yellow fungus
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अकेले दवा या इंजेक्शन के दम पर मरीज के ठीक होने की संभावना बेहद कम रहती है। क्योंकि दवा को फंगस वाली जगह तक पहुंचने में समय लगता है। इसलिए ऑपरेशन करना जरूरी होता है। डॉ. एपी गर्ग बताते हैं कि ब्लैक, सफेद और येलो फंगस तो जानलेवा है ही लेकिन स्प्रेलॉजिक फंगस सबसे खतरनाक है जो छाती को जकड़ लेता है। यह शरीर में सबसे तेजी से फैसला है। इसे मेडिकल साइंस की भाषा में ग्रीन मोल्ड भी कहा जाता है। कभी कभी यह येलो ग्रीन मोल्ड के प्रकृति में भी मिलता है लेकिन यह फंगस करोड़ों केस में से किसी एक के अंदर मिलता है।
फंगस का शरीर के किन अंगों पर पड़ता है असर
ब्लैक फंगस : यह एक बेहद दुर्लभ संक्रमण है। म्यूकर फफूंद के कारण होता है जो आमतौर पर मिट्टी, पौधों, खाद, सड़े हुए फल और सब्जियों में पनपता है। यह आंख, नाक, फेफड़ों, मष्तिष्क, जबड़ों को प्रभावित करता है। सबसे पहले इसका असर आंख और नाक में दिखाई देता है।
व्हाइट फंगस (कैंडिड) : त्वचा, फेफड़ों व खून में संक्रमण, मुंह में छाले आना, अल्सर, यूरिनल, गैस्ट्रो सिस्टम को भी प्रभावित करता है। नाक में पपड़ी जम जाना। सिर में तेज दर्द, नाक बंद, पपड़ी सी जमना, उल्टियां, आंखें लाल होना, सूजन, जोड़ों पर तेज दर्द होने जैसे प्रमुख लक्षण हैं। एस्परजिलोसिस फंगस- फेफड़ों और श्वास की नली को सबसे अधिक प्रभावित करता है। इसके साथ ही आंख में कॉर्निया को सफेद कर देता है, जिससे अंधापन भी हो सकता है। चक्कर आना, आंखे लाल होना और नाक में खुजली होना, इसके प्रमुख लक्षण हैं।