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क्या ट्रैफिक पुलिस किसी अपराधी को पकड़ सकती है, जानें पुलिस सेवा के बारे में सबकुछ

Mon, 13 Jan 2020 06:09 PM IST
Mohit Mudgal एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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police - फोटो : file photo
पुलिस और कानून को लेकर ज्यादातर लोगों के मन में भम्र होता है। आज हम आपको देंगे पुलिस बल और उससे जुड़ी कुछ अहम जानकारी। क्या आपके मन में कभी यह प्रश्न उठे हैं कि कोई ट्रैफिक पुलिस अधिकारी किसी को गिरफ्तार कर सकता है? वो कौन-सा कानून है जिसके अंतर्गत पुलिस काम करती है? पुलिस में कौन-कौन सी रैंक होती है? सीआरपीसी और आईपीसी क्या है? क्या पुलिस को किसी पर भी बल प्रयोग करने की अनुमति है?

ऐसे कई प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए अगली स्लाइड पढ़ें। 
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हमारे पास पुलिस बल क्यों है?

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  • हमारे पास नागरिकों के बचाव और सुरक्षा की भावना प्रदान करने के लिए पुलिस बल है। पुलिस का काम समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ अपराध पर रोकथाम करने का भी है। पुलिस का काम कानून लागू कराने का और यह सुनिश्चित करने का है कि पुलिस समेत सभी हर स्तर पर कानून का पालन करें।

 
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पुलिस के क्या कार्य हैं?

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पुलिस बल के कई कर्तव्य हैं:
  • अपराध को रोकना और नियंत्रित करना।
  • अपराध की ठीक से जांच करना और अपराधी का पता लगाना।
  • अदालत में पेश करने के लिए ईमानदारी से और सबूतों के आधार पर केस तैयार करना।
  • पुलिस बल के पास समग्र कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है।
  • कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए समुदाय और अपने आस-पास काम करने वालों के बारे में भी जानकारी जुटाना।

पुलिस के पास क्या-क्या शक्तियां होती है?

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  • पुलिस के पास कई प्रकार की अलग-अलग शक्तियां हैं, ये सभी शक्तियां कानून द्वारा दी गई हैं और उन्हें कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही उपयोग करना चाहिए। पुलिस को गिरफ्तारी, तलाशी, बरामदगी, अपराधों की जांच, गवाहों से पूछताछ, संदिग्धों से पूछताछ, अनियंत्रित भीड़ को नियंत्रित करने का अधिकार है। पुलिस अपनी इच्छानुसार कार्य नहीं कर सकती। किसी भी तरह से शक्तियों का दुरुपयोग या कर्तव्य की लापरवाही या पुलिस द्वारा किसी भी अपराध के लिए अधिकारी को दंडित किया जा सकता है।
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क्या पूरे भारत में सिर्फ एक ही पुलिस बल है?

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  • नहीं। प्रत्येक राज्य का अपना पुलिस बल है जो उस राज्य की सरकार के नियंत्रण में होता है। इसलिए देश में कई पुलिस बल हैं। राजधानी दिल्ली, चंडीगढ़, पुड्डुचेरी, दमन और दीव, लक्षद्वीप समूह, दादर, और नागर हवेली की पुलिस केंद्र सरकार के नियंत्रण में काम करती है। क्योकि अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भी केंद्र-शासित प्रदेश हैं तो इनकी पुलिस भी केंद्र सरकार के अधीन काम करेगी। 
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अर्धसैनिक बल क्या हैं ?

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  • अर्धसैनिक बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), असम राइफल्स, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) को कहा जाता है। केंद्र सरकार, सशस्त्र पुलिसिंग संगठनों द्वारा विशेष कर्तव्यों के लिए सशस्त्र बल तैनात किए जाते हैं। इन बलों को सेना की तर्ज पर संरचित किया जाता है। इसी वजह से उन्हें अर्धसैनिक बल कहा जाता है। ये बल पुलिस को आतंकवाद विरोधी, आतंकवादी गतिविधियों और नागरिक अशांति के समय में मदद करते हैं।
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क्या कोई भी पुलिस अधिकारी बन सकता है?

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  • हां, कोई भी पुलिस अधिकारी बन सकता है। हालांकि, आपको उस विशेष रैंक के लिए निर्धारित शर्तों और मानकों को पूरा करना होगा। उदाहरण के लिए, एक कॉन्स्टेबल के रूप में शामिल होने के लिए आपको कम से कम हाई स्कूल परीक्षा में उत्तीर्ण होना चाहिए। वहीं सब-इंस्पेक्टर के रूप में शामिल होने के लिए आपको ग्रेजुएट होना आवश्यक है।

आप कैसे बन सकते हैं पुलिस अधिकारी ?

