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2007 वर्ल्ड कप में हार के बाद संन्यास लेना चाहते थे सचिन तेंदुलकर, इस दिग्गज के कहने पर बदला फैसला

Mon, 03 Jun 2019 12:16 PM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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सचिन तेंदुलकर - फोटो : social media
महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने रविवार को खुलासा किया कि वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स के फोन के कारण उन्हें 2007 में खेल को अलविदा कहने का विचार बदलने में मदद मिली।

कई जगह इस बात का जिक्र है कि बड़े भाई अजीत की सलाह के बाद तेंदुलकर ने 2007 में क्रिकेट को अलविदा कहने का मन बदला था लेकिन इस दिग्गज क्रिकेटर ने इससे पहले कभी इसमें रिचर्ड्स की भूमिका पर बात नहीं की थी।
 
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विश्व कप 2007
तेंदुलकर ने कहा कि 2007 विश्व कप संभवत: उनके करियर का सबसे बदतर चरण था और जिस खेल ने उन्हें उनके जीवन के सर्वश्रेष्ठ दिन दिखा वह उन्हें बदतर दिन भी दिखा रहा था।
 
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सचिन तेंदुलकर - फोटो : social media
तेंदुलकर ने यहां ‘इंडिया टुडे’ कार्यक्रम के दौरान कहा, ‘‘मुझे लगता है कि ऐसा ही माहौल था। उस समय भारतीय क्रिकेट से जुड़ी जो चीजें हो रही थी उनमें सब कुछ सही नहीं था। हमें कुछ बदलाव की जरूरत थी और मुझे लगता था कि अगर वे बदलाव नहीं हुए तो मैं क्रिकेट छोड़ देता। मैं क्रिकेट को अलविदा कहने को लेकर 90 प्रतिशत सुनिश्चित था।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मेरे भाई ने मुझे कहा कि 2011 में विश्व कप फाइनल मुंबई में है क्या तुम उस खूबसूरत ट्राफी को अपने हाथ में थामने की कल्पना कर सकते हो।’’ 

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सचिन और विवियन रिचर्ड्स - फोटो : social media
तेंदुलकर ने कहा, ‘‘इसके बाद मैं अपने फार्म हाउस में चला गया और वहीं मेरे पास सर विव का फोन आया, उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि मेरे अंदर काफी क्रिकेट बचा है। हमारी बात लगभग 45 मिनट चली और जब आपका हीरो आपको फोन करता है तो यह काफी मायने रखता है। यह वह लम्हा था जब मेरे लिए चीजें बदल गई और इसके बाद से मैंने काफी बेहतर प्रदर्शन किया।’’ 
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विवियन रिचर्ड्स - फोटो : social media
इस कार्यक्रम के दौरान रिचर्ड्स भी मौजूद थे और उन्होंने तेंदुलकर की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्हें हमेशा से उनकी क्षमता पर भरोसा था।

रिचर्ड्स ने कहा, ‘‘मुझे सुनील गावस्कर के खिलाफ खेलने का मौका मिला जो मुझे हमेशा से लगता था कि भारतीय बल्लेबाजी के गाडफादर हैं। इसके बाद सचिन आए, इसके बाद अब विराट हैं। लेकिन मैं जिस चीज से सबसे हैरान था वह यह थी कि इतना छोटा खिलाड़ी इतना ताकतवर कैसे हो सकता है।’’ 
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Sachin Tendulkar
तेंदुलकर ने साथ ही कहा कि 2003 विश्व कप के फाइनल में आस्ट्रेलिया के हाथों हार उनके जीवन की सबसे बड़ी निराशा में से एक है।
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सचिन तेंदुलकर - फोटो : ESPN
उन्होंने कहा, ‘‘हां, खेद है.. क्योंकि उस टूर्नामेंट में हम इतना अच्छा खेले। इससे पहले हमारे बल्लेबाज काफी अच्छी स्थिति में नहीं थे क्योंकि हम न्यूजीलैंड में खेले थे जहां उन्होंने जीवंत विकेट तैयार किए थे। जब हम दक्षिण अफ्रीका पहुंचे तो प्रत्येक मैच के साथ हमारा आत्मविश्वास बढ़ता गया। उस पूरे टूर्नामेंट में हम सिर्फ आस्ट्रेलिया से हारे थे।’’ 
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