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NEET में असफल हुए तो न हों परेशान, इस तरह मेडिकल में बना सकते हैं सुनहरा करियर

Mon, 10 Jun 2019 03:11 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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MBBS व डेंटल के अलावा भी मेडिकल के क्षेत्र में हैं करियर के अनेक अवसर
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) 5 जून 2019 को राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (NEET) 2019 के नतीजे घोषित कर चुका है। एमबीबीएस और डेंटल में दाखिले के लिए होने वाली इस परीक्षा में इस बार जितने अभ्यर्थी शामिल हुए, उनमें से 7 लाख से भी ज्यादा इसमें सफल नहीं हो पाए हैं। लेकिन इसे लेकर ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। आपके पास अब भी मेडिकल के क्षेत्र में ही कई करियर विकल्प हैं।

हम आपको मेडिकल क्षेत्र के ऐसे कई करियर विकल्पों के बारे में बता रहे हैं जिसके लिए नीट क्वालिफाई करने की जरूरत नहीं है...
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बैचलर्स ऑफ वेटरनरी साइंसेज एंड एनिमल हसबेंडरी

ये कोर्सेज पालतू व जंगली जानवरों की बीमारियों और उनके इलाज के बारे में हैं। BVSc और AH कोर्सेज पांच साल की अवधि के होते हैं। इसमें इंटर्नशिप प्रोग्राम भी जरूरी होता है। अगर कोई अभ्यर्थी एनिमल हसबेंडरी की पढ़ाई नहीं करना चाहता तो सिर्फ BVSc कर सकता है जो तीन साल का कोर्स होता है।
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बैचलर्स ऑफ फार्मेसी

साइंस स्ट्रीम के जो स्टूडेंट्स मेडिकल कोर्स करना चाहते हैं उनके लिए बीफार्मा एक अच्छा विकल्प है। इस क्षेत्र में दो साल का डिप्लोमा या चार साल के डिग्री कोर्सेज किए जा सकते हैं। बीफार्मा के बाद स्टूडेंट्स को अस्पतालों और सरकारी संस्थानों में इन-हाउस फार्मासिस्ट / केमिस्ट के तौर पर काम करने का मौका मिलता है। आप खुद अपनी कंसल्टेंसी या स्टोर भी चला सकते हैं। निजी और सरकारी क्षेत्रों की कंपनियों में रिसर्च, मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने का अवसर भी उपलब्ध है।

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माइक्रोबायोलॉजी

यह माइक्रोस्कोपिक जंतुओं जैसे बैक्टीरिया, वायरस, पर्यावरण में मानव, जानवर, पेड़-पौधों व अन्य जंतुओं की स्टडी होती है। माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स के रिसर्च हमें बताते हैं कि अलग-अलग माइक्रोऑर्गेनिज्म किस तरह हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। इसके अंतर्गत वायरोलॉजी, बैक्टीरियोलॉजी, पारासाइटोलॉजी, माइकोलॉजी जैसे सब-फील्ड की भी पढ़ाई की जा सकती है।

इसके जरिए क्लिनिकल रिसर्चर, रिसर्च साइंटिस्ट, लैब टेक्नीशियन, क्लाविटी कंट्रोल, फार्मास्यूटिकल्स, फूड इंडस्ट्री, हेल्थ सेक्टर, ब्रिवरीज, डिस्टिलरीज, एग्रीकल्चर जैसे कई क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं।
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बायोकेमिस्ट्री

साइंस के इस ब्रांच में जीवित ऑर्गेनिज्म्स में केमिकल प्रोसेस और सब्स्टांसेज की पढ़ाई होती है। यह लैबोरेटरी आधारित साइंस है जो बायोलॉजी और केमिस्ट्री को साथ लाता है। यह एक बढ़ता हुआ क्षेत्र है जहां आपको बायोकेमिकल साइंटिस्ट, फॉरेंसिक साइंटिस्ट, क्लिनिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट, टॉक्सिकोलॉजिस्ट, रिसर्च साइंटिस्ट, हेल्थकेयर साइंटिस्ट, पेशेंट केयर को-ऑर्डिनेटर, मेडिकल कोडर, टीचर व प्रोफेसर जैसे कई अच्छे अवसर मिलेंगे।
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जेनेटिक्स