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  • पुलिस बल में शामिल होने के तीन स्तर हैं। राज्य स्तर पर आप कॉन्स्टेबल के पद से लेकर पुलिस उपाधीक्षक के पद तक शामिल हो सकते हैं और पुलिस अधीक्षक के पद तक जा सकते हैं। या आप सब-इंस्पेक्टर स्तर पर शामिल होकर पुलिस अधीक्षक तक के पद तक पदोन्नत हो सकते हैं। कॉन्स्टेबलों और उप-निरीक्षकों के पदों पर भर्ती के लिए लिखित प्रवेश परीक्षा देनी होती है। अगर परीक्षा में पास हो गए तो आपको शारीरिक दक्षता परीक्षा देनी होती है। शारीरिक परीक्षा पास होने के बाद आपको इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। इसके बाद आप एक मेडिकल चेक-अप से गुजरते हैं, यह देखने के लिए कि क्या आप चिकित्सकीय रूप से फिट हैं और केवल तभी अंतिम चयन किया जाता है। दूसरी ओर आईपीएस अधिकारी केंद्रीय स्तर पर भर्ती किए जाते हैं। इन भर्तियों में रैंक, अतिरिक्त या सहायक अधीक्षक या पुलिस अधीक्षक के रूप में शुरू होते हैं।

आईपीएस क्या होता है?

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  • आईपीएस (IPS) यानी भारतीय पुलिस सेवा। यह भारत सरकार की तीन मुख्य अखिल भारतीय सेवाओं में से एक है। अन्य दो, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय विदेश सेवा (IFS) हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जहां से पुलिस अधिकारियों को पूरे देश में वरिष्ठ पदों पर सेवा देने के लिए तैयार किया जाता है।

कैसे बने आईपीएस?

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  • भारतीय पुलिस सेवा से जुड़ने के लिए आपको पहले यूपीएससी द्वारा आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होना होगा। समय-समय पर इसके लिए स्थानीय और राष्ट्रीय अखबारों में विज्ञापन जारी होते हैं। प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद आप यूपीएससी की मुख्य लिखित परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। अगर आप लिखित परीक्षा में भी उत्तीर्ण हो जाते है तो आपको साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है। जब आप साक्षात्कार में सफल हो जाते हैं, तो यहां आपको विदेश सेवा, प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा, वन सेवा और राजस्व सेवा का विकल्प दिया जाता है।

आईपीएस अधिकारी को क्या प्रशिक्षण दिया जाता है?

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  • आईपीएस प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के पहले आपको मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री, प्रशासनिक अकादमी में भेजा जाएगा। इसके बाद आपको हैदराबाद में राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में एक बुनियादी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के लिए भेजा जाएगा।

अन्य रैंकों को किस तरह का प्रशिक्षण मिलता है?

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  • अधिकांश राज्यों में अपने स्वयं के प्रशिक्षण स्कूल होते हैं, जहां गैर-आईपीएस अधिकारी और कॉन्स्टेबल को प्रशिक्षण दिया जाता है। बाद में, यहां समय-समय पर सेवा प्रशिक्षण भी दिया जाता है। अन्य रैंकों को बाहरी शारीरिक प्रशिक्षण, हथियारों के उपयोग का प्रशिक्षण, प्राथमिक चिकित्सा और भीड़ नियंत्रण का प्रशिक्षण मिलता है। 

पुलिस विभाग में कौन-कौन सी रैंक होती हैं?

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  • पुलिस में कॉन्स्टेबल रैंक सबसे निचले पायदान पर होती है। इसके बाद हेड कॉन्स्टेबल (HC), असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI), सब-इंस्पेक्टर (SI), इंस्पेक्टर (IP), असिस्टेंट / डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP / DSP), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP), पुलिस अधीक्षक (SP), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG), पुलिस महानिरीक्षक (IGP), अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) और सबसे ऊपर महानिदेशक पुलिस (DGP) की रैंक होती है।

बीट कॉन्स्टेबल कौन होता है?

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  • जैसा कि आप जानते हैं, किसी भी पुलिसकर्मी को किसी के साथ बल प्रयोग करने की अनुमति नहीं है, वे ऐसा तभी कर सकते है जब कोई गिरफ्तारी का विरोध कर रहे हों या भागने की कोशिश कर रहे हों। किसी पुलिस अधिकारी को बीट पुलिस अधिकारी इसलिए बुलाया जाता है, क्योंकि उसके पास एक नियमित विशिष्ट क्षेत्र या मार्ग होता है, जिसपर वह गश्त करता है।  यह जांचने के लिए कि क्या सब कुछ क्रम में है और कुछ भी संदिग्ध तो नहीं चल रहा है।

क्या सभी पुलिस अधिकारियों को एकसमान कर्तव्यों का पालन करना होता है?

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  • डीजीपी के स्तर से एक कॉन्स्टेबल तक प्रत्येक पुलिस अधिकारी को विभिन्न कर्तव्य सौंपे जाते हैं। ये कर्तव्य हर राज्य के पुलिस मैनुअल में सूचीबद्ध होते हैं। एक जूनियर अधिकारी अपने वरिष्ठ को सौंपे गए कर्तव्यों का पालन नहीं कर सकता है। उदाहरण के लिए, एक एसआई एक एसपी को सौंपा गया कर्तव्य नहीं कर सकता है। हालांकि, कुछ भी जो एक जूनियर अधिकारी द्वारा किया जा सकता है, वह एक वरिष्ठ रैंक के अधिकारी द्वारा भी किया जा सकता है।

क्या ट्रैफिक पुलिस अधिकारी किसी को गिरफ्तार कर सकता है?

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  • हां। ट्रैफिक अधिकारी भी एक पुलिस अधिकारी होता है जिसे मूल रूप से ट्रैफिक ड्यूटी दी जाती है। यदि वह किसी को कोई अपराध करते हुए देखता है तो उसे  किसी अन्य पुलिसकर्मी की तरह गिरफ्तार कर सकता है।

अपराध जांच विभाग (CID) क्या है?

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  • अपराध जांच विभाग को विशेष शाखा या खोजी शाखा भी कहा जाता है। यह राज्य पुलिस की जांच एजेंसी होती है। सीआईडी को धोखाधड़ी, गैंगवॉर और अन्य गंभीर अपराधों की जांच करने के लिए बुलाया जा सकता है।

क्या अपराध जांच विभाग (CID) पुलिस से अलग है?

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  • नहीं, सीआईडी कर्मियों का चयन पुलिस अधिकारियों में से ही किया जाता है।

पुलिस बल का प्रभारी कौन होता है?

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  • प्रत्येक राज्य में एक पुलिस प्रमुख होता है। पुलिस प्रमुख को पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी कहा जाता है। वह पुलिस विभाग में सबसे ऊपर होते हैं। लेकिन डीजीपी को भी सरकार को रिपोर्ट करना होता है। उनके बॉस राज्य या केंद्र में गृह मंत्री होते हैं।

पुलिस किस कानून के अंतर्गत काम करती है?

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  • अधिकतर राज्यों में पुलिस, पुलिस अधिनियम (Police Act) के तहत काम करती है। कुछ राज्यों का अपना पुलिस एक्ट है। लेकिन सभी पुलिस अधिनियम पुराने कानूनों पर आधारित हैं। हालही में कुछ राज्यों ने अपने अधिनियमों में बदलाव कर नए पुलिस कानून बनाए हैं। इसके अलावा कई अन्य कानून भी हैं जैसे सीआरपीसी और आईपीसी जिनके आधार पर पुलिस काम करती है।

सीआरपीसी और आईपीसी क्या है?

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  • CrPC यानी दंड प्रक्रिया संहिता। जब कोई अपराध होता है, तो पुलिस हमेशा दो प्रक्रियाओं का पालन करती है। एक पीड़ित के लिए और दूसरी आरोपी के लिए। ये प्रक्रियाएं सीआरपीसी में विस्तृत हैं।
  • IPC यानी भारतीय दंड संहिता। कुछ प्रकार के मानव व्यवहार को कानून द्वारा अनुमति नहीं है और इस प्रकार के व्यवहार से व्यक्ति को कुछ नकारात्मक परिणाम मिलेंगे। इस तरह के व्यवहार को 'अपराध' कहा जाता है और जिसके परिणामों को 'सजा' कहा जाता है। वो व्यवहार और कार्य, जिन्हें अपराध माना जाता है उन अपराधों की सजा मुख्य रूप से आईपीसी में निहित है।
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पुलिस अधिनियम क्या कहता है?

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पुलिस अधिनियम आमतौर पर बताता है कि पुलिस क्या नहीं कर सकती। इसके साथ ही पुलिस बल को कैसे व्यवस्थित किया जाए। पुलिस में कौन-कौन सी रैंक हो, पुलिस बल का पर्यवेक्षण कौन करेगा, नियुक्तियां कौन करेगा, गलत करने पर पुलिस को किस सजा या अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, इसके लिए पुलिस अधिनियम में प्रावधान किए गए हैं। अधिनियम में जनता के लिए भी कुछ नियम दिए गए हैं।
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