बोर्ड में कई लोग ऐसे हैं जिन्हें लगता है कि गांगुली ने बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में अच्छे से काम नहीं किया। ऐसा लगता है कि उनके अंतिम कुछ दिन बीसीसीआई के अध्यक्ष के रूप में भी पूरी तरह से सुखद नहीं होंगे।
भारत के महान कप्तानों में एक सौरव गांगुली का बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल समाप्त होने वाला है। गांगुली ने दोबारा बोर्ड अध्यक्ष बनने की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन उन्हें यह कहकर मना कर दिया गया कि बोर्ड में दो बार अध्यक्ष बनने का कोई प्रावधान नहीं है, जबकि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के संविधान में संशोधन किया था और अध्यक्ष को दो बार चुने जाने की अनुमति दे दी थी। गांगुली के स्थान पर 1983 में वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के सदस्य रोजर बिन्नी का अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है।
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सौरव गांगुली
- फोटो : सोशल मीडिया
बोर्ड में कई लोग ऐसे हैं जिन्हें लगता है कि गांगुली ने बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में अच्छे से काम नहीं किया। ऐसा लगता है कि उनके अंतिम कुछ दिन बीसीसीआई के अध्यक्ष के रूप में भी पूरी तरह से सुखद नहीं होंगे। अक्तूबर 2019 में उन्होंने यह पद संभाला था। उसके बाद उन्हें कई बड़े फैसले लिए। हम उन तीन फैसलों के बारे में आपको बता रहे हैं जिसने भारतीय क्रिकेट पर बड़ा प्रभाव डाला...
भारत में डे/नाइट टेस्ट की शुरुआत: दुनिया भर के देशों ने टेस्ट में गुलाबी गेंद वाले क्रिकेट को अपना लिया था। पहली बार नवंबर 2015 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच डे-नाइट टेस्ट हुआ था। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने 2019 तक इसकी मंजूरी नहीं दी थी। सौरव गांगुली के अध्यक्ष बनते ही डे-नाइट टेस्ट का एलान हुआ। कोलकाता में नवंबर 2019 को भारत ने बांग्लादेश से अपना पहला डे-नाइट टेस्ट खेला।
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बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह
- फोटो : सोशल मीडिया
कोविड -19 के दौरान आईपीएल: कोरोना महामारी के कारण लगातार दो सीजन के लिए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) अनिश्चितताओं में उलझा रहा। गांगुली के अध्यक्ष रहते हुए बीसीसीआई ने किसी तरह इसका आयोजन दोनों सीजन में अच्छे से किया। 2020 में यूएई में पूरा टूर्नामेंट खेला गया। 2021 में सीजन की शुरुआत तो भारत में हुई, लेकिन बायो-बबल में कोविड-19 मामले आने के बाद आधे से ज्यादा मैच यूएई में आयोजित हुए। कोरोना महामारी के बावजूद दोनों सीजन में लीग ने बड़ी सफलता हासिल की।
घरेलू खिलाड़ियों के वेतन में वृद्धि: भारतीय क्रिकेट में निस्संदेह सबसे बड़ा टैलेंट पूल है। भारत की सीनियर टीम आज जिस ऊंचाई पर है, वह मजबूत घरेलू क्रिकेट के कारण है। गांगुली ने भी इस पर ध्यान दिया। उन्होंने घरेलू खिलाड़ियों के वेतन को बढ़ाने का काम किया। इसका वादा गांगुली ने अध्यक्ष बनने के तुरंत बाद किया था।