यह जीन्स उनके कार्य, जेनेटिक वेरिएशन और जंतुओं में हेरिडिटी की पढ़ाई है। जेनेटिक बीमारियों, म्यूटेशन, जीन ट्रांसमिशन, इंटरैक्शन जैसी चीजों की इंटरेस्टिंग स्टडी का मौका है। इसके जरिए आपको जेनेटिसिस्ट, इम्यूनोलॉजिस्ट, साइटोजेनेसिस्ट, फॉरेंसिक डीएनए एनालिस्ट, मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट, फार्माकोलॉजिस्ट, क्लिनिकल रिसर्च एसोसिएट, रिसर्च साइंटिस्ट जैसे एक्साइटिंग करियर विकल्प मिल जाते हैं।
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बायोइनफॉर्मेटिक्स

यह बायोलॉजी, कंप्यूटर साइंस और इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की कंबाइन्ड स्टडी है। इस क्षेत्र में बायोलॉजिकल डेटा एनालिसिस की तकनीकों व टूल्स के उपयोग और इसके विकास पर काम होता है। इस कोर्स के बाद आप बायोइनफॉर्मेटिक्स एनालिस्ट या डेवलपर के तौर पर काम कर सकते हैं। फार्मास्यूटिकल व बायोटेक्नोलॉजी कंपनियां, हेल्थकेयर ऑर्गेनाइजेशंस, रिसर्च एजेंसियां इस क्षेत्र में ग्रेजुएट्स को हायर करती हैं।

आप क्लिनिकल रिसर्च एसोसिएट, बायो एनालिस्ट या मेडिकल कोडर के तौर पर भी काम कर सकते हैं।

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फिजियोलॉजी

यह शरीर की गतिविधियों, क्रियाकलापों व मेकेनिज्म की पढ़ाई है। इसके अंतर्गत ऑर्गन्स, एनाटॉमी, सेल्स, बायोलॉजिकल कंपाउंड्स, मसल्स व अन्य की टॉपिक्स की पढ़ाई करनी होती है। ह्यूमन फीजियोलॉजी के अलावा आप प्लांट फीजियोलॉजी, सेल्युलर फीजियोलॉजी, माइक्रोबायल फीजियोलॉजी जैसे ब्रांच की भी पढ़ाई कर सकते हैं।

इसके बाद क्लिनिकल एक्सरसाइज फिजियोलॉजिस्ट, बायोमेडिकल साइंटिस्ट, फीजियोथेरेपिस्ट, स्पोर्ट्स फीजियोथेरेपिस्ट, रिसर्चर, प्रोफेसर के पदों पर काम करने का मौका मिलता है।

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मरीन बायोलॉजी

यह मरीन ऑर्गेनिज्म्स (पानी में रहने वाले जीव) के बारे में है। यह कोर्स करने के बाद आपको एक्वाकल्चरिस्ट, फिशरी बायोलॉजिस्ट, एनवायरंमेटल कंसल्टेंट, रिसर्चर जैसे पदों पर काम करने का अवसर मिलता है।

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बायोमेडिकल साइंसेज

यह नया क्षेत्र है और भारत में तेजी से बढ़ रहा है। बायोमेडिकल साइंटिस्ट का काम सेल्स, ऑर्गन्स, ह्यूमन बॉडी के फंक्शंस व अन्य चीजों की स्टडी करना होता है। इनका काम बीमारियों के इलाज को समझने और बेहतर करने में मदद करता है। इसके जरिए आप बायोमेडिकल साइंटिस्ट, क्लिनिकल रिसर्चर, फॉरेंसिक साइंटिस्ट, टॉक्सिकोलॉजिस्ट, इम्यूनोलॉजिस्ट व अन्य हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के तौर पर काम कर सकते हैं।
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अलायड मेडिसिन्स

इस क्षेत्र में करियर के कई विकल्प मौजूद है। अगर आप इसमें करियर बनाते हैं तो आपको विभिन्न अस्पतालों में फिजियोथेरेपी, ऑडियोलॉजी जैसी कई अच्छी नौकरियों के अनेक अवसर मिलेंगे। रेडियो टेक्नीशियन्स, ऑप्टोमेट्रिस्ट्स डॉक्टर्स के काफी करीब रहकर काम करते हैं। ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट्स को मरीज, विभिन्न एनजीओ, स्पेशल स्कूल, सोशल सर्विस डिपार्टमेट व अन्य निजी तौर पर भी हायर करते हैं।
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