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International Tiger Day: कुनबा बढ़ने के साथ बदल रहा वनराज का व्यवहार, ढूंढ रहे आसान शिकार, चौंका रही ये नई बात

Fri, 29 Jul 2022 01:37 PM IST
अलका त्यागी जीवन कुमार, अमर उजाला, रामनगर (नैनीताल)
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बाघ - फोटो : मुकेश यादव, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर
बाघों के चलते कॉर्बेट नेशनल पार्क की अपनी अलग पहचान है। बाघों के बेहतर संरक्षण का ही नतीजा है कि यहां बाघों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 2018 में गणना के अनुसार, उत्तराखंड में 442 बाघ रिकॉर्ड किए गए थे जिनमें 325 बाघ कॉर्बेट लैंडस्केप में थे।

चार साल बाद फिर एनटीसीए की गणना हुई है जिसकी रिपोर्ट बाघ दिवस पर शुक्रवार को साझा की जाएगी। उम्मीद है कि इसमें भी बाघों की संख्या में वृद्धि होगी। हालांकि बाघों की संख्या में वृद्धि होने के साथ वन विभाग की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं और मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं।

अमूमन बाघ इलाका बांटकर रहते हैं। कुछ सालों से प्रदेश में बाघों के व्यवहार में बदलाव नजर आ रहा है। कॉर्बेट के सर्पदुली, रामनगर वन प्रभाग के कोसी रेंज और अल्मोड़ा वन प्रभाग के मोहान रेंज के बफर जोन में एक बाघिन और तीन बाघ देखे जा रहे हैं जो एक साथ शिकार करते हैं जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक दो साल की उम्र से बाघ अलग हो जाते हैं।

बाघों के बदले व्यवहार ने विशेषज्ञों को चिंतन में डाल दिया है। अध्ययन बताते हैं कि एक बाघ का इलाका कम से कम 20 किलोमीटर तक होता है लेकिन रामनगर वन प्रभाग के फतेहपुर रेंज और कॉर्बेट में बाघों के आसपास रहने के मामले चौंकाते हैं इससे खतरा भी बढ़ रहा है।
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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बाघ - फोटो : फाइल फोटो
कॉर्बेट के वरिष्ठ वन्यजीव वैज्ञानिक शाह बिलाल ने बताया कि बफर जोन के कुछ क्षेत्रों में देखा जा रहा है कि बाघ आसान शिकार ढूंढ रहे हैं। बफर जोन में बाघ आसानी से गाय, भैंस का शिकार कर रहे हैं। ऐसे में एक साथ चार बाघों की मौजूदगी चौंकाने वाली है। किसी भी क्षेत्र में बाघों का बढ़ना एक अच्छा संकेत है लेकिन यह चिंता का विषय भी बनता है, क्योंकि नर बाघों का वन क्षेत्र सीमित होता है।
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कैमरे में कैद हुआ बाघ - फोटो : अमर उजाला
वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने बताया कि बाघों का मूवमेंट कॉर्बेट पार्क और उससे लगे जंगलों में लगातार होता है जो बाघों का नेचुरल फिनोमिना है। कॉर्बेट में फेस फॉर की गणना के मुताबिक 252 और कॉर्बेट लैंडस्केप में 325 बाघ रिकॉर्ड हुए थे।

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बाघ (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
बाघों की संख्या के मामले में उत्तराखंड तीसरे स्थान पर 
मध्य प्रदेश - 526
कर्नाटक - 524
उत्तराखंड - 442
महाराष्ट्र - 312
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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बाघ - फोटो : फाइल फोटो
कॉर्बेट पार्क में बेहतर संरक्षण के चलते बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही उनके व्यवहार में बदलाव दिख रहा है। बाघों को बफर जाने में आसान शिकार जैसे लावारिस गाय, बैल आदि मिल रहे हैं। बाघों के इस व्यवहार पर शोध की जरूरत है।
- धीरज पांडे, निदेशक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व
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