छह माह मनुष्य और छह माह देवता करते हैं पूजा
बदरीनाथ के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल का कहना है कि शास्त्रों के अनुसार पौराणिक काल से चली आ रही परंपराओं के अनुसार बदरीनाथ में छह माह मनुष्य की ओर से और छह माह देवताओं की ओर से भगवान बदरीनाथ की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जैसे ही पंच पूजाएं शुरू होती हैं धाम में देवताओं का आगमन शुरू हो जाता है। शीतकाल में कपाट बंद होने के बाद पूजाओं का दायित्व देवताओं को दिया जाता है। फिर अगले साल वैशाख माह शुरू होने पर पूजा का अधिकार मनुष्यों के पास वापस आ जाता है।
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आज से शुरू हुई मंदिर के कपाट बंद होने की प्रक्रिया
बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने की प्रक्रिया आज 21 नवंबर से शुरू हो गई है। सुबह बदरीनाथ भगवान के अभिषेक के साथ गणेश मंदिर में भी विशेष पूजाएं शुरू हुई। इसके बाद विधि-विधान से मंदिर के कपाट बंद कर लिए जाएंगे। 22 को आदिकेदारेश्वर मंदिर के कपाट बंद होंगे। 23 को बदरीनाथ मंदिर के सभा मंडप में धार्मिक पुस्तक पूजन व वेद ऋचाओं का वाचन बंद हो जाएगा। 24 को धाम परिसर में माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग अर्पित किया जाएगा। लक्ष्मी मंदिर में विशेष पूजाएं भी होंगी। 25 नवंबर को दोपहर दो बजकर 56 मिनट पर विधि-विधान के साथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।