शहीद हुए सिपाही हयात सिंह की पत्नी बच्ची देवी।
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‘मैं कैसे मान लूं कि वह मेरे साथ नहीं’
सियाचिन गई यूनिट में हल्द्वानी के आवास-विकास निवासी नायक दयाकिशन जोशी भी शामिल थे। उनकी पत्नी विमला जोशी ने कहा कि जब तक पार्थिव शरीर नहीं मिल जाता तब तक वह नहीं मान सकती कि वह मेरे साथ नहीं हैं।
विमला के अनुसार वर्ष 1984 में उनके पति छुट्टी पर आने वाले थे। एक दिन टेलीग्राम पहुंचा और उनके जीवन के सबसे बड़े सुख को उनसे छीन लिया। टेलीग्राम में उनके पति नायक दयाकिशन जोशी के शहीद होने की सूचना थी लेकिन पार्थिव शरीर न मिलने की बात कही गई थी। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने रानीखेत से लेकर बरेली तक के सैन्य अधिकारियों के कार्यालय छाने लेकिन कहीं से भी पति के पार्थिव शरीर मिलने की पुष्टि नहीं हुई। उस दौरान उनके दो बेटे थे, बड़ा बेटा संजय जोशी तीन साल का और छोटा भास्कर जोशी एक साल का था।