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चमोली जल प्रलय: अपने ही घरों में जाने से डर रहे ग्रामीण, पांच दिन से जंगलों में ऐसे बिता रहे रात, तस्वीरें...

Thu, 11 Feb 2021 07:47 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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आपदा के बाद जंगल में रात गुजार रहे ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
आपदा के पांच दिन बाद भी ऋषि गंगा का पानी मटमैला है, जिससे नीती घाटी के लोगों में खौफ बना हुआ है। ऋषि गंगा किनारे ग्रामीणों का जलस्रोत भी बह चुका है। रैणी, जुग्जु और जुवा-ग्वाड़ गांव के करीब 120 परिवार अभी भी अपने घरों में रात बिताने से डर रहे हैं। वह छानियों और टेंटों में ही रात बिता रहे हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि ऋषि गंगा फिर कहर बरपा सकती है।
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आपदा के बाद जंगल में रात गुजार रहे ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
ऋषि गंगा अपने उद्गम स्थल के करीब 18000 फीट की ऊंचाई से बहती है। नदी दोनों ओर से पहाड़ियों से घिरी हुई है। सात फरवरी को आई बाढ़ में पहाड़ियों की तलहटी से मिट्टी और बोल्डर नदी में बह गए थे, जिससे यहां भविष्य में भी भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। 
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आपदा के बाद चट्टान के नीचे सोते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीण पुष्कर सिंह का कहना है कि ऋषि गंगा की बाढ़ से तपोवन क्षेत्र को खतरा हो गया है। ऋषि गंगा के किनारे के जंगलों में मवेशियों के लिए हरा चारा लेने जाते थे, अब वहां जाने से भी डर लग रहा है। 

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चमोली आपदा से खौफ में ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
कागा गांव के प्रधान पुष्कर सिंह राणा ने कहा कि नदी का रौद्र रूप बार-बार आंखों के सामने आ रहा है। आपदा से पहले रैणी गांव से नीती घाटी  विहंगम दिखती थी अब वहां का मंजर भी डरा रहा है।
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छानी में रात बिताते लोग - फोटो : अमर उजाला
वहीं, आपदा प्रभावित क्षेत्र में अपनों की तलाश कर रहे परिजनों ने राज्यपाल से भी रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी लाने और उनके परिजनों को सुरक्षित बाहर निकालने की गुहार लगाई। यह बात कहते-कहते कई परिजन रो पड़े। 
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आपदा पीड़ितों से मिलने पहुंचीं राज्यपाल - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि सुरंग में पुरानी मशीनों से मलबा हटाने का काम किया जा रहा है, जिससे काम बेहद धीमी गति से हो रहा है। ऐसे में मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। इस पर राज्यपाल ने उन्हें भारी मशीनों से सुरंग से मलबा हटाने का कार्य करवाने का भरोसा दिलाया।
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