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घरों से लेकर श्मशान घाट तक पानी में डूबी दिल्ली, किसी ने छोड़ा आशियाना, तो कोई खतरे की कर रहा अनदेखी

संतोष कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 21 Aug 2019 02:43 PM IST
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- फोटो : विवेक निगम/जी पाल
बीते तीन दिनों से दिल्ली में लगातार यमुना नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। रविवार को हथिनीकुंड से पानी छोड़े जाने के कारण इस समय दिल्ली और आसपास के कई इलाकों में यमुना नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। दिल्ली में घरों से लेकर श्मशान घाट तक पानी भर गया है जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इस बीच हजारों लोग अपना घर छोड़ सरकारी टेंटों में शिफ्ट होने को मजबूर हो गए हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपना घर तब तक छोड़ने को तैयार नहीं हैं जब तक उनकी खाट के नीचे पानी न आ जाए। देखें तस्वीरें...
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- फोटो : विवेक निगम
दिल्ली में यमुना लगातार तीसरे दिन खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मंगलवार को दिनभर जलस्तर बढ़ने के बाद बुधवार को भी लगातार नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। जहां मंगलवार रात रात 9 बजे तक यह लाल निशान पार कर 206.40 मीटर तक पहुंच गया था। वहीं बुधवार को यह 206.60 मीटर पहुंच गया है।

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- फोटो : विवेक निगम
नई दिल्ली के यमुना खादर के अपने खेत में चारपाई पर लेटे जगदीश का कहना है कि अभी तो हमारी खाट के नीचे पानी आया ही नहीं है। इसलिए यहां से जाने का कोई मतलब नहीं। जब पानी हमारी चारपाई के नीचे आएगा, तब देखा जाएगा।

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- फोटो : विवेक निगम
जगदीश ही नहीं, उनके जैसे करीब तीन हजार परिवारों के लोग यमुना खादर इलाके में अपनी झुग्गियों में रह रहे हैं। बाढ़ से प्रभावित होने वाले इलाकेे में जाकर देखा तो पाया कि कहीं स्कूल चल रहे हैं तो कहीं लोग रोजमर्रा की जिंदगी के लिए गुजर-बसर का इंतजाम कर रहे हैं।

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- फोटो : विवेक निगम
किसी को यमुना में आने वाली बाढ़ की परवाह नहीं है। यह बात अलग है कि सरकार ने इनके जैसे बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए इंतजाम किए हैं।

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- फोटो : विवेक निगम
यमुना खादर ने अभी बाढ़ को लेकर हलचल भी नहीं है। बाढ़ आने की सरकारी चेतावनियों के बीच लोगों की जिंदगी आम ढर्रे पर है। रोज की तरह बच्चों की क्लास चल रही थी। करीब 50 बच्चे पढ़ाई में लगे थे। वहीं, किसान खेतों में फसलों की देखरेख करते दिखे।

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- फोटो : विवेक निगम
दिलचस्प यह कि नदी के तेज बहाव से बामुश्किल 50 मीटर दूर किसान खेत के बांध की ऊंचाई इसलिए बढ़ाते दिखे कि पानी बढ़ने पर उनकी सब्जियों की फसल बच जाए। करीब तीस साल से यमुना खादर में खेती कर रहे जगदीश बाबू बताते हैं कि हर साल की यही कहानी है।

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- फोटो : विवेक निगम
2010 में घर तक एक बार पानी आया था। इससे एक दिन के लिए पुश्ते पर जाना पड़ा था। बाकी सालों में हंगामा ज्यादा मचता है। हमारे यहां हकीकत में ज्यादा कुछ नहीं होता। इसीलिए हमने इस बार भी सिविल डिफेंस वालों से बोल दिया है कि खाट के नीचे जब पानी आएगा, तभी अपना घर छोडूंगा।

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- फोटो : विवेक निगम
अपना काम कर दे रहे हैं, बाकी यमुना मइया की मरजी
रामकुमार का खेत तेजी से बहती यमुना के एकदम किनारे है। वह खेत की तरफ का बंधा ऊंचा करते दिखे। बातचीत में कहा कि साहब, खेत किराए पर है। फसल डूबने पर सारा नुकसान हमारा होगा।

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- फोटो : विवेक निगम
मुआवजा अगर मिला भी तो खेत के मालिक के खाते में जाएगा। उसमें से हमें एक पाई भी नहीं मिलेगी। बंधे की ऊंचाई इसलिए बढ़ा रहे हैं, जिससे सब्जियां बच जाएं। हम तो अपना काम कर दे रहे हैं, बाकी यमुना मइया की मरजी।

