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'गुलाबी बल्ले' से खेलते नजर आए कप्तान कोहली, आखिर क्या है 'पिंक टेस्ट' की पूरी कहानी

Thu, 03 Jan 2019 01:11 PM IST
Sumit kumar स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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चेतेश्वर पुजारा (130*) के 18वें टेस्ट शतक और मयंक अग्रवाल (77) की अर्धशतकीय पारी की बदौलत टीम इंडिया ने सिडनी टेस्ट के पहले दिन टॉस जीतकर बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट खोकर 303 रन बना लिए हैं। मैच की पहली पारी में कप्तान विराट कोहली 23 रन बनाकर आउट हो गए। बता दें कि सिडनी टेस्ट में कोहली पिंक कलर के बैट से खेलते हुए नजर आए थे।
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फैंस को बता दें कि सिडनी में साल की शुरुआत में खेले गए पहले टेस्ट को पिंक टेस्ट यानि की गुलाबी टेस्ट कहा जाता है। इसी वजह से कप्तान कोहली ने अपने बैट पर गुलाबी रंग की ग्रिप चढ़ाई थी। इसके अलावा यहां तक कि उनके ग्लब्स पर भी गुलाबी रंग चढ़ा नजर आया।
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सिडनी के ग्राउंड में पिंक टेस्ट पहली बार साल 2009 में खेला गया था। यह मुकाबला ऑस्ट्रेलिया और द. अफ्रीका के बीच हुआ था। पिछले 10 वर्षों से लगातार इस मैदान पर साल का पहला पिंक टेस्ट खेला जाता है। भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच सिडनी में खेला जा रहा मैच 11वां पिंक टेस्ट है।

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क्यों होता है पिंक टेस्ट
बता दें कि पिंक टेस्ट मैच के तीसरे दिन को 'जेन मैक्ग्रा डे' के नाम से जाना जाता है। इसे सपोर्ट करने के लिए फैंस उस दिन गुलाबी रंग के कपड़े पहनते हैं। इससे सिडनी क्रिकेट ग्राउंड गुलाबी समंदर सा दिखाई देता है।
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इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह है कि पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ग्लेन मैक्ग्रा की पत्नी जेन मैक्ग्रा की मौत स्तन कैंसर की वजह से हुई थी। इसीलिए टेस्ट मैच से जुटाई गई राशि को ग्लेन मैक्ग्रा फाउंडेशन को दिया जाता है।
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