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78 रन पर आउट हुए सचिन तो आचरेकर ने मैदान पर बुलाया और उठाया ये कदम, देखते रह गए सारे खिलाड़ी

Thu, 03 Jan 2019 08:55 AM IST
अभिषेक निगम स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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रमाकांत आचरेकर
सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट के महानतम बल्लेबाजों में से एक माना जाता है, लेकिन एक ऐसा भी समय था जब उनकी जादूई प्रतिभा के बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते थे। 1980 के समय में आचरेकर ने तेंदुलकर को क्रिकेट की बारीकियां सिखाईं और युवा बल्लेबाज को मुंबई के लिए ज्यादा से ज्यादा मैच खेलना सुनिश्चित कराया। 
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रमाकांत आचरेकर
स्कूल के बाद तेंदुलकर अपने गुरु आचरेकर के स्कूटर पर बैठ जाते थे और दोनों मुंबई में ज्यादा से ज्यादा मैच खेलने के लिए निकल जाते थे। आचरेकर ने ही तेंदुलकर के बल्लेबाजी की महानता को खोजा और भारत को सबसे शानदार खिलाड़ी दिया।
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sachin tendulkar young
तेंदुलकर ने 1989 में डेब्यू किया और वह उन युवा प्रतिभाशाली बल्लेबाजों में से थे, जिनका उदय मुंबई से हुआ। 24 साल बाद तेंदुलकर ने अपने मुंबई के सभी साथियों को पीछे छोड़ा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 100 शतक व 34,357 रन बनाए। सचिन तेंदुलकर बल्ले से क्या कमाल कर सकते हैं जानने वाले आचरेकर ने 1993 में सीधे कहा था कि तेंदुलकर अपने साथी विनोद कांबली और प्रवीण आमरे से कई गुना ज्यादा प्रतिभाशाली हैं। 

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sachin tendulkar young
इंडिया टुडे में मार्च 1993 में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक आचरेकर ने सचिन की प्रतिभा के बारे में बातचीत करते हुए कई राज खोले। जब भारत बॉम्बे में रनों का पहाड़ खड़ा कर चुका था तब अचानक ही एक बैनर चमकने लगा, जिसमें लिखा था, शारदाश्रम बनाम इंग्लैंड। मेहमान टीम को कुछ समझ नहीं आया और देखते ही देखते मैदान पर शारदाश्रम बनाम इंग्लैंड का नारा गूंजने लगा।
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Sachin Tendulkar-Ramakant Achrekar
शारदाश्रम विद्यापीठ स्कूल ने सचिन तेंदुलकर, विनोद कांबली और प्रवीण आमरे जैसे खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम को दिए। एक वाकया है जब विनोद कांबली ने मैच में शतक जमाया जबकि सचिन तेंदुलकर 78 रन पर आउट हो गए। आचरेकर ने कांबली और तेंदुलकर दोनों को अगले दिन जल्दी मैदान पर बुलाया। दरअसल, आचरेकर को तेंदुलकर की प्रतिभा का अंदाजा था और वह उनके जल्दी आउट होने से खुश नहीं थे।
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रमाकांत आचरेकर
आचरेकर का मानना था कि सचिन तेंदुलकर अपने साथी विनोद कांबली और प्रवीण आमरे से ज्यादा प्रतिभाशाली हैं और उन्हें खुलकर अपने शॉट़्स खेलना चाहिए। सचिन के पैड बड़े थे, जिसकी वजह से आचरेकर ने उन्हें बाउंड्री पर ध्यान लगाने को कहा था। 
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Sachin Tendulkar-Ramakant Achrekar
सचिन बॉम्बे में शतक पूरा नहीं करने से निराश थे, लेकिन इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। आचरेकर को समझ आया कि तेंदुलकर अपना नैसर्गिक खेल नहीं खेल रहे हैं और अगर वह खेलते तो शतक जरूर पूरा करते।
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