चार धाम यात्रा के प्रथम तीर्थ यमुनोत्री मंदिर के कपाट मंगलवार को भैयादूज के पावन पर्व पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। यमुना जी की भोग मूर्ति को डोली यात्रा के साथ तीर्थ पुरोहितों के गांव खरसाली लाया गया। अब शीतकाल में श्रद्धालु यहीं यमुना जी के दर्शन और पूजा-अर्चना का पुण्य लाभ अर्जित कर सकेंगे। मंगलवार सुबह नौ बजे खरसाली से यमुना के भाई समेश्वर देवता (शनि) की डोली यमुनोत्री के लिए रवाना हुई। 12 बजे यमुनोत्री पहुंचने पर यहां विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान एवं यमुना जी का महाभिषेक किया गया। दोपहर सवा एक बजे यमुना जी की भोगमूर्ति को मंदिर से निकालकर डोली में सजाया गया। यमुनोत्री मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए। यमुनोत्री से लौटी डोली यात्रा शाम चार बजे तीर्थ पुरोहितों के गांव खरसाली स्थिति समेश्वर देवता के मंदिर में पहुंची। यहां ग्रामीणों ने मां यमुना का भव्य स्वागत किया। मंदिर समिति के सह सचिव मनमोहन उनियाल ने बताया कि अब सर्दियों में श्रद्धालु खरसाली में ही यमुना जी के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर सकेंगे। इस मौके पर पुरुषोत्तम उनियाल, पूर्व विधायक केदार सिंह रावत, घनानंद नौटियाल, जगवीर भंडारी, लक्ष्मण सिंह, तहसीलदार एसएस चौहान, रणवीर राणा, आशीष उनियाल, प्रदीप उनियाल, पवन उनियाल आदि मौजूद थे।