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कर्ज की रकम से करता था मौज-मस्ती, एक दिन भूखे बच्चों के मुंह में ठूंस दी सल्फास की गोलियां और फिर...

Mon, 04 Jun 2018 05:41 PM IST
आरडी खान/अमर उजाला, काशीपुर
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anshuman
घर में बच्चे भूख से बिलख रहे थे और बाप पत्नी के इलाज के नाम पर कर्ज की रकम लेकर मौज कर रहा था। एक दिन उसने अपने परिवार के साथ जो किया सुनकर रूह कांप जाए।
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anshuman file photo
आमदनी का कोई नियमित जरिया न होने के बावजूद अंशुमान अपने ऊपर धड़ल्ले से खर्च करता था। यह जानते हुए भी उसके बच्चे और बीवी घर पर फाकाकशी से जूझ रहे हैं, इसके बावजूद उधार लेकर उसकी शाहखर्ची जारी थी। बच्चों और पत्नी का क्या दोष, जिसे जहर भी भूखे पेट गटकने को विवश होना पड़ा। 
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himanshi
अंशुमान ने तो पूरे परिवार का कत्ल करने की ठानी थी। लेकिन दो मासूम बच्चे उसकी जघन्य साजिश का शिकार होने से बच गए। वारदात को अंजाम देने से पहले अंशुमान ने अपने व पत्नी के मोबाइलों के सिम तोड़कर फेंक दिए, ताकि कोई किसी से मदद की गुहार न लगा सके। उसने पत्नी सरिता के बाद बेटियों के मुंह में एक-एक कर सल्फास की गोलियां ठूंस दी और गोलियां निगलने तक उनके मुंह बंद रखे। गोली कड़वी लगने पर छोटी बेटी आर्या ने सल्फास थूक दी। जिससे उस पर दवा का असर कम रहा और उसने अपने इकलौते बेटे को जबरन सल्फास खिलाने का प्रयास किया। विरोध करने पर उसे पीटा भी, लेकिन उसका बेटा पिता से हाथ छुड़ाकर भाग निकला। उसने गृहस्वामी को घटना के बारे में जानकारी देते हुए उन्हें सल्फास की गोली भी दिखाई। तब कहीं जाकर उन्हें विश्वास हुआ। 

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Arya
ग्राम हरियावाला निवासी अतुल यादव के मकान के जिस कमरे में अंशुमान व उसकी पत्नी ने दम तोड़ा, उस कमरे की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। घरेलू सामान के नाम पर करीब दो दर्जन छोटे-बड़े बर्तन, एक छोटा और एक बड़ा पुराना तख्त, चंद पुराने कपड़ों के अलावा घरेलू सामान के कुछ थेले कमरे की कानस पर रखे थे। सारा सामान एक गठरी में आसानी से बांधा जा सकता है। एक ही कमरे में रसोई और वहीं रहना सहना। कमरे का किराया 1300 रुपये माहवार था, जो उसने पिछले दो माह से अदा नहीं किया है।
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rudrapratap
मकान मालकिन सुमन बताती है कि किराए के लिए सख्ती करने पर बेटियां गिड़गिडाने लगती थीं। ऐसे में उन पर तरस आ जाता था। अंशुमान की पत्नी पहले पास की एक फैक्ट्री में काम करती थी। कहीं से कुछ रुपयों का जुगाड़ हुआ तो उसने पत्नी की नौकरी भी छुड़वा दी। पत्नी बीमार रहने लगी, लेकिन उसने पत्नी को अस्पताल में दिखाने के बजाय कर्ज की रकम से अपनी मौज मस्ती जारी रखी। पड़ोसी बताते हैं कि अंशुमान यहां अभिषेक के नाम से जाना पहचाना जाता था।
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sarita admitted in hospital - फोटो : amar ujala
वह बेहद खर्चीले स्वभाव का था। उसने कल के बारे में कभी नहीं सोचा और न ही कभी इस बात की परवाह की, कि उसके बच्चे किस हाल में है। किराना की दुकान करने वाले राजेश ने बताया कि अपने खाने पीने पर वह खुले हाथ से खर्च करता था। तीन दिन पहले ही उसने उससे 53 रुपये की कोल्डड्रिंक व आइसक्रीम उधार ली थी। फैक्ट्रियों में लेबर सप्लाई करने की एवज में उसने कुछ ठेकेदारों से भी एडवांस ले रखा था। शनिवार को इस दुस्साहसी वारदात को अंजाम देने से पहले उसकी जेब खाली थी। गैस खत्म होने पर सुबह घर में चाय भी नही बन सकी। बच्चों ने नाश्ता तक नहीं किया था। उन्हें सल्फास भी भूखें पेट खाना पड़ा। 
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