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Vaibhav Sooryavanshi: वैभव सूर्यवंशी के गुस्से पर सवाल क्यों? खेल जगत के दिग्गज भी जवानी में खो चुके हैं आपा

Tue, 16 Jun 2026 12:29 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दांबुला

सार

भारत ए और श्रीलंका ए मैच के बाद वैभव सूर्यवंशी की प्रतिक्रिया को लेकर बहस छिड़ी हुई है। हालांकि, खेल इतिहास बताता है कि जवानी में आक्रामकता और भावनाओं पर नियंत्रण खोना असामान्य नहीं है। वैभव तो फिर भी अभी बच्चे हैं। विराट कोहली, सौरव गांगुली, गौतम गंभीर, क्रिस्टियानो रोनाल्डो, लियोनल मेसी, नेमार, रोजर फेडरर, राफेल नडाल और नोवाक जोकोविच जैसे दिग्गज भी अपने करियर में कई बार मैदान पर गुस्सा दिखा चुके हैं। सवाल यह नहीं कि खिलाड़ी नाराज हुआ, बल्कि यह है कि वह उससे क्या सीखता है।
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वैभव सूर्यवंशी - फोटो : अमर उजाला
भारत ए और श्रीलंका ए के मैच के बाद 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी चर्चा के केंद्र में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रीलंकाई खिलाड़ी की टिप्पणी के बाद वैभव नाराज हो गए और मैदान पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके व्यवहार को लेकर बहस शुरू हो गई, लेकिन क्या खेल इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है? शायद नहीं। दुनिया के कई महान खिलाड़ी अपने शुरुआती दिनों में भावनाओं पर नियंत्रण खो चुके हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि बाद में उन्होंने उसी जुनून को अपनी ताकत बना लिया। वैभव तो फिर भी अभी बच्चे हैं।
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वैभव सूर्यवंशी - फोटो : BCCI/IPL
पूरा मामला क्या है?
 
  • भारत ए और श्रीलंका ए के बीच मुकाबला 265-265 की बराबरी पर समाप्त हुआ था। इसके बाद खराब रोशनी के बावजूद सुपर ओवर खेला गया, जिसे लेकर पहले से ही विवाद था। सुपर ओवर में श्रीलंका ए ने जीत दर्ज की।
  • मैच खत्म होने के बाद कथित तौर पर श्रीलंकाई खिलाड़ी विशेन हलाम्बागे ने वैभव सूर्यवंशी से कहा, 'मैच खत्म हो गया, अब घर जाओ।' बताया जाता है कि इसी टिप्पणी के बाद वैभव नाराज हो गए और दोनों खिलाड़ियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
  • वायरल वीडियो में दोनों खिलाड़ियों को एक-दूसरे के करीब आकर बहस करते देखा गया, जिसके बाद साथी खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ ने बीच-बचाव किया। विवाद को और बढ़ाने वाली बात यह रही कि मैच में भारत ए पर पहले ही 10 पेनल्टी रन लगाए गए थे और खराब रोशनी में सुपर ओवर कराने के फैसले पर भी सवाल उठे। ऐसे में मुकाबले के बाद मैदान का माहौल पहले से ही काफी गर्म था, जिसने इस विवाद को और तूल दे दिया।
 
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गंभीर और कोहली की लड़ाई - फोटो : IPL/BCCI
विराट, गांगुली और गंभीर भी रहे हैं आक्रामक
 