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- फोटो : विवेक निगम
चिंता की जगह बाढ़ को लेकर लोगों में दिखा कौतूहल
इलाके में बढ़ते जल स्तर को देखने के लिए जुटने वाले लोगों की थोड़ी चहलकदमी है। इनमें ज्यादातर संख्या उन लोगों की थी, जो यमुना खादर में नहीं रहते। इनके लिए यमुना की बाढ़ चिंता की जगह कौतूहल का विषय है।

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- फोटो : विवेक निगम
प्रदूषण से सालभर काली पड़ी रहने वाली यमुना का फिलहाल का मटमैला रंग और उसकी चाल इन्हें आकर्षक लग रही थी। मयूर विहार फेज-वन से नदी की बाढ़ देखने पहुंचे धीरेंद्र झा के मुताबिक, ठीक ही है। बाढ़ से कम से कम यमुना साफ तो हो जाएगी। सरकार चाह ले तो आगे से नदी गंदी ही नहीं होगी।

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- फोटो : विवेक निगम
पुश्ते पर लगे टेंट खाली
लोगों की बेफिक्री का असर सरकारी इंतजाम पर दिख रहा है। पुश्ते के किनारे लगे ज्यादातर टेंट अभी खाली हैं। किसी को यहां बसाया नहीं जा सका है। इतना जरूर है कि सरकारी एजेंसियों की तरफ से लाए गए खाने का पैकेट लेने के लिए बच्चों की भीड़ लगती रहती है।

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- फोटो : विवेक निगम
एक सिविल डिफेंस कर्मी ने बताया कि हम पिछले तीन दिन से यहां ड्यूटी दे रहे हैं। जब लोग अपना घर छोड़ने को तैयार नहीं तो उनको बाहर कैसे लाया जा सकता है। फिर भी, पुश्ते के साथ टेंट लगा दिए गए हैं। अगर उनके घरों में पानी भरता है तो यहां रहने में दिक्कत नहीं होगी।

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- फोटो : विवेक निगम
पूर्वी दिल्ली के यमुना खादर में यमुना के बढ़ते जल स्तर के कारण बंद पड़ा बारापुला एक्सटेंसन फ्लाईओवर का काम

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निगम बोध घाट पर भरा पानी - फोटो : अमर उजाला
यमुना खादर से अब तक 23 हजार लोगों को निकालकर अस्थायी टेंट में भेजा गया है। दिल्ली सरकार के राहत व बचाव दल स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

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- फोटो : विवेक निगम
मंगलवार दोपहर तक यमुना बाजार और मजनूं का टीला तक पानी पहुंच गया था। आईएसबीटी कश्मीरी गेट के पास के तिब्बती मार्केट को एहतियातन बंद करा दिया गया।

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- फोटो : विवेक निगम
रिंग रोड तक पानी पहुंचने से रोकने के लिए मिट्टी भरे कट्टे लगाए गए हैं। वहीं, पूर्वी दिल्ली में यमुना का पानी अभी बस्तियों तक नहीं पहुंचा है, लेकिन जलस्तर बढ़ने पर कॉलोनियों में पानी घुसना तय माना जा रहा है।

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- फोटो : जी पाल
अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार दोपहर एक से 5 बजे के बीच जलस्तर 207.08 मीटर तक पहुंचने की आशंका है।

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यमुना का जलस्तर खतरे के निशान के पार - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली सरकार के राजस्व मंत्री कैलाश गहलोत ने बताया कि अभी हालात नियंत्रण में हैं। दिल्ली में किसी तरह का जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है।

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- फोटो : जी पाल

लोहे के पुल से ट्रेनों की आवाजाही बंद

यमुना में उफान को देखते हुए रेलवे ने लोहे के पुराने पुल पर मंगलवार को ट्रेनों की आवाजाही को बंद कर दिया।

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- फोटो : जी पाल
अब इस रूट से चलने वाली ट्रेनें नई दिल्ली स्टेशन से चलेंगी। बुधवार को इसका ज्यादा असर देखने को मिलेगा। ज्यादातर ट्रेन सुबह पुरानी दिल्ली स्टेशन पहुंचती हैं और इसी स्टेशन से अन्य रूट पर जाती हैं।

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yamuna flood - फोटो : जी पाल
यमुना का सबसे ज्यादा जलस्तर
वर्ष        जलस्तर (मीटर में)
1978    297.48
2010    207.11
2013    207.32


दोपहर बाद ऐसे उफनी यमुना
समय         जलस्तर
एक बजे      206.08
दो बजे       206.12
तीन बजे      206.17
चार बजे      206.21
पांच बजे     206.25
छह बजे      206.29
सात बजे    206.33
आठ बजे     206.36
नौ बजे      206.40
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