वनडे, टी-20 और टी-20 तो हो ही रहे हैं...
