दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान एबी डिविलियर्स ने सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली की विदेशी परिस्थितियों में सफलता की तुलना करते हुए कहा कि सचिन ने भारत के बल्लेबाजों के लिए रास्ता बनाया, लेकिन कोहली ने उस स्तर को और ऊंचा किया। उनके बयान ने दोनों दिग्गजों की तुलना पर नई बहस छेड़ दी है।
सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली को भारतीय क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाजों में गिना जाता है। दोनों ने घरेलू परिस्थितियों के साथ-साथ इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी शानदार प्रदर्शन किया। अब दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान एबी डिविलियर्स ने दोनों की तुलना करते हुए एक ऐसा बयान दिया है, जिसने नई बहस को जन्म दे दिया है।
डिविलियर्स ने सचिन की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने सबसे पहले भारतीय उपमहाद्वीप के बल्लेबाजों को यह भरोसा दिया कि उछाल और सीम वाली परिस्थितियों में भी सफलता हासिल की जा सकती है। हालांकि, उनके मुताबिक विराट कोहली ने इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इसे एक अलग स्तर तक पहुंचाया।
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एबी डिविलियर्स-विराट कोहली
- फोटो : ANI
डिविलियर्स ने इस बहस पर क्या कहा?
डिविलियर्स ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, 'मैं सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी के बारे में सोचता हूं, जिन्होंने काफी पहले भारत के लिए यह ट्रेंड शुरू किया। हालांकि, वह विराट कोहली जितने मजबूत नहीं थे, जो उनसे भी बेहतर थे। लेकिन सचिन पहले खिलाड़ी थे जिन्होंने दिखाया कि उपमहाद्वीप का बल्लेबाज उछाल और सीम वाली परिस्थितियों में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। विराट ने इसे आगे बढ़ाया और स्तर को और ऊंचा कर दिया।'
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विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर
- फोटो : Twitter
विराट की सफलता ने बदली भारतीय क्रिकेट की सोच?
डिविलियर्स के मुताबिक विदेशी परिस्थितियों में कोहली और सचिन की सफलता का असर मौजूदा भारतीय बल्लेबाजों पर भी पड़ा है। उन्होंने कहा कि दोनों दिग्गजों ने आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों को विदेशों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। डिविलियर्स ने कहा, 'इसी वजह से अब कई खिलाड़ी हैं, जैसे केएल राहुल और देवदत्त पडिक्कल, जिन्होंने इस ट्रेंड को आगे बढ़ाना शुरू किया है और विराट तथा सचिन के नक्शेकदम पर चल रहे हैं।'
कोहली की विदेशी परिस्थितियों में बल्लेबाजी की खासियत उनकी तकनीक, फिटनेस और तेज गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक रवैये को माना जाता रहा है। उन्होंने कई विदेशी दौरों पर भारत के लिए अहम पारियां खेलीं और टेस्ट क्रिकेट में टीम को एक मजबूत विदेशी इकाई बनाने में योगदान दिया।
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विराट और सचिन
- फोटो : PTI
केएल राहुल को लेकर भी दी बड़ी सलाह
डिविलियर्स ने केएल राहुल की तकनीक की तारीफ की, लेकिन साथ ही कहा कि विदेशी परिस्थितियों में उनसे और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है। उन्होंने बताया कि राहुल का विदेशों में टेस्ट औसत करीब 34 है, जो उनकी क्षमता के मुकाबले कम है। डिविलियर्स ने कहा, 'केएल एक ऐसे खिलाड़ी हैं जिनकी तकनीक बहुत अच्छी है और वह भारतीय लाइनअप के लिए बड़ी संपत्ति हैं। लेकिन विदेशों में उनका औसत केवल 34 है। इसलिए आप उनसे ज्यादा की उम्मीद करेंगे और यह एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर उन्हें काम करना होगा।' उन्होंने राहुल को बड़ी पारियों को और बड़ा बनाने की सलाह भी दी।
डिविलियर्स ने कहा, 'जब वह क्रीज पर जम जाएं तो उन्हें बड़े स्कोर बनाने होंगे। सिर्फ शतक बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे 180 तक ले जाना होगा। क्योंकि पहली गेंद पर शून्य और नई गेंद से आउट होने का खतरा हमेशा बना रहता है। इसलिए उनके लिए सबसे जरूरी बात यही होगी कि बड़े स्कोर को और बड़ा बनाया जाए।'
सचिन ने 2013 में लिया था संन्यास
सचिन ने 2013 में संन्यास लिया था। 200 टेस्ट मैचों में उनके नाम 15,921 रन हैं, जो टेस्ट क्रिकेट का रिकॉर्ड है। तेंदुलकर के टेस्ट रनों में से लगभग 55 प्रतिशत (8705 रन) घर से बाहर आए। वह विदेशी हालात में टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजों में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी भी हैं। वहीं, विराट कोहली ने 123 टेस्ट में 9,230 रन बनाए हैं।
इस दौरान कोहली ने भारत के बाहर 66 टेस्ट में 4,774 रन बनाए। विराट ने 2025 में टेस्ट को अलविदा कह दिया था। सचिन ने सेना देशों (दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) में 63 टेस्ट मैचों में 51.30 के एवरेज से 5,387 रन बनाए, जिसमें 17 सेंचुरी और 23 फिफ्टी शामिल हैं, जबकि कोहली ने 46 टेस्ट मैचों में 42.08 के औसत से 3,661 रन बनाए, जिसमें 12 सेंचुरी और 14 फिफ्टी शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक, सचिन विदेशों में ज्यादा सफल हैं। डिविलियर्स ने कोहली के असर की बात कही है, जिसके मुताबिक भारत के घर से बाहर एक मजबूत टेस्ट टीम के तौर पर उभरने में कोहली के अहम योगदान का जिक्र है।