भ्रष्टाचार के आरोप में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा के इस्तीफे के बाद सुर्खियों में आए सहारनपुर के गुप्ता बंधुओं की यह कहानी उनके आम आदमी से अखबार की सुर्खियों में आने के सफर की है।
1990 में भारत से गुप्ता बंधु दक्षिण अफ्रीका पहुंचे। अतुल, राजेश और अजय गुप्ता तीन भाई हैं। यहां कम्प्यूटर व्यापार से इन्होंने शुरुआत की।
बाद में खनन और इंजीनियरिंग कंपनियों, एक लक्ज़री गेम लाउंज, एक समाचार पत्र और 24 घंटे के समाचार टीवी स्टेशन में हिस्सेदारी खरीदी। आरोप हैं कि भ्रष्ट सौदों के माध्यम से अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर लाखों डॉलर के सरकारी ठेके लिए।
साल 2016 में दक्षिण अफ्रीका के पूर्व उप वित्त मंत्री जोनास मेबिसी ने आरोप लगाया कि गुप्ता परिवार ने अपनी बात मानने पर उन्हें अगला वित्त मंत्री बनाने के लिए 60 करोड़ रैंड (5 करोड़ डॉलर) की पेशकश की थी।
इसके बाद दक्षिण अफ्रीकी सरकार के लोकपाल ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें आरोप लगाया गया था कि गुप्ता परिवार और राष्ट्रपति ज़ुमा ने सरकारी अनुबंधों को पाने के लिए एक-दूसरे की मदद की थी।
इसके बाद जब 2017 में एक लाख से अधिक ईमेल लीक हुए तो जुमा और गुप्ता बंधुओं का सच सामने आ गया। इसके बाद गुप्ता परिवार और राष्ट्रपति जैकब ज़ुमा के ख़िलाफ़ द. अफ्रीका में लोगों ने प्रदर्शन किए और दोनों का नाम 'ज़ुप्ता' दिया।