टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी और पहले वर्ल्ड कप विजेता कप्तान कपिल देव ने टीम इंडिया के मौजूदा कप्तान विराट कोहली की तुलना पूर्व बोर्ड अध्यक्ष जगमोहन डालमिया से की है। कपिल देव ने विराट को मैदान के अंदर और बाहर का नायक बताया। उन्होंने कहा, 'हम कोहली की तरफ देखते हैं। वो ठीक वैसे ही नायक हैं जैसे (मैदान से बाहर) डालमिया थे। वो चीजें बदल सकते हैं और उन्होंने फिटनेस के मामले में ऐसा काम किया, जिस पर हम सभी को गर्व है।'
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क्रिकेटर कपिल देव
58 वर्षीय कपिल देव ने कहा, 'प्रत्येक कप्तान कुछ नया करता और विराट फिटनेस को नए स्तर पर ले गये हैं। हम क्रिकेटर होने के नाते कह सकते हैं कि वो अच्छा कार्य करते रहें। उनके पास खुद पर भरोसा करने की योग्यता है। वो सर्वश्रेष्ठ हासिल कर सकते हैं।'
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kapil dev
कपिल देव पहले जगमोहन डालमिया वार्षिक सम्मेलन में श्रीलंका क्रिकेट के अध्यक्ष तिलंगा सुमतिपाला के साथ लेक्चर दे रहे थे। इस कार्यक्रम में भारत और श्रीलंका की टीमों के पूर्व कप्तान ने भी हिस्सा लिया। कपिल ने कहा, 'हमारे पास दो तरह के नायक हैं। एक मैदान के अंदर और दूसरे मैदान के बाहर। यदि आज क्रिकेटर सुखी हैं तो यह डालमिया के कारण संभव हो पाया। उनके बिना हमें संघर्ष करना पड़ता।'
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जगमोहन डालमिया
- फोटो : cricket country
कपिल ने पिछले 50 वर्षों में डालिमया को सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट प्रशासक करार देते हुए कहा, 'पहले हम कहा करते थे कि क्या हमें ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसा वेतन मिलेगा। अब यह सब कुछ बदल गया है और वे कह रहे हैं कि क्या हमें भारत जैसा वेतन मिल सकता है। यह बदलाव डालमिया के कारण आया।' डालमिया ने 1987 और 1996 वर्ल्ड कप की मेजबानी भारतीय उपमहाद्वीप को दिलाने में अहम भूमिका निभायी थी। 20 सितंबर 2015 को उनका निधन हो गया।
कपिल ने कहा कि इस पूर्व अध्यक्ष को बहुत जल्द समझ में आ गया था कि एक क्रिकेटर का करियर आठ से दस साल तक ही होता है। उन्होंने कहा, 'आपके पास पैसा होना जरूरी है और डालमिया इसे समझते थे। सचिन तेंदुलकर की तरह हर किसी को 15 से 20 साल तक खेलने का मौका नहीं मिलता और आप आठ से दस साल तक अपने चरम पर रहते हो। उन्होंने सुनिश्चित किया कि इस करियर के दौरान आपकी जिंदगी बन जाएगी। इसका श्रेय मेरे नायक को जाता है।' कपिल ने कहा, 'वह कुशल वक्ता नहीं थे लेकिन सभी को साथ लाने में उनकी भूमिका अहम रही। वह सच्चे नेतृत्वकर्ता थे। वह हमारे देश के प्रत्येक क्रिकेटर के नायक हैं। हम आज जो कुछ हैं वह इस व्यक्ति की वजह से हैं।' सुमतिपाला ने उस समय डालमिया के समर्थन को याद किया जब 1995 में मुथैया मुरलीधरन पर चकिंग का आरोप लगा था।