  • भारतीय क्रिकेट की बात करें तो विराट कोहली का नाम सबसे पहले आता है। करियर के शुरुआती वर्षों में कोहली कई बार विरोधी खिलाड़ियों और दर्शकों से उलझते दिखे। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर दर्शकों को अंगुली दिखाने वाला उनका विवाद काफी चर्चित रहा था।
  • बाद में यही आक्रामकता उनकी पहचान बनी और उन्होंने इसे प्रदर्शन में बदल दिया। अब यह कहा जाता है कि जब उन्हें कोई स्लेज करता है या विपक्षी टीम उनसे बहस करती है तो यह उनकी ताकत बन जाती है और फिर वह और एकाग्रता के साथ बल्लेबाजी करते हैं।
  • सौरव गांगुली का 2002 नेटवेस्ट ट्रॉफी फाइनल के बाद लॉर्ड्स की बालकनी में टी-शर्ट लहराना भारतीय क्रिकेट की सबसे चर्चित तस्वीरों में शामिल है। उस समय इसे भी कई लोगों ने आक्रामक प्रतिक्रिया माना था।
  • मौजूदा भारतीय कोच गौतम गंभीर भी मैदान पर अपने गुस्से के लिए जाने जाते रहे हैं। आईपीएल से लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक उनकी कई तीखी बहसें सुर्खियां बन चुकी हैं। ऑस्ट्रेलिया ने तो इसी स्लेज के दम पर कई वर्षों तक क्रिकेट पर राज किया था।
  • नवजोत सिंह सिद्धू को कौन भूल सकता है। 1996 के शारजाह में भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान उनकी एक अंपायर के साथ हुई बहस और मैदान छोड़ने की घटना आज भी याद की जाती है।
  • यहां तक कि कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी भी मैदान पर कई बार आपा खो चुके हैं। साल 2018 में दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर सेंचुरियन में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में धोनी ने नॉन स्ट्राइकर एंड पर खड़े मनीष पांडेय को जमकर लताड़ा था। आईपीएल में तो एक बार वह किसी फैसले से असंतुष्ट होकर बीच मैच में मैदान पर आपत्ति जताने पहुंच गए थे।
  • 1997 में टोरंटो में एक मैच के दौरान मैदान पर तनाव तब बढ़ गया जब एक फैन ने इंजमाम को लगातार 'आलू' कहकर चिढ़ाना शुरू कर दिया। इससे गुस्साए इंजमाम ने 12वें खिलाड़ी से बल्ला लिया और सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे स्टैंड्स में उस फैन को पीटने के लिए घुस गए। बाद में इस घटना के लिए उन पर दो मैचों का बैन भी लगाया गया था।
  • शोएब अख्तर और हरभजन सिंह के लड़ाई भी चर्चा में रही है। 2010 के एशिया कप के दौरान भारत-पाकिस्तान मैच के आखिरी पलों में दोनों के बीच मैदान पर तीखी बहस हुई थी, जिसके बाद शोएब अख्तर गुस्से में हरभजन के होटल के कमरे तक पहुंच गए थे।

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मेसी और रोनाल्डो भिड़ते हुए - फोटो : Twitter
फुटबॉल के सुपरस्टार भी नहीं रहे अछूते
 
  • क्रिस्टियानो रोनाल्डो को कई बार मैदान पर गुस्सा करते देखा गया है। हार के बाद उनकी निराशा और विरोधी खिलाड़ियों से बहस की घटनाएं नई नहीं हैं।
  • लियोनल मेसी को आमतौर पर शांत खिलाड़ी माना जाता है, लेकिन जवानी के दिनों में मैदान पर कई बार उन्हें विपक्षी खिलाड़ियों से उलझते देखा गया था। पेपे और रामोस से उनकी प्रतिद्वंद्विता किसी से छिपी नहीं है।
  • नेमार का करियर भी कई भावनात्मक प्रतिक्रियाओं और मैदान पर झड़पों से भरा रहा है। कई बार उन्हें विरोधी खिलाड़ियों से उलझते और रेफरी के फैसलों पर नाराजगी जताते देखा गया।
  • ऐसे कई उदाहरण हैं फुटबॉल में जहां महान खिलाड़ियों ने अपनी जवानी में आपा खो दिया। महान डिएगो माराडोना (बार्सिलोना टीम में थे, तब 23 साल के थे) 1984 में जब एथलेटिक बिलबाओ से मैच खेल रहे थे, तब विरोधी खिलाड़ियों ने माराडोना पर लगातार खतरनाक टैकल किए और नस्लीय टिप्पणियां कीं। मैच खत्म होते ही माराडोना ने बिलबाओ के खिलाड़ी को लात मार दी, जिससे मैदान पर सामूहिक लड़ाई शुरू हो गई।
  • ब्राजील के पूर्व खिलाड़ी रोमारिया भी महान फुटबॉलर्स में शुमार हैं। 1994 में बार्सिलोना बनाम सेविला मैच में सेविला के डिफेंडर डिएगो सिमीओने ने रोमारियो को उकसाया तो रोमारियो ने आपा खो दिया और सिमीओने के चेहरे पर सीधा मुक्का जड़ दिया। इसके बाद उन्हें रेड कार्ड मिला और पांच मैचों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। सुआरेज और उनके कान काटने की घटना भी चर्चा में रही है।
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फेडरर और जोकोविच रैकेट तोड़ते हुए - फोटो : Twitter
टेनिस के दिग्गज भी तोड़ चुके हैं रैकेट
 
