मनमोहक वादियों, सुंदर पहाड़, बुग्याल, झरने या कोई भी खूबसूरत स्पॉट लोग फोटो खिंचाने के लिए तलाश करते हैं। हर किसी में खूबसूरत जगहों या यूनिक चीजों के सामने फोटो खिचाने का क्रेज रहता है। लेकिन इस चाय की दुकान में ऐसा क्या है जो यहां लोग फोटो खिंचाए बिना नहीं रह पाते।
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चलिए हम आपको बताते हैं इस चाय की दुकान की खासियत। दरअसल यह चाय की दुकान भी आम चाय की दुकान की तरह ही है। लेकिन जिस जगह पर ये है वो जगह इसे फेमस बनाती है।
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यह दुकान भारत की आखरी चाय की दुकान के नाम से फेमस है। उत्तराखंड के चमोली जिले में चीन की सीमा से लगे देश के अंतिम गाँव माना में चाय की एक छोटी-सी दुकान बद्रीनाथ की यात्रा पर जाने वाले हर सैलानी और श्रद्धालु को बरबस अपनी ओर खींच लेती है।
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बदरीनाथ जाने वाले पर्यटक इस दुकान पर चाय की चुस्कियों का लुत्फ उठाने और फोटो खिंचवाने के लिए दूर दूर से आते हैं। शायद ही कोई ऐसा पर्यटक होगा जो इस चाय की दुकान तक न गया हो। इतना ही नहीं बदरीनाथ धाम में होने वाली स्पेशल तुलसी की चाय भी पीते हैं।
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मई से अक्टूबर महीने के बीच यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। यह समय माणा गांव आने का सबसे बेहतर समय माना जाता है। छह माह तक इस गांव में खासी चहल-पहल रहती है। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद हो जाने पर यहां पर आवाजाही बंद हो जाती है।
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एक अनुमान के अनुसार इस दुकान पर प्रतिदिन लगभग चार हजार पर्यटकों के कदम ठिठकते हैं और सैलानी इस बोर्ड के साथ फोटो खिंचवाए बिना नहीं रहते। यही वजह है कि दुकान पर कुछ फोटोग्राफर भी मौजूद रहते हैं जो सैलानियों के यादगार क्षणों को कैमरे में कैद करके अपनी रोजी-रोटी की जुगाड़ कर लेते हैं।
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सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र चाय की यह दुकान है चंद्रसिंह बड़वाल की जो लगभग पच्चीस साल से कड़ाके की ठंड में सैलानियों को गर्मागर्म चाय पिला रहे हैं। वे बताते हैं कि जब वे दस साल के थे तब उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए धनार्जन के वास्ते यह दुकान खोली थी और वे स्कूल में पढ़ने के लिए जाने से पहले और वहाँ से लौटने के बाद दुकान चलाया करते थे।
उन्होंने बताया कि हर साल उनकी चाय की दुकान बद्रीनाथ के कपाट खुलने के समय खुलती है। अक्टूबर माह के अंत में सर्दियों में वे मवेशियों के साथ गोपेश्वर के निचले इलाकों में चले जाते हैं। समुद्र तल से 11 हजार फुट की ऊँचाई पर स्थित माना छह माह तक बर्फ के आगोश में रहता है।