भारत के पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भारतीय क्रिकेट के दिग्गजों के बीच एक काल्पनिक ब्रैकेट में अपना पसंदीदा खिलाड़ी चुना। कई कड़े मुकाबलों के बाद उन्होंने सचिन तेंदुलकर को नंबर एक रखा। अश्विन ने विराट कोहली के ऊपर जसप्रीत बुमराह और रवींद्र जडेजा के ऊपर एमएस धोनी को तरजीह दी।
भारत के महान क्रिकेटरों को एक साथ रखकर यह तय करना हो कि सबसे बेहतर कौन है, तो शायद ही कोई फैसला आसान होगा। अलग-अलग दौर, अलग-अलग प्रारूप और अलग-अलग भूमिकाओं के खिलाड़ियों की तुलना अपने आप में मुश्किल है। रविचंद्रन अश्विन को भी कुछ ऐसा ही करना पड़ा। उनसे भारतीय क्रिकेट के दिग्गजों के बीच एक काल्पनिक नॉकआउट ब्रैकेट में हर मुकाबले का विजेता चुनने को कहा गया।
अश्विन के सामने सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, एमएस धोनी, वीरेंद्र सहवाग, कपिल देव, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और जसप्रीत बुमराह जैसे बड़े नाम थे। कई मुकाबलों में उन्हें काफी सोच-विचार करना पड़ा, लेकिन अंत में उन्होंने सचिन तेंदुलकर को सबसे ऊपर रखा।
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अश्विन
- फोटो : ANI
कोहली और बुमराह में अश्विन ने किसे चुना?
सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक क्वार्टर फाइनल में आया, जब विराट कोहली और जसप्रीत बुमराह को आमने-सामने रखा गया। कोहली के शानदार टेस्ट रिकॉर्ड और तीनों प्रारूपों में उनकी उपलब्धियों को देखते हुए यह फैसला आसान नहीं था। हालांकि, अश्विन ने बुमराह को चुना। उन्होंने माना कि कोहली की उपलब्धियां उन्हें कड़ी टक्कर देती हैं, लेकिन इस काल्पनिक मुकाबले में वह बुमराह के साथ जाएंगे। अश्विन ने कहा, 'विराट एक महान खिलाड़ी हैं। उन्होंने बहुत शानदार प्रदर्शन किया है। लेकिन अगर मुझे एक को चुनना है तो मैं जसप्रीत बुमराह को चुनूंगा।' पूर्व भारतीय स्पिनर ने यह भी स्वीकार किया कि गेंदबाज होने के नाते बुमराह को चुनने में उनकी व्यक्तिगत पसंद का थोड़ा असर हो सकता है। उन्होंने कहा, 'शायद यहां मैं थोड़ा पक्ष लूंगा। मैं जसप्रीत बुमराह को ही चुनूंगा।'
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धोनी और जडेजा
- फोटो : IPL/BCCI
धोनी या जडेजा? कप्तान पर अश्विन का भरोसा
एक और मुश्किल मुकाबला एमएस धोनी और रवींद्र जडेजा के बीच था। जडेजा की ऑलराउंड क्षमता और लंबे समय से भारतीय टीम में योगदान को देखते हुए अश्विन के लिए यह भी आसान चुनाव नहीं था। अश्विन ने कहा, 'धोनी और रवींद्र जडेजा में से जडेजा को चुनना काफी आकर्षक विकल्प है।' लेकिन आखिरकार उन्होंने धोनी को आगे बढ़ाया। इसके पीछे धोनी की कप्तानी और तीनों प्रारूपों में उनका शानदार रिकॉर्ड बड़ी वजह रहा। अश्विन ने कहा, 'लेकिन कप्तानी और वनडे-टेस्ट क्रिकेट में उनकी उपलब्धियों को देखते हुए मैं एमएस धोनी के साथ जाऊंगा। उन्होंने टीम को नंबर एक रैंकिंग तक पहुंचाया था। यह मेरे लिए बहुत करीबी फैसला था और कुछ समय तक मैं जडेजा को चुनने के बारे में सोचता रहा।'
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वीरेंद्र सहवाग
- फोटो : ANI
सहवाग ने धोनी का सफर रोका
धोनी के सामने अगले दौर में वीरेंद्र सहवाग थे। यहां भी अश्विन को दो बेहद खास खिलाड़ियों में से एक का चयन करना था। उन्होंने सहवाग को आगे बढ़ाया। सहवाग पहले ही दौर में भारत के महान सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर को पीछे छोड़ चुके थे। इस फैसले को लेकर अश्विन ने खुद माना कि गावस्कर को बाहर करना आसान नहीं था। उन्होंने कहा, 'तीनों प्रारूपों को देखते हुए सहवाग को चुनना पड़ा। लेकिन गावस्कर को बाहर करना मेरे लिए भी बहुत मुश्किल फैसला था।'
पहले दौर में किन खिलाड़ियों को चुना?
