जितेंद्र सिंह
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रौलाकोट का जितेंद्र परिवार की आजीविका चलाने का एकमात्र सहारा था, जिसे चमोली आपदा ने छीन लिया। पांच बहनों में इकलौते भाई के ऊपर मां ऊषा देवी, पिता मातबर सिंह, पत्नी नीलम व तीन साल का बेटा आरुष और बहन के भरण-पोषण के साथ ही बहन की शादी की जिम्मेदारी थी, लेकिन सात फरवरी को रैणी-तपोवन में मची तबाही ने 200 से अधिक लोगों के साथ ही इस परिवार का सहारा भी छीन लिया।