  • टेनिस में रोजर फेडरर को आज शालीनता की मिसाल माना जाता है, लेकिन करियर के शुरुआती दौर में वह कई बार रैकेट तोड़ चुके हैं। खुद फेडरर स्वीकार कर चुके हैं कि युवा उम्र में उन्हें गुस्से पर काबू पाने में समय लगा।
  • नोवाक जोकोविच कई मौकों पर रैकेट पटक चुके हैं, जबकि राफेल नडाल भी कुछ मैचों में अपनी निराशा खुलकर दिखा चुके हैं। हालांकि बाद में इन खिलाड़ियों ने मानसिक मजबूती को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।
  • आज जब ज्वेरेव, अल्कारेज की बात होती है, तो ये खिलाड़ी कई बार टेनिस कोर्ट में अपना रैकेट तोड़ चुके हैं। यहां तक कि टेनिस के सबसे शांत खिलाड़ियों में शुमार यानिक सिनर भी अंडर-18 में दो बार रैकेट तोड़ चुके हैं।
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मेसी और रोनाल्डो लड़ते हुए - फोटो : Twitter
क्या वैभव सूर्यवंशी पर बैन लग सकता है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक वैभव सूर्यवंशी और श्रीलंका ए के खिलाड़ी विशेन हलाम्बागे के बीच मैच के बाद धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई थी। अगर ऐसा किसी आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय वनडे या आईसीसी टूर्नामेंट में हुआ होता तो खिलाड़ियों पर मैच फीस का जुर्माना, डिमेरिट अंक या निलंबन जैसी कार्रवाई संभव थी। हालांकि यह मुकाबला 'ए' टीमों के बीच खेला गया लिस्ट-ए मैच था, इसलिए आईसीसी आमतौर पर सीधे हस्तक्षेप नहीं करता। ऐसे में फिलहाल वैभव पर किसी प्रतिबंध की संभावना कम नजर आती है। यही वजह है कि वह 18 जून को अफगानिस्तान ए के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले में चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे।
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वैभव सूर्यवंशी - फोटो : PTI
क्या 15 साल के वैभव पर बैन लगाना सही होगा?
क्रिकेट विशेषज्ञों की नजर में इस पूरे मामले को सिर्फ वैभव की प्रतिक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कई रिपोर्ट्स में यह बताया गया है और हम वीडियो में भी देख सकते हैं कि वैभव चुपचाप वापस जा रहे थे और तब श्रीलंकाई खिलाड़ी ने पहले टिप्पणी की थी, जिसके बाद विवाद बढ़ा। ऐसे में यह मामला एकतरफा नहीं माना जा रहा है। वैभव अभी सिर्फ 15 साल के हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर के माहौल में लगातार दबाव झेल रहे हैं।

खेल मनोविज्ञान भी बताता है कि कम उम्र के खिलाड़ियों से भावनात्मक प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। ऐसे मामलों में कड़ी सजा से ज्यादा खिलाड़ियों को समझाना और अनुशासन का महत्व बताना प्रभावी माना जाता है। यदि मैच रेफरी या आयोजक कार्रवाई करते भी हैं तो चेतावनी या हल्की अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना ज्यादा है।
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वैभव सूर्यवंशी - फोटो : BCCI
असली सवाल प्रतिक्रिया नहीं, सीख का है
वैभव सूर्यवंशी अभी सिर्फ 15 साल के हैं और अचानक मिली लोकप्रियता के बीच लगातार दबाव में खेल रहे हैं। खेल मनोविज्ञान बताता है कि युवा खिलाड़ियों में भावनात्मक प्रतिक्रियाएं सामान्य होती हैं। यही कारण है कि कोच और वरिष्ठ खिलाड़ी उन्हें सही दिशा देने की कोशिश करते हैं।

वैभव के मामले में भी चर्चा सिर्फ उनके गुस्से की नहीं होनी चाहिए, बल्कि इस बात की होनी चाहिए कि वह इस अनुभव से क्या सीखते हैं। आखिर खेल इतिहास यही बताता है कि कई महान खिलाड़ियों ने अपने करियर की शुरुआत जुनून और आक्रामकता के साथ की, लेकिन बाद में उसी ऊर्जा को सफलता में बदल दिया।
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