दिल्ली-एनसीआर में वारदात करने के इरादे से छिपे नौ संदिग्ध नक्सलियों को एटीएस टीम ने दबोचकर नोएडा पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। दिसंबर 2013 में भी पश्चिम बंगाल की पुलिस नोएडा थाना सेक्टर-20 क्षेत्र से दो आतंकवादियों को पकड़कर ले गए थी, तब भी स्थानीय पुलिस को जानकारी गिरफ्तारी होने के बाद ही पता चली थी।
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- फोटो : राजन राय
एटीएस के कमांडो ने इतनी फुर्ती से कार्रवाई की कि स्थानीय पुलिस को जब तक जानकारी मिलती टीम जा चुकी थी। हिंडन विहार के निवासियों के मुताबिक, करीब 6 माह से जिस मकान में संदिग्ध नक्सली रह रहे थे, वहां पर रात में लोगों का आना जाना रहता था। दो लोग उनमें ऐसे थे जो दुकानों से सामान खरीदने अक्सर आते जाते रहते थे।
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- फोटो : राजन राय
उनकी बातों से ऐसा लगता था कि यह लोग क्षेत्र की जानकारी एकत्र कर रहे हैं। मकान में दो लड़कियां भी थीं, लेकिन वे बाहर नहीं देखी गईं। दरअसल, हिंडन विहार का काफी बड़ा इलाका प्राधिकरण के सुनियोजित बसावट में नहीं आता है। एक तरह से अवैध रूप से बसा हुआ है। लोगों ने प्लॉट लेकर उसे कई मंजिलों में बदल लिया और फ्लैट बनाकर बेच डाले।
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- फोटो : राज
कुछ गलियां तो इतनी पतली हो गईं कि वहां पर वाहनों का जाना मुश्किल होता है। ऐसे में संदिग्ध नक्सली या आतंकवादियों को छिपने में यह महफूज जगह है, क्योंकि ऐसे स्थानों पर पुलिस का आना भी नहीं रहता है और मकान मालिक पैसे के लालच में किसी को भी किराये पर मकान दे देते हैं। यहां किरायेदारों का सत्यापन भी नहीं कराया जाता।
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- फोटो : राजन राय
पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल इसलिए भी उठ रहा है कि इन दिनों आतंकवादियों को लेकर पूरा देश अलर्ट पर है। जगह-जगह चेकिंग भी होती रहती है, लेकिन स्थानीय खुफिया विभाग को इनकी भनक तक नहीं लगी।
इतना ही नहीं जिस मकान में किराये पर संदिग्ध रह रहे थे, उस मकान मालिक के हावभाव भी ठीक नहीं बताए जा रहे हैं। एटीएस और स्थानीय पुलिस के निशाने पर मकान मालिक भी है। उसने कुछ और प्लॉट खरीदकर फ्लैट बेचे हैं।