चौदह वर्षीया किशोरी के शरीर का ऐसा कोई अंग नहीं है, जहां चोट के निशान न हो।
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एक, दो नहीं बल्कि चोट के पूरे 20 निशान है। कुछ चोट ताजी हैं तो कुछ निशान पुराने हैं। ये निशान दरिंदगी की दास्तां बयां कर रहे है। मासूम-सी दिखने वाली किशोरी के शरीर पर इतने निशान देखकर एक बारगी न्यायिक और पुलिस अफसर भी सन्न रह गए।
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में जब किशोरी का मेडिकल हुआ, तो डाक्टर भी उसकी हालत देखकर सन्न रह गए। सिर से लेकर पैर तक निशान ही निशान थे। हाथ में चोट के निशान ताजे ही थे।
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सिर में भी कई चोटें थीं। पिछले तीन से चार बरस से किशोरी महिला जज के घर पर ही रह रही थी, लेकिन उसे कौन और क्यों पीटता था? इस पर किशोरी के बयान देने पर ही तस्वीर साफ हो पाएगी।
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महिला जज दीपाली शर्मा के पिता भी न्यायिक सेवा में रहे है। उनके भाई सिविल जज हैं। पति भारतीय सेना में अधिकारी हैं। दीपाली शर्मा लक्सर में भी तैनात रह चुकी हैं और करीब एक वर्ष पहले प्रमोशन के बाद हल्द्वानी से ही ट्रांसफर होकर आई थी।
किशोरी कैसे महिला जज के घर पहुंची? उसके माता-पिता कहां है? और वे क्यों चुप थे। ऐसे कई सवाल है जिनका जवाब मिलना अभी बाकी है। जिला जज और एसएसपी ने हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की है, पर हाईकोर्ट का दरवाजा किसने खटखटाया? इसका खुलासा नहीं हुआ है।