प्रद्युम्न हत्याकांड मामले में सवालों के घेरे में फंसी गुरुग्राम पुलिस अब अपनी साख बचाने की कोशिश में जुटी हुई है। अशोक के जेल से बाहर आने के बाद अब गुरुग्राम पुलिस के अधिकारियों की नींद उड़ गई है।
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- फोटो : पवन कुमार सेठी
बृहस्पतिवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय में आयोजित हुए एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए पुलिस आयुक्त संदीप खिरवार ने कहा कि प्रद्युम्न हत्याकांड मामले की जांच की जा रही है। जिन पुलिसकर्मियों ने मामले की गलत जांच की है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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- फोटो : पवन कुमार सेठी
खिरवार ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। इसमें यह जांचा जा रहा है कि मामले में किस अधिकारी द्वारा लापरवाही बरती गई है। इसकी एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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- फोटो : सुदर्शन झा/अमर उजाला
मामले में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मी अथवा अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि इस मामले की जांच के लिए गुरुग्राम पुलिस द्वारा एसआईटी गठित की गई थी।
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- फोटो : सुदर्शन झा/अमर उजाला
इसमें दो डीसीपी व तीन एसीपी को शामिल किया गया था। मामले में प्रारंभिक जांच के बाद ही बस कंडक्टर अशोक को गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में तत्कालीन डीसीपी सिमरदीप सिंह ने 8 सितंबर और पुलिस आयुक्त ने 9 सितंबर को पत्रकारवार्ता कर कंडक्टर अशोक के खिलाफ पुख्ता सबूत होने का दावा किया था, लेकिन बाद में जब मामला सीबीआई के अधीन गया और सीबीआई ने 11वीं कक्षा के छात्र को गिरफ्तार किया तो पुलिस की किरकिरी होने लगी।
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- फोटो : सुदर्शन झा/अमर उजाला
पुलिस आयुक्त ने पत्रकारवार्ता कर अपनी सफाई पेश करनी शुरू कर दी कि गुरुग्राम पुलिस की जांच प्रारंभिक स्टेज पर थी और जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंची थी कि उससे पहले मामला सीबीआई के अधीन चला गया।
इसके बाद बस कंडक्टर को अदालत से जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद कंडक्टर अशोक अब मामले में खुलासा करने लगा है कि किस तरह से उसे थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया गया। यह आरोप अशोक ने 6 पुलिसकर्मियों पर लगाया।