दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण का स्तर
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-दिल्ली एक लैंडलॉक्ड शहर है, यानि यह चारों दिशाओं से जमीन से घिरा हुआ है। इसके आसपास बसे शहरों में भी हवा किसी बड़े जलीय स्त्रोत से होकर नहीं गुजरती है। ऐसे में हवा अपने रास्ते में पड़ने वाले सभी प्रदूषकों को लेते हुए यहां तक पहुंचती है।
-लैंडलॉक्ड होने की वजह से चारों दिशाओं से आकर दिल्ली में प्रदूषक फंस जाते हैं।
-एनसीआर में होने वाली औद्योगिकी गतिविधियों का दिल्ली की आबोंहवा पर पड़ता है असर। सालभर वातावरण में मौजूद रहते हैं प्रदूषक।
-तापमान में होने वाले बदलाव की वजह से भी पड़ता है प्रदूषण का प्रभाव। सर्दी में तापमान कम होने के साथ मिक्सिंग हाइट तीन गुना तक कम हो जाती है। इससे प्रदूषकों को ऊपर तक पहुंचने में नहीं मिलती है मदद, जिससे घुटना लगता है दम।
-सिंधु-गंगा के मैदानी क्षेत्र में होने के कारण दिल्ली व इसके आसपास के राज्यों में रेत वाली बलुई मिट्टी मौजूद है। इससे हर समय हवा में अधिक मात्रा में प्रदूषक मौजूद रहते हैं। वहीं, राजस्थान से आने वाली हवा भी दिल्ली-एनसीआर तक धूल के कणों को लेकर पहुंचती है।
-केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के एक सर्वेक्षण के मुताबिक, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई से भी ज्यादा दिल्ली में वाहनों का दबाव है। वहीं, एनसीआर से भी बड़ी संख्या में यहां डीजल और पेट्रोल चालित पुरानी गाड़ियों का सालभर आवागमन होता रहता है। वाहनों से निकलने वाली जहरीली गैस हवा को और प्रदूषित करती है।