नौकरी से निकालना कोई इंसाफ नहीं बल्कि उन्हें सजा-ए-मौत मिलना चाहिए। बेटे की मौत के बाद रोते हुए अभिषेक की मां बस यही रट लगाए जा रही थी कि उसकी बेटे की मौत को महज एक हादसा मानकर आरोपियों पर कार्रवाई न हो बल्कि इन्हें फांसी देकर उन्हें सख्त सजा दी जानी चाहिए। (सभी फोटोः विवेक निगम)
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abhishek death
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार देर रात जैसे ही बेटे की मौत की खबर घर पर आयी अभिषेक के घर में कोहराम मच गया। किसी को भी यकीन नहीं हो रहा था बस चंद घंटों बाद वापस आने के लिए कह कर गया अभिषेक अब कभी वापस नहीं आयेगा। मां तो बार बार बेहोश हो जा रही थी। उसके घर पर रिश्तेदारों पड़ोसियों का तांता लगा हुआ था। अभिषेक की मां सुनीता ने कहा कि दोषी पुलिसकर्मी नौकरी से निकाले जाने के बाद जिंदा रहेंगे। लेकिन उनकी लापरवाही ने उसके कलेजे के टूकड़े की जान ले ली। पिता की बीमारी के बाद से पूरे परिवार की जिम्मेदारी अभिषेक के कंधों पर थी।
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मां सुनीता ने बताया कि मेरा बेटा घर की मुखिया की तरह से था। वह हमारी परेशानी दूर करने की सोचता रहता था। उसके जाने से परिवार पूरी तरह से टूट गया है। अभिषेक हमेशा अपने पिता की बीमारी और स्नातक की पढ़ाई कर रही 19 वर्षीय बहन की शादी करवाने के बारे में सोचता था। वह अपने छोटे भाई कुणाल को पढ़ा लिखाकर अधिकारी बनना चाहता था। इसलिए वह स्नातक करने के साथ साथ काम भी कर रहा था। मां ने रूंधे गले से कहा कि मेरे बेटे को छीनने वालों के खिलाफ शख्त सजा मिलनी चाहिए।
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दिल्ली पुलिस में भर्ती होना चाहता था अभिषेक
परिवार वालों ने बताया कि अभिषेक की बचपन से ही ख्वाहिश थी कि वह बड़ा होकर पुलिस में भर्ती हो। पढाई के साथ साथ उसने जी तोड़ शारीरिक मेहनत की। स्नातक की पढ़ाई करने के साथ साथ अभिषेक ने वर्ष 2016 में दिल्ली पुलिस का फार्म भरा था। पिछले साल फिजिकल क्लीयर कर लिया था। वह इसके रिजल्ट का इंतजार कर रहा था। इसके साथ ही एक महीना पहले उसने यूपी में भी फार्म भरकर आया था।
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विकास अभिषेक को ढूढने निकला था
डीजे चलाने वाले विकास ने बताया कि उसने अभिषेक को एक लैपटॉप दिया था। जिसे उसे एम ब्लॉक में हो रहे एक कार्यक्रम में देना था। काफी रात होने पर जब अभिषेक वहां नहीं पहुंचा तो विकास अभिषेक को तलाशने के लिए पैदल निकला। जी ब्लॉक के पास उसने अपनी क्षतिग्रस्त बाइक देखी। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने पूछने पर पता चला कि बाइक सवार दुर्घटना का शिकार हो गया है और उसे महावीर अस्पताल ले जाया गया है। विकास ने अभिषेक के पिता को फोन कर अस्पताल पहुंचा। जहां पता चला कि उसकी मौत हो चुकी है।
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सीसीटीवी फुटेज आयी सामने
अभिषेक की मौत का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। जिसमें देखा गया है कि वह सड़क पर लगे बेरीकेड के किनारे से निकलने का प्रयास कर रहा है। इसी दौरान अचानक वह लडख़ड़ा कर गिर गया। हालांकि फुटेज में यह साफ तौर पर नहीं दिख रहा है कि आखिर हादसा कैसे हुआ। लेकिन जब लोगों ने पास जाकर हादसे को देखा तो पता चला कि दो बेरीकेड के बीच लगे तार में फंसकर उसकी जान चली गयी।
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जुगाड़ बेरीकेड ने ली अभिषेक की जान
राजधानी में बेरीकेड लगाने के लिए दिशा निर्देश जारी किये गये है लेकिन दिल्ली पुलिस इन निर्देशों का पालन नहीं कर जुगाड़ बेरीकेड का इस्तेमाल करती है। इन दिशा निर्देश का सिर्फ वीआईपी इलाके में पालन किया जाता है। जुगाड़ बेरीकेड हादसे और लोगों की परेशानी का सबब बनते हैं। नेताजी सुभाष प्लेस के शकूरपुर जी ब्लॉक में जिस जगह पर हादसा हुआ है वहां बेरीकेड लगाने के नियमों की अनदेखी की गयी है। यहां पुलिसकर्मियों ने बेरीकेड को जुगाड़ की तरह इस्तेमाल किया।
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सड़क पर बेरीकेड लगाने के नियम में सबसे अहम है कि वहां पुलिसकर्मियों की मौजूदगी होनी चाहिए लेकिन नेताजी सुभाष प्लेस में बेरीकेड के पास कोई मौजूद नहीं था। जो पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण आधार बना। पुलिस अकसर वाहन चोरी और झपटमारी की रोकथाम के लिए बेरीकेड लगाती है लेकिन अभियान के खत्म होने के बाद पुलिस लापरवाही की वजह से उसे सड़क पर ही छोड़ देती है। हालांकि इस लापरवाही के लिए यातायात पुलिस भी उतनी ही जिम्मेदार है। सड़क पर यातायात व्यवस्था सूचारू रूप से चले इसके लिए यातायात पुलिस को भी रास्ते पर लगे बेरीकेड को हटाने की जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
बेरीकेड लगाने के नियम
. दो बेरीकेड के बीच तार या रस्सी नहीं लगा होना चाहिए।
. बेरीकेड के उपर आगे पीछे रिफ्लेक्टर लगा होना चाहिए।
. सड़कों पर लगाए जाने वाले बेरीकेड पर लाइट लगा हुआ दिल्ली पुलिस का बोर्ड होना चाहिए।
. रात में बेरीकेड लगाए जाने वाले जगह पर स्ट्रीट लाइट जली होनी चाहिए।
. बेरीकेड पर तैनात पुलिसकर्मियों को चमकदार जैकेट लगाकर तैनात होना चाहिए, ताकि वाहन चालकों को दूर से बेरीकेड दिखायी दे।