आपने दुनियाभर में ऐसी जगहों के बारे में पढ़ा होगा जहां जाने से मनचाहा प्यार मिल जाता है। अपने देश में भी ऐसी ही एक जगह है, जो प्यार करने वालों को मिलाती है।
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अगर आपका परिवार आपके प्यार के खिलाफ है तो आप उत्तराखंड के इस मंदिर में आकर प्यार हो हासिल कर सकते हैं।
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golu devta
अल्मोड़ा के चितई मंदिर में हर साल करीब 400 शादियां होती हैं, यानी शादियों के सीजन में रोजाना करीब 6 शादियां यहां होती हैं।
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मंदिर में टंगी चि़ट्ठियां इस बात का सबूत हैं। मान्यता है कि चाहे कितनी की कठिन परिस्थितियां हों यहां अपने प्यार के लिए मन्नत मांगने पर प्यार मिल जाता है।
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गोलू देवता या भगवान ग्वेल ज्यू को यूं तो समूचे उत्तराखंड में पूजा जाता है, लेकिन वह कुमाऊं के लोक देवता हैं। चंपावत और घोड़ाखाल, नैनीताल में भी गोलू देवता के मंदिर हैं, मगर सबसे ज्यादा मान्यता अल्मोड़ा से करीब आठ किलोमीटर दूर चित्तई स्थित गोलू जी महाराज के मंदिर की है।
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- फोटो : file photo
गोलू जी को न्याय का देवता माना जाता है। जब वह यहां के राजा थे तो जगह-जगह घूम-घूम कर जन-अदालतें लगा कर त्वरित न्याय करते थे। उन्हें कृष्णावतारी, दूधाधारी और न्यायकारी देवता भी कहा जाता है।
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मान्यता है कि वह अपने भक्तों द्वारा सच्चे मन से की गई हर पुकार को सुनते हैं। यही वजह है कि इस मंदिर में हर रोज बड़ी संख्या में भक्तजन मन्नतें मांगने और उन मन्नतों के पूरा होने पर घंटियां बांधने आते हैं।
क्या आधार कार्ड आपकी नागरिकता का प्रमाण पत्र है?
- फोटो : PTI
उत्तराखंड के अल्मोड़ा में स्थित प्रसिद्ध गोलू देवता मंदिर में शादी करने लिए आधार कार्ड जरूरी होगा। मंदिर के पुजारियों ने नाबालिग शादियों को रोकने के मकसद से यह कदम उठाया है। मंदिर प्रशासन के मुताबिक, अब मंदिर प्रशासन यहां होने वाली शादियों से पहले व्यक्ति की पहचान के लिए आधार कार्ड की मांग करेगा। आधार कार्ड के अलावा पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेजों को पर्याप्त नहीं माना जाएगा।