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चीन सीमा से लगी नीति घाटी के शिवालय में दिखने लगे 'बाबा बर्फानी', सामने आई पहली तस्वीर

Fri, 01 Jan 2021 09:09 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चमोली
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बाबा बर्फानी - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत-तिब्बत(चीन) सीमा पर स्थित नीती घाटी के अंतिम शिवालय में बाबा बर्फानी दिखने लगे हैं। जिले के स्थानीय युवकों का दल नए साल के मौके पर टिम्मरसैंण महादेव (बर्फानी बाबा) के मंदिर गया था। उन्होंने बाबा बर्फानी की पहली तस्वीर ली। 
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बाबा बर्फानी के मंदिर में युवक - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि उत्तराखंड में जोशीमठ-नीती हाईवे पर नीती गांव से करीब एक किलोमीटर दूर टिम्मरसैंण में पहाड़ी पर एक गुफा स्थित है। यहां टिम्मरसैंण महादेव का शिवालय है। जिसे लोग बाबा बर्फानी का मंदिर भी कहते हैं। यह कुदरत का करिश्मा ही है कि सर्दियों में भारी बर्फबरी के बाद यहां पहाड़ी से टपकने वाला पानी बर्फ बनकर शिवलिंग का आकार ले लेता है। 
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बाबा बर्फानी के दर्शन करने गए युवक - फोटो : अमर उजाला
कहा जाता है कि बर्फबारी ठीक हो तो शिवलिंग की ऊंचाई तकरीबन पांच फुट तक पहुंच जाती है। बर्फ का शिवलिंग अप्रैल तक रहता है। बर्फ के इस शिवलिंग को लोग बाबा बर्फानी के नाम से पूजते हैं। सरकार ने 2018 में भी यात्रा शुरू करने की तैयारी कर ली थी, लेकिन भारी बर्फबारी के कारण रोक दी गई थी। 

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नीति घाटी में बाबा बर्फानी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
वहीं, इस समय नीति घाटी में तामपान माइनस में है। भारी बर्फ पड़ने से कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। झरने और नदियां तक जम गई हैं। जानकारी के अनुसार, प्रशासन इस साल फरवरी में टिम्मरसैंण महादेव की यात्रा शुरू कराने पर विचार कर रहा है। खुद पर्यटन मंत्री तक कर चुके हैं कि टिम्मरसैंण महादेव को पर्यटन विभाग के सहयोग से यात्रा से जोड़ने के लिए जल्द ही कदम उठाया जाएगा। 
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नीति घाटी में बाबा बर्फानी का शिवलिंग - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
वहीं, सरकार की योजना है कि माणा गांव में तीर्थाटन को बढ़ावा देने और यात्रा में शामिल होने वाले यात्रियों के रात्रि प्रवास की व्यवस्था के लिए होम स्टे योजना शुरू की जाएगी। इससे ग्रामीणों को रोजगार भी मिल सकेगा। यात्रा के आयोजन का मुख्य उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही नीती घाटी में सिंचाई नहर के बजाय पाइप लाइन सिंचाई योजना का निर्माण करने और बीएडीपी (बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्लान) के तहत स्थानीय लोगों को ही रोजगार देने को लेकर प्रयास किए जाएंगे।
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