अश्विन ने पहले दौर में कई बड़े नामों के बीच भी अपना फैसला सुनाया। उन्होंने सचिन तेंदुलकर को विजय हजारे के ऊपर, विराट कोहली को रोहित शर्मा के ऊपर, राहुल द्रविड़ को वीनू मांकड़ के ऊपर और जसप्रीत बुमराह को अनिल कुंबले के ऊपर चुना। जब मुकाबला खुद अश्विन और सौरव गांगुली के बीच आया तो उन्होंने बिना जोखिम लिए गांगुली को आगे बढ़ा दिया। अश्विन ने कहा, 'मैं सौरव गांगुली को चुनूंगा। इस मामले में मैं सुरक्षित विकल्प के साथ जाना चाहता हूं।'
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कपिल देव और धोनी
- फोटो : BCCI
सेमीफाइनल में तेंदुलकर और कपिल देव आगे
ब्रैकेट के अगले चरण में सचिन तेंदुलकर ने सौरव गांगुली को हराया। दूसरी ओर कपिल देव ने राहुल द्रविड़ को पीछे छोड़ा। वीरेंद्र सहवाग ने एमएस धोनी को बाहर किया, जबकि जसप्रीत बुमराह ने विराट कोहली के सफर पर विराम लगा दिया। इसके बाद सेमीफाइनल में सचिन तेंदुलकर का मुकाबला वीरेंद्र सहवाग से हुआ, जबकि कपिल देव और जसप्रीत बुमराह आमने-सामने थे।
अश्विन ने तेंदुलकर को सहवाग के ऊपर चुना और फाइनल में पहुंचाया। दूसरे सेमीफाइनल में उन्होंने कपिल देव को बुमराह से आगे रखा। कपिल देव को चुनने की वजह बताते हुए अश्विन ने कहा, 'उनकी ऑलराउंड क्षमता बहुत खास है। 1983 विश्व कप की जीत और उनका पूरा योगदान देखते हुए मैं कपिल देव को चुनूंगा।' इस तरह फाइनल में भारतीय क्रिकेट के दो अलग-अलग युगों के महान खिलाड़ी आमने-सामने आ गए, सचिन तेंदुलकर और कपिल देव।
फाइनल में सचिन तेंदुलकर ने मारी बाजी
अंतिम मुकाबले में अश्विन के सामने सचिन तेंदुलकर और कपिल देव थे। दोनों का भारतीय क्रिकेट में योगदान ऐतिहासिक रहा है। कपिल ने भारत को पहली बार विश्व कप दिलाया, जबकि सचिन ने लगभग ढाई दशक तक भारतीय बल्लेबाजी की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इस मुकाबले में अश्विन ने सचिन को चुना। उन्होंने माना कि इस फैसले में उनकी व्यक्तिगत पसंद भी शामिल है।
अश्विन ने कहा, 'किसी न किसी स्तर पर व्यक्तिगत पसंद भी मायने रखती है। मैं सचिन तेंदुलकर को चुनूंगा।' इस तरह भारतीय क्रिकेट के अलग-अलग दौर के दिग्गजों के बीच हुए इस काल्पनिक मुकाबले में सचिन तेंदुलकर ने बाजी मारी। अश्विन की नजर में तेंदुलकर भारत के ऑल टाइम बेस्ट क्रिकेटर हैं।