्ठित संस्थान माना जाता है।
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श्री शंकराचार्य यूनिवर्सिटी ऑफ संस्कृत, कलादी
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श्री शंकराचार्य यूनिवर्सिटी ऑफ संस्कृत, कलादी
केरल में कोच्चि के निकट है कलादी, जहां श्री शंकराचार्य यूनिवर्सिटी ऑफ संस्कृत (SSUS) स्थित है।
आदि शंकराचार्य के नाम पर इसकी स्थापना 1993 में हुई थी।
यह विश्वविद्यालय पूर्णा नदी के तट पर बना है। पांडुलिपियों के प्रकाशन, संरक्षण और संस्कृत भाषा में किताबों के प्रकाशन के लिए भी यह विवि सक्रिय रहता है।
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श्री जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, पुरी
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श्री जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, पुरी
7 जुलाई 1981 को ओडिशा के पुरी में इस विवि की स्थापना हुई थी।
ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री जानकी बल्लभ पटनायक की कोशिशों से इस विवि की स्थापना हुई।