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Dog Attack: हमले में घायल बच्ची के चेहरे पर आए 115 टांके, 36 घंटे सर्जरी का दर्द सहती रही एक साल की रिया

Mon, 21 Nov 2022 09:55 PM IST
आकाश दुबे माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद
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बच्ची का ऑपरेशन करते डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
कुत्तों के हमले थम नहीं रहे हैं। आए दिन कहीं न कहीं से ऐसे मामले सामने आ ही जाते हैं। ताजा मामला गाजियाबाद के विजयनगर से आया है। यहां कुत्ते के काटने से गंभीर रूप से घायल एक साल की बच्ची रिया की 36 घंटे के बाद सोमवार को एमएमजी अस्पताल के चिकित्सकों ने सर्जरी की। डॉ. महेंद्र और ईएनटी स्पेशलिस्ट ने मिलकर प्राथमिक सर्जरी की। बच्ची को चेहरे पर लगभग सवा सौ टांके लगे हैं। ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. राकेश ने बताया कि छोटे-छोटे टांके लगाने पड़े थे। बच्ची के चेहरे, नाक कान के पास कई स्थानों पर टेढ़े-मेढ़े घाव थे, जिन पर टांके लगाने पड़े हैं।

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मासूम रिया को गोद में लिए परिजन - फोटो : अमर उजाला
डॉक्टर के अनुसार, बच्ची स्वस्थ है। 14-15 दिनों में पूर्ण रूप से ठीक हो जाएगी। सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने बताया कि गहरे घाव में एंटी रैबीज इंजेक्शन के साथ-साथ सीरम के इंजेक्शन भी लगाने होते हैं। सरकारी स्तर पर सप्लाई नहीं होती है और काफी महंगा इंजेक्शन भी होता है। इस इंजेक्शन को बाहर से खरीदा गया और बच्ची की सर्जरी की गई है।

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मासूम रिया - फोटो : अमर उजाला
चाइल्ड पीजीआई में नहीं किया गया भर्ती
बच्ची के पिता सतपाल ने बताया कि नोएडा पीजीआई में डॉक्टर ने देखने से भी इनकार कर दिया था और दिल्ली के अस्पताल में भी रेफर नहीं किया। निजी अस्पताल में इसका खर्च पांच लाख बता रहे थे। अब सोमवार को एमएमजी अस्पताल में प्राथमिक सर्जरी हुई है। चेहरे पर निशान रह जाने का खतरा है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
घर के बाहर खेलते हुए कुत्ते ने किया था हमला
गाजियाबाद के विजयनगर में बीते शनिवार को घर के बाहर खेल रही एक साल बच्ची को कुत्ते ने बुरी तरह से नोंच डाला था। गाल का मांस हट गया था और बच्ची के दांत भी दिखने लगे थे।
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कुत्ते के हमले से मासूम को आए 115 टांके - फोटो : अमर उजाला
डॉक्टर ने दिखाई सूझबूझ
उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उस समय इमरजेंसी में मौजूद डॉ. नितिन प्रियदर्शी ने प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को एएलएस एंबुलेंस से चाइल्ड पीजीआई के लिए रेफर कर दिया था। एएलएस से भेजने के बावजूद पीजीआई में भर्ती नहीं किया, जबकि नियमत: एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस से मरीज रेफर होने पर उसे भर्ती करना पड़ता है।
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