अमर उजाला से बातचीत करते हुए डॉ. कंडवाल बेहद ही भावुक होकर कहते हैं कि पूरी सर्जिकल, इमरजेंसी और आईसीयू की टीम उसे बचाने की कोशिश में लगी थी। तीन चार बार उसकी सर्जरी भी की गई, लेकिन आंतें अत्यधिक डैमेज हो जाने से उसे बचाना बहुत मुश्किल हो रहा था। ऐसी कोई टेक्नालॉजी नहीं थी कि उसे बचाया जा सकता। उसे एक हफ्ते के बाद बेटर इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से सिंगापुर भेजा गया।