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Corona in Noida: ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पुलिस चौकी में, कोविड से कैसे बचे जान

Sun, 07 Aug 2022 11:10 PM IST
अनुराग सक्सेना माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
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ऑक्सीजन कंसंट्रेटर - फोटो : amar ujala
बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच मरीजों के बचाव के लिए ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में तैयारी नहीं है। चोरों से बचाव के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर थाने में जमा है। जहां ऑक्सीजन कंसंट्रेटर हैं भी तो इनका अभी तक उपयोग नहीं हुआ है। ऐसे में मौका पड़ने पर यह काम करेंगे भी या नहीं, इस पर भी सवाल है।

तीन बड़े सामुदायिक केंद्र बिसरख, दादरी और जेवर में अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। पेश है ग्रेटर नोएडा से संदीप वर्मा, दनकौर से दीपक शर्मा, बिलासपुर से हरिप्रकाश बावा, रबूपुरा से दीपक सिंघल, दादरी से ऋषिपाल सिंह, जेवर से मनोज शर्मा, जारचा से अभिमन्यु की रिपोर्ट...
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ऑक्सीजन सिलेंडर - फोटो : ANI

थाने की सुरक्षा में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर

बिलासपुर। कस्बे से लगभग दो किलोमीटर दूर जंगल में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्था फैली है। विधायक के प्रयास से कोरोना काल में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन, सैनिटाइजशेन मशीन, वाटर आरओ, बिजली आदि की व्यवस्था की गई थी। अस्पताल में चौकीदार न होने के कारण पीएचसी में रखे सामान चार उड़ा ले जाते हैं। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की सुरक्षा के लिए उसे बिलासपुर कस्बे की पुलिस चौकी में रखवाया गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर न होने के चलते मरीज भी कम ही आते हैं। यह अस्पताल दनकौर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आता है। डॉ. नारायण किशोर का कहना है कि बिलासपुर में डॉ. रमेश और डॉ. अनुराग की तैनाती है। निवासियों का कहना है कि अधिकांश वार्डबॉय ही मरीजों को दवाई देता है।
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अस्पताल में लगी भीड़। - फोटो : amar ujala

मरीजों को नहीं मिल पा रहा उपचार

रबूपुरा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोरोना काल के दौरान कोविड-19 वार्ड जैसी सुविधाएं देने का जन प्रतिनिधियों ने वादा किया गया था, लेकिन आज भी सुविधाएं नहीं मिलीं। कोरोना संक्रमण के मामले आ रहे हैं, लेकिन मरीजों को उपचार पूरी तरह से नहीं मिल पा रहा है। कुछ दवाई डॉक्टर बाहर से लाने के लिए कहते हैं। स्वास्थ्य केंद्र पर आरटीपीसीआर एवं एंटीजन जांच उपलब्ध है परंतु भर्ती कर उपचार की सुविधा नहीं है।

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ऑक्सीजन प्लांट - फोटो : अमर उजाला

500 लीटर का ऑक्सीजन प्लांट देगा आपूर्ति

कोरोना काल में सामुदायिक केंद्र पर सुविधाएं न मिलने पर जन प्रतिनिधियों ने सीएसआर के माध्यम से 500 लीटर प्रति मिनट क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लगाया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. नरेन्द्र तिवारी ने बताया 40 से 60 मिनट के अंदर प्लांट 90 प्रतिशत ऑक्सीजन आपूर्ति कर सकेगा। स्वास्थ्य केंद्र पर 50 नए बैड तैयार हैं। यहां 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगा हुआ है। बारिश के बाद परिसर में जलभराव की समस्या बनी हुई है। 
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अल्ट्रासाउंड मशीन - फोटो : अमर उजाला

विशेषज्ञ के अभाव में धूल फांक रहीं अल्ट्रासाउंड मशीन

दादरी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 250 लीटर का ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो गया है। यहां पर बड़ी संख्या में 130 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और 60 से अधिक ऑक्सीजन सिलेंडर हैं। यहां भी डॉक्टरों की कमी है। मरीजों को समय रहते उपचार नहीं मिल पा रहा है। पिछले 6 माह से अल्ट्रासाउंड मशीन रखी हुई है, लेकिन विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं।
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ऑक्सीजन कंसंट्रेटर - फोटो : iStock

छह में से केवल एक कंसंट्रेटर चालू 

दनकौर। कस्बे के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोरोना के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही संख्या को देखते हुए 6 बेड का वार्ड बनाया जा रहा है। मौजूदा वक्त में रोजाना करीब 100 मरीज कोरोना जांच के लिए आ रहे हैं। साथ ही रिपोर्ट पोजेटिव आने पर दवाई भी दी जा रही है। केंद्र पर कोरोना टीकाकरण का कार्य भी किया जा रहा है। कोरोना काल में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मुहैया कराए गए थे, अब चिकित्सक कक्ष में एक ही कंसंट्रेटर चालू हालत में मौजूद है।
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जिला अस्पताल, नोएडा - फोटो : अमर उजाला

गांव छोलस स्वास्थ्य उपकेंद्र पड़ा बीमार

जारचा। दादरी तहसील के छोलस गांव स्थित स्वास्थ्य उपकेन्द्र लोगों का उपचार करने के बजाय स्वयं बीमार पड़ा है। अस्पताल के सामने गंदगी का ढेर लगा हुआ है। खिड़कियां टूटने से अंदर कमरों में भरे पानी भर गया है। ऐसे में मच्छर पनप रहे हैं।
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कोरोना जांच - फोटो : पीटीआई- फाइल फोटो

प्रतिदिन 125 कोरोना संभावित की हो रही जांच

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख स्थित सामुदायिक केंद्र पर प्रतिदिन करीब 125 से 150 तक कोरोना के संभावित मरीजों की जांच हो रही है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सचिंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में 30 बेड हैं। यहां 250 लीटर ऑक्सीजन क्षमता का प्लांट लगाया हुआ है। वहीं, 55 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर हैं। वहीं, डाढ़ा सामुदायिक केंद्र के प्रभारी डॉ. राहुल वर्मा ने बताया कि प्रतिदिन 20 से 30 लोगों की कोरोना जांच होती है। यहां पर तैनात पांच डॉक्टरों में से हमेशा दो डॉक्टर अटैच रहते हैं। वहीं, एक डॉक्टर की की पोस्टमार्टम पर ड्यूटी लगाई गई है।
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