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विदेश से जुड़े हैं उत्तराखंड में पकड़े किडनी रैकेट के तार, इन खुलासों से सुरक्षा एजेंसियां भी हैरान

Wed, 13 Sep 2017 03:11 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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kidney stolen
उत्तराखंड के पकड़े गए किडनी के रैकेट में पुलिस की जांच से एक के बाद एक ऐसे खुलासे हो रहे हैं जिससे पुलिस हैरान हो गई है। इतना ही नहीं इन खुलासों से सुरक्षा एजेंसियों तक हैरान हैं। पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक जांच में पता चला है कि पिछले कुछ महिनों में यूरोपीय और एशियाई देशों के दो दर्जन से अधिक विदेशी नागरिक यहां किडनी ट्रांसप्लांट कराकर वापस जा चुके हैं। यह सब उत्तराखंड में पर्यटन के बहाने पहुंचे थे। इससे पता चलता है कि किडनी गिरोह के तार विदेशों तक जुड़े हुए हैं। 
 
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पुलिस की गिरफ्त में किडनी रैकेट के सदस्य। - फोटो : ANI
देवभूमि उत्तराखंड में हर साल लाखों की संख्या में विदेशी नागरिक आते हैं। इनमें से अधिकांश का उद्देश्य पर्यटन होता है। इन सभी नागरिकों को देहरादून पुलिस के के विदेशी पंजीकरण अनुभाग में अपना ब्योरा दर्ज कराना होता है, लेकिन यूरोप व एशिया के जिन देशों के लोग यहां किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए उत्तराखंड में आए उन्होंने ऐसा नहीं किया।

 
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kidney stolen
किडनी रैकेटों के इन एजेंटों को सिस्टम के 'खेलना' अच्छी तरह से आता है। जिससे गिरोह पिछले तीन महीनों से मानव अंग तस्करी को अंजाम तक पहुंचाने में कामयाब रहा। सुरक्षा एजेंसियों को अब तक आठ विदेशी नागरिकों को पूरा ब्योरा मिल गया है, जो गंगोत्री चैरिटेबल हॉस्पिटल से किडनी ट्रांसप्लांट कराकर वापस जा चुके हैं। 

 

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kidney racket expose in gangotri charitable hospital
ओमान के जिन चार नागरिकों की तलाश में दिल्ली समेत देश के अन्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर चेकिंग चल रही है, वह देहरादून 28 अगस्त को पहुंचे थे। यह सभी डोईवाला के एक गेस्ट हाउस में ठहरे थे। जहां से स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआइयू) उनका पूरा रिकार्ड जब्त कर लिया है। सूत्रों की मानें तो इस गेस्ट हाउस में कई और विदेशी नागरिकों के ठहरने के प्रमाण मिले हैं, जिनके बारे में जानकारी जुटाने के लिए संबंधित देशों के दूतावास के जरिए जानकारी जुटाई जाएगी। 

 
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Dr.Amit file photo
गुरुग्राम में डॉ. अमित के घर के तहखाने में होता था किडनी ट्रांसप्लांट
24 जनवरी, 2008 को एक व्यक्ति ने मुरादाबाद पुलिस को शिकायत दी थी कि फरीदाबाद के निजी अस्पताल में उसकी एक किडनी निकाल ली गई। वहां की पुलिस ने फरीदाबाद आकर छानबीन की। दोनों राज्यों की पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन में गुरुग्राम के सेक्टर-23 में छापा मारकर इस धंधे का खुलासा किया। मुरादाबाद की तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजुला सैनी ने गुरुग्राम पुलिस को जानकारी दी थी कि पालम विहार क्षेत्र स्थित एक कोठी में किडनी ट्रांसप्लांट का अवैध कारोबार चल रहा है।

 
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amit
इस पर तत्कालीन पुलिस कमिश्नर महेंद्र लाल ने पूरे धंधे का भंडाफोड़ किया था। जांच के दौरान इस काले कारोबार के तार फरीदाबाद के बल्लभगढ़ और गुरुग्राम के सेक्टर-23 सहित कई इलाकों में फैले मिले। इस गिरोह के सरगना डॉ. अमित ने सेक्टर-23 स्थित अपने मकान के तहखाने में अत्याधुनिक नर्सिंग होम बना रखा था। यहां दैनिक मजदूरों को पैसे का लालच देकर उनकी किडनी निकाल ली जाती थी। फिर इसे मोटी रकम लेकर देश-विदेश के लोगों को बेच दिया जाता था। बताते हैं कि इस गिरोह में देश-विदेश के कई डॉक्टर शामिल थे। इस संबंध में पालम विहार थाना पुलिस ने 25 जनवरी 2008 को डॉक्टर अमित और उसके सहयोगियों के खिलाफ ट्रांसप्लांट एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद आरोपी काफी समय तक भूमिगत रहे थे। इस दौरान उनकी साइबर सिटी की सारी संपत्तियां कुर्क कर ली गई थीं। 
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