आज भारतीय क्रिकेट के विस्फोटक विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन का जन्मदिन है। उनका सफर सिर्फ रनों और रिकॉर्ड्स की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, त्याग और सपनों को सच करने की मिसाल भी है। कम उम्र में घर छोड़ने वाले ईशान ने हर मुश्किल को मात देकर खुद को विश्व क्रिकेट के बड़े मंच पर स्थापित किया।
आज भारतीय टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन अपना जन्मदिन मना रहे हैं। कहते हैं कि मुश्किल हालात ही इंसान की असली परीक्षा लेते हैं। अगर मेहनत और लगन हो तो संघर्षों को पीछे छोड़कर सफलता की नई कहानी लिखी जा सकती है। टीम इंडिया के विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। 12 साल की उम्र में घर से दूर रहने वाले ईशान ने अपनी मेहनत के दम पर विश्व क्रिकेट में खास पहचान बनाई और वनडे क्रिकेट में सबसे तेज दोहरा शतक लगाकर इतिहास रच दिया।
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ईशान किशन
- फोटो : ANI
क्या ईशान किशन का बचपन से ही क्रिकेट के प्रति था खास लगाव?
ईशान किशन का जन्म 18 जुलाई 1998 को बिहार की राजधानी पटना में हुआ था। बचपन से ही उन्हें क्रिकेट खेलने का काफी शौक था। उनके बड़े भाई भी क्रिकेट में करियर बनाने की कोशिश कर रहे थे। साल 2005 में ईशान के पिता प्रणव कुमार पांडे बड़े भाई राज किशन के चयन के लिए कोच उत्तम मजूमदार से मिले थे। हालांकि, बड़े भाई का चयन नहीं हो सका, लेकिन कोच ईशान की बल्लेबाजी से काफी प्रभावित हुए। उन्होंने उनके पिता से कहा कि ईशान को क्रिकेट खेलने से कभी न रोकें।
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ईशान किशन
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क्या 12 साल की उम्र में ईशान को क्रिकेट के लिए छोड़ना पड़ा था घर?
कोच की सलाह के बाद ईशान ने क्रिकेट की बारीकियां सीखनी शुरू कीं। हालांकि, बिहार में क्रिकेट के सीमित अवसरों के कारण कोच ने उन्हें झारखंड जाने की सलाह दी। कम उम्र में ईशान का घर से दूर जाना उनकी मां को पसंद नहीं था, लेकिन क्रिकेट के प्रति उनके जुनून को देखते हुए परिवार को यह फैसला लेना पड़ा।
रांची में ईशान का चयन स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से खेलने के लिए हुआ। उन्हें एक क्वार्टर मिला, जहां चार सीनियर खिलाड़ी भी रहते थे। 12 साल की उम्र में घर छोड़ने वाले ईशान को खाना बनाना नहीं आता था, इसलिए वह बर्तन धोने की जिम्मेदारी संभालते थे। कई बार ऐसा भी हुआ जब सीनियर खिलाड़ियों के बाहर जाने पर ईशान को बिना खाना खाए रात गुजारनी पड़ी। जब यह बात परिवार को पता चली तो उनके माता-पिता ने रांची में किराए का मकान लेकर उनके साथ रहने का फैसला किया।
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ईशान किशन
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क्या 15 साल की उम्र में ईशान ने रणजी ट्रॉफी में बनाई जगह?
ईशान किशन ने अपनी मेहनत और शानदार प्रदर्शन के दम पर महज 15 साल की उम्र में झारखंड की ओर से रणजी ट्रॉफी खेलने का मौका हासिल किया। घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद उन्होंने भारत की अंडर-19 टीम में भी जगह बनाई। इसके बाद ईशान ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और भारतीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी।
कैसा रहा ईशान किशन का इंटरनेशनल क्रिकेट करियर?
ईशान किशन ने साल 2021 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत के लिए अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया। डेब्यू मुकाबले में ही उन्होंने अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाते हुए 32 गेंदों में 56 रनों की शानदार पारी खेली। ईशान ने भारत के लिए 52 टी20 इंटरनेशनल मैचों में 145 के स्ट्राइक रेट से 1463 रन बनाए हैं। वहीं, 31 वनडे मुकाबलों में उनके नाम 1093 रन दर्ज हैं। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने भारत के लिए 2 मुकाबले खेले और 78 रन बनाए।
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ईशान किशन
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क्या ईशान किशन ने वनडे में सबसे तेज दोहरा शतक लगाकर बनाया रिकॉर्ड?
साल 2022 में बांग्लादेश के खिलाफ ईशान किशन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक लगाया था। उन्होंने सिर्फ 126 गेंदों में अपनी डबल सेंचुरी पूरी की थी। इसके साथ ही ईशान वनडे क्रिकेट में सबसे तेज दोहरा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। यह उपलब्धि उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।
क्या ब्रेक के बाद ईशान किशन ने की दमदार वापसी?
दोहरा शतक लगाने के कुछ समय बाद ईशान किशन ने मानसिक थकान और व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए क्रिकेट से ब्रेक लेने का फैसला किया। वह घरेलू क्रिकेट से भी दूर रहे, जिसके बाद बीसीसीआई ने उन्हें सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर कर दिया। हालांकि, ईशान ने हार नहीं मानी। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन जारी रखा और चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।
क्या ईशान किशन ने वापसी के बाद फिर हासिल की टीम इंडिया में जगह?
ईशान किशन ने अपनी कप्तानी में झारखंड को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का खिताब दिलाया। इसके बाद भारतीय टीम में उनकी वापसी का रास्ता साफ हुआ। टीम इंडिया में लौटने के बाद ईशान ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से एक बार फिर अपनी जगह मजबूत की और टी20 विश्व कप 2026 में भारत की खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाई।