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जब पाकिस्तान को हराकर टी-20 में टीम इंडिया बनी वर्ल्ड चैंपियन

Sat, 24 Sep 2016 10:26 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
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टीम इंडिया - फोटो : getty
24 सितंबर को भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक विशेष स्थान हासिल है। ऐसा इसलिए क्योंकि आज से नौ साल पहले आज के ही दिन भारतीय टीम पहले टी-20 विश्वकप में चैंपियन बनी थी। पहले टी-20 विश्वकप का आयोजन दक्षिण अफ्रीका में हुआ था। साल 2007 में ही वेस्टइंडीज में खेले गए वनडे विश्वकप में पहले ही दौर में बांग्लादेश से हारकर बाहर होने वाली हार मिलने के बाद दक्षिण अफ्रीका में हो रहे टी-20 विश्वकप से टीम इंडिया के सीनियर खिलाड़यों ने नाम वापस ले लिया था। इसके बाद महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में एक युवा टीम को विश्वकप में भाग लेने भेजा गया था। सीनियर खिलाड़ी के नाम पर वीरेंद्र सहवाग और हरभजन सिंह थे।  भारत के विश्व विजेता बनने की किसी को आशा नहीं थी। लेकिन भारत ने जीत हासिल कर इतिहास रच दिया। 
 
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आज रचा गया था इतिहास, टीम इंडिया बनी थी पहली टी-20 विश्व चैंपियन 

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टीम इंडिया - फोटो : getty
24 सितंबर को जोहानेसबर्ग में खेले गए विश्वकप के फाइनल में भारत का मुकाबला चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के साथ था। लीग मैच में भारत  ने पाकिस्तान पर बॉल आउट के जरिए जीत हासिल की थी।  इस कारण भारतीय टीम का मनोबल बढ़ा हुआ था। भारत को केवल न्यूजीलैंड के सामने हार का सामना करना पड़ा था।
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गौतम गंभीर - फोटो : getty
 महेंद्र सिंह धोनी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय किया। टीम इंडिया ने निर्धारित 20 ओवरों में 157 रन बनाए। टीम इंडिया की ओर से सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर सबसे ज्यादा 75 रनों का योगदान दिया।  वहीं रोहित शर्मा ने 30 रनों का योगदान दिया था।  

 

आज रचा गया था इतिहास, टीम इंडिया बनी थी पहली टी-20 विश्व चैंपियन 

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धोनी - फोटो : getty
158 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तानी टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। भारत के तेज गेंदबाज आरपी सिंह ने पहले ही ओवर में ओपनर मोहम्मद हफीज को चलता कर दिया। भारतीय गेंदबाज लगातार विकेट लेते गए, लेकिन पाकिस्तानी बल्लेबाज मिसबाह उल हक ने एक छोर थामे रखा। आखिरी पलों में भारतीय खेमे में तब हलचल मच गई जब सोहेल तनवीर ने तेज गेंदबाज एस श्रीसंत पर लगातार दो छक्के जड़ दिए। लेकिन श्रीसंत ने जल्दी ही उन्हें चलता कर दिया। लेकिन  मिसबाह भारतीय गेंदबाजों पर लगातार हावी हो रहे थे।
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धोनी - फोटो : getty
आखिरी ओवर में पाकिस्तान को जीत के लिए 6 गेंदों में 13 रनों की जरूरत थी। स्ट्राइक पर मिसबाह उल हक थे। ऐसे में धोनी ने अप्रत्याशित निर्णय लेते हुए जोगिंदर शर्मा को गेंद थमा दी। ऐसे में जोगिंदर ने पहली गेंद वाइड फेंक दी। दूसरी गेंद खाली गई तो सबको थोड़ा धीरत हुआ। लेकिन करजब मिसबाह ने दूसरी गेंद पर छक्का जड़ दिया तो लोगों को लगा कि धोनी ने गलत गेंदबाज को गेंदबाजी के लिए बुला लिया है। उन्हें हरभजन सिंह को गेंदबाजी के लिए बुलाना चाहिए था। 

 
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टीम इंडिया - फोटो : getty
लेकिन उस दिन होना कुछ और ही था। अब 4 गेंद पर पाकिस्तान को जीत के लिए सिर्फ 6 रन चाहिए थे। महेंद्र सिंह धोनी को जोगेंद्र पर पूरा भरोसा था। जोगेंद्र ने मिसबाह को ललचाई गेंद फेंकी और मिसबाह छक्के के लिए उस गेंद को लपक बैठे लेकिन बाउंड्री पर खड़े फिल्डर श्रीसंत ने उसे कैच कर पाक टीम को ऑलआउट कर दिया और भारत टी-20 का पहला विश्वचैंपियन बन गया।  यह पल 1983 के बाद पूरे भारत के लिए सबसे यादगार लम्हा था। इस जीत के हीरो इरफान पठान रहे, जिन्होंने 16 रन देकर तीन विकेट झटके थे।
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