मनोज तिवारी ने लियोनल मेसी के कोलकाता दौरे के दौरान कार्यक्रम की अव्यवस्था के लिए भी पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी उनकी बात न सुनने का आरोप लगाया। इन बयानों के बाद बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व विधायक मनोज तिवारी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति और खेल प्रशासन को लेकर कई चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। मनोज तिवारी ने दावा किया कि खेल मंत्री रहते हुए उन्हें काम ही नहीं करने दिया गया। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि लियोनल मेसी से जुड़े विवाद और खेल विभाग की अव्यवस्था के पीछे भी पार्टी के कुछ नेताओं की भूमिका रही। तिवारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें अपनी बात रखने के लिए 20 सेकंड का समय तक नहीं दिया गया। बता दें कि मनोज तिवारी ने इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़े थे। उन्होंने टिकट के बदले पार्टी द्वारा पांच करोड़ मांगे जाने का आरोप लगाया था।
विज्ञापन
2 of 7
ममता बनर्जी
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
'टीएमसी चैप्टर खत्म हो चुका है'
न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में मनोज तिवारी ने कहा कि अब उनके लिए टीएमसी का अध्याय खत्म हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि हावड़ा के शिवपुर विधानसभा क्षेत्र से टिकट देने के बदले उनसे पांच करोड़ रुपये मांगे गए थे। तिवारी ने कहा कि पैसे देने से इनकार करने के बाद उन्हें टिकट नहीं दिया गया।
विज्ञापन
3 of 7
अरूप बिस्वास।
- फोटो : एएनआई
'मेरा इस्तेमाल सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए हुआ'
तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद बुधवार को फेसबुक पर साझा एक वीडियो पोस्ट के माध्यम से पश्चिम बंगाल के खेल राज्य मंत्री तिवारी ने अपने सीनियर मंत्री अरूप बिस्वास पर काम न करने देने का आरोप लगाया। तिवारी ने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल को बेइज्जती और अपमान से पहचाना गया। मनोज तिवारी ने अपने मंत्री पद को एक लॉलीपॉप बताते हुए कहा कि चुनावी सफलता के बावजूद, उन्हें बिना किसी काम के अधिकार के एक रस्मी भूमिका तक सीमित कर दिया गया।
'खेल मंत्री रहते हुए सिर्फ चाय-बिस्कुट का काम मिला'
मनोज तिवारी ने सोशल मीडिया पर साझा वीडियो में कहा कि खेल और युवा मामलों के राज्य मंत्री रहते हुए उन्हें कोई अधिकार नहीं दिया गया। तिवारी ने कहा, '2021 में चुनाव जीतने के बाद जब मुझे राज्य मंत्री बनाया गया, तो मैंने सोचा था कि मैं इस विभाग में बहुत विकास और सुधार ला पाऊंगा। पिछले पांच वर्षों में मेरे काम को कैसे रोका गया, मैं यह बताना चाहता हूं। लेकिन मैंने देखा कि अरूप बिस्वास वहां कोई अच्छा काम नहीं होने देंगे। अरूप बिस्वास ने मुझे भी काम नहीं करने दिया। मैं खेल जगत से आता हूं और खेलों के लिए बहुत कुछ करना चाहता था। लेकिन खेल विभाग में मेरे पास चाय और बिस्कुट खाने के अलावा कोई काम नहीं था। उन्होंने सुनिश्चित किया कि मैं कुछ कर ही न सकूं।'
4 of 7
मेसी टूर के दौरान सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुए बवाल की तस्वीर
- फोटो : ANI
योहान ब्लेक के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दावा
पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि उन्होंने विश्व प्रसिद्ध धावक योहान ब्लेक के जरिए पश्चिम बंगाल में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की योजना तैयार की थी। उन्होंने कहा, 'मैं एथलेटिक्स, फुटबॉल और दूसरे खेलों में प्रतिभाशाली युवाओं के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना चाहता था। अपने संपर्कों के जरिए मैंने योहान ब्लेक को पश्चिम बंगाल में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए तैयार किया था। लेकिन अरूप बिस्वास ने उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उन्हें लाने के लिए सिर्फ पांच करोड़ रुपये चाहिए थे, जबकि 700 करोड़ रुपये का खेल बजट यूं ही बर्बाद हो गया।'
विज्ञापन
5 of 7
मेसी टूर के दौरान सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुए बवाल की तस्वीर
- फोटो : ANI
मेसी विवाद पर भी लगाया बड़ा आरोप
मनोज तिवारी ने दावा किया कि पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास उनकी लोकप्रियता से असहज थे और इसी कारण उन्हें कई कार्यक्रमों से दूर रखा गया। उन्होंने लियोनल मेसी से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया। पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि लियोनल मेसी का आन पश्चिम बंगाल में फुटबॉल के लिए एक अहम पल था, लेकिन इवेंट में कुप्रबंध की वजह से मेसी कुछ ही मिनटों में वहां से चले गए। इस नतीजे के कारण आखिरकार अरूप बिस्वास को कुछ समय के लिए इस्तीफा देना पड़ा। मनोज तिवारी ने कहा कि उन्होंने जानबूझकर इवेंट का बायकॉट किया था, क्योंकि उन्हें किसी बड़ी मुसीबत का अंदेशा था।
तिवारी ने कहा, 'आप सबने मेसी वाला मामला देखा। मुझे पहले से पता था कि माहौल कैसा था। हर स्टेज पर वे मेरी बेइज्जती करते थे। मुझे किसी कार्यक्रम में बुलाया ही नहीं जाता था। डूरंड कप के दौरान मैं मैदान पर था, फिर भी मुझे स्टेज पर आने का निमंत्रण नहीं मिला क्योंकि अरूप बिस्वास मेरी छवि बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। अरूप मेरी मौजूदगी भी बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। बार-बार उन भावनाओं को महसूस करते हुए, मैं समझ गया कि अगर मैं वहां जाता रहा, तो वे बार-बार मेरी बेइज्जती करेंगे। इसीलिए, जब मेसी वाला मामला हुआ, मैं ग्राउंड में नहीं गया। मुझे पता था कि इस तरह की घटना होने वाली है। पूरे राज्य के खेल प्रेमियों को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। मेसी सिर्फ 5-10 मिनट में कार्यक्रम छोड़कर चले गए और इसके लिए अरूप बिस्वास जिम्मेदार थे।'
विज्ञापन
6 of 7
ममता बनर्जी और मनोज तिवारी
- फोटो : ANI
'अरूप बिस्वास की वजह से बेइज्जती हुई'
तिवारी ने कहा, 'अरूप बिस्वास की वजह से हमारे राज्य और पूरे भारत में फुटबॉल लवर्स मेसी को ठीक से देख नहीं पाए, क्योंकि मेसी पांच मिनट में ही चले गए। इतना बड़ा मौका सिर्फ अरूप बिस्वास की वजह से बर्बाद हो गया।' बंगाल के पूर्व कप्तान ने कहा कि राज्य के युवाओं को फायदा पहुंचाने के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय खेल संबंधों का इस्तेमाल करने की उनकी कोशिशों को अस्वीकार कर दिया गया।
'ममता बनर्जी ने 20 सेकंड भी नहीं दिए'
मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने कैबिनेट बैठक के बाद शिवपुर के विकास का मुद्दा उठाने की कोशिश की तो मुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। तिवारी ने कहा, 'मैंने कैबिनेट बैठक में कई बार शिवपुर के मुद्दे उठाए। एक दिन जब मैंने मुख्यमंत्री से बात करनी चाही तो उन्होंने मेरे मुंह पर कहा- क्या मेरे पास और कोई काम नहीं है? उन्होंने मुझे 20 सेकंड तक नहीं दिए कि मैं अपनी बात समझा सकूं। उसी दिन मुझे एहसास हो गया था कि यह सरकार ज्यादा दिन नहीं टिकेगी।'
क्रिकेट से राजनीति तक का सफर
मनोज तिवारी भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके हैं और घरेलू क्रिकेट में बंगाल का बड़ा नाम रहे हैं। क्रिकेट से राजनीति में आए तिवारी को टीएमसी ने खेल जगत का चेहरा बनाकर आगे बढ़ाया था। हालांकि अब उनके बयानों ने बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।