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बरसे मेघ झूमा पहाड़: रुई के फाहे सी सफेद चादर में ढकी पहाड़ियां..सुकून का अहसास कराएगा इन तस्वीरों का दीदार

Fri, 02 Feb 2024 12:50 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला नेटवर्क, उत्तराखंड
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चमोली में बर्फबारी - फोटो : अमर उजाला

मेघ बरसे और पहाड़ झूम उठा...बर्फ बरसने लगी तो धरती पर सफ़ेद चादर बिछ गई। और इस खूबसूरत नजारे से आज देवभूमि उत्तराखंड जनन्नत सी नजर आ रही है। रुई के फाहे सी सफेद चादर में ढकी पहाड़ियां को देखने के लिए लोग उत्सुक हैं। पर्यटक इस मनोरम दृश्य को देखने के लिए दौड़े चले आ रहे हैं। तो इन खूबसूरत तस्वीरों से आपका दीदार कराने के साथ ही मौसम को लेकर जरूरी अपडेट भी आपकों भी देते हैं....

प्रदेश भर में आज मौसम साफ है, लेकिन ऊंचाई वाले कुछ क्षेत्रों में बर्फबारी हुई है, जिसके चलते मसूरी, उत्तरकाशी सहित कई जिलों में पर्यटक दौड़े चले आए। और यहां बर्फबारी का मजा ले रहे हैं। इसके साथ ही बर्फबारी के कारण राज्य में कई हाईवे और सड़के प्रभावित हैं। पहाड़ों की रानी मसूरी में सीजन का दूसरा हिमपात हुआ। शहर में रात को जमकर बर्फ पड़ी। चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर बिछी है। बर्फबारी के बाद आज सुबह शहर में धूप खिली है।

कल तीन फरवरी की रात मौसम एक बार फिर करवट लेगा और चार-पांच फरवरी को बारिश-बर्फबारी की संभावना है। पांच फरवरी के बाद प्रदेश भर में मौसम शुष्क रहेगा।हालांकि 2800 मीटर से ऊपर वाले क्षेत्र में आज भी बर्फबारी की संभावना है। केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया, फरवरी के पहले सप्ताह में मौसम बदलेगा। इसके बाद दूसरे सप्ताह से मौसम शुष्क रहेगा। इसके साथ ही अधिकतम तापमान में भी एक-दो डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।

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मसूरी में बर्फबारी - फोटो : अमर उजाला

मुख्य अपडेट

  • धनोल्टी में जेसीबी सड़क से बर्फ हटाने में जुटीराड़ी टॉप में यमुनोत्री हाईवे को मशीनरी खोलने में ळगी
  • चमोली जनपद में बारिश और बर्फबारी थमीं, धूप खिली। निचली चोटियों तक बर्फ जमीं।
  • लोगों को ठंड से मिली राहत।
  • गोपेश्वर-चोपता-ऊखीमठ हाईवे पर कांचुलाखर्क से आगे और बदरीनाथ हाईवे पर हनुमान चट्टी से आगे वाहनों की आवाजाही रुकी।
  • हाईवे पर कई फीट तक बर्फ जमीं, ऊंचाई वाले क्षेत्रों के गांवों में स्कूलों में भी बर्फ जमीं।
  •  जोशीमठ औली मोटर मार्ग पर सुनील से औली तक सड़क में पाला जमा।
  • बीआरओ के द्वारा सड़क से पाला हटाने का कार्य जारी, औली तक पहुंच रहे वाहन।
     
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उत्तरकाशी के मोरी का खूबसूरत नजारा - फोटो : अमर उजाला
सर्दियों की बर्फबारी को हिमालय के ग्लेशियरों के लिए खुराक माना जाता है। लेकिन, इस बार हालात काफी नासाज नजर आए। बीते पांच महीनों से हिमालय क्षेत्र में बर्फ का अकाल पड़ा रहा। ग्लेशियरों पर नई बर्फ नहीं जमीं। हर साल जो पहाड़ियां बर्फ की मोटी परत से सजी रहती थीं वहां भी सूखा नजर आया। विशेषज्ञों ने कहा कि मौसम में हो रहा बदलाव, प्रकृति और पर्यावरण के लिए शुभ नहीं है। जल्द बारिश व बर्फबारी नहीं हुई तो फरवरी पहले सप्ताह से ही हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघलने लग जाएंगे, इससे आने वाले समय में भारी जल संकट पैदा हो सकता है, लेकिन इन दिनों हुई बर्फबारी ने राहत दी।

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उत्तरकाशी - फोटो : अमर उजाला
पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी न होने से पर्यटकों को मायूसी हाथ लग रही थी। मौसम वैज्ञानिकों का कहना था कि तो उत्तराखंड के मौसम में ऐसा बदलाव करीब 16 साल बाद दिखा। जब सर्दियों में बर्फबारी के साथ प्री और पोस्ट मानसून की बारिश के आंकड़ों में भी कमी आई है। सभी बारिश और बर्फबारी की बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
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मसूरी - फोटो : अमर उजाला
बर्फबारी न होने से ग्लेशियर रिचार्ज नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों को चिंता सता रही है कि ग्लेशियर रिचार्ज न होने से गर्मी में वह तेजी से पिघलेंगे और नदियों का जलस्तर बढ़ेगा।
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चमोली जोशीमठ - फोटो : amar ujala
प्रदेश के 23 वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो 2006 में सबसे कम 0.5 इंच बर्फबारी हुई थी।
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जोशीमठ - फोटो : amar ujala
उसके बाद 2010 में भी इतनी ही बर्फबारी हुई थी। सन् 2000 में सबसे अधिक बर्फबारी हुई थी।

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उत्तराखंड में बर्फबारी - फोटो : amar ujala
इस साल 43 इंच बर्फबारी हुई है, जो कि अभी तक का रिकॉर्ड है।

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मसूरी में बर्फबारी का मजा लेते पर्यटक - फोटो : amar ujala
साल 2022 में 17 इंच बर्फबारी दर्ज की गई थी।
 

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चमोली - फोटो : amar ujala
केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया, फरवरी के पहले सप्ताह में मौसम बदलेगा। इसके बाद दूसरे सप्ताह से मौसम शुष्क रहेगा। इसके साथ ही अधिकतम तापमान में भी एक-दो डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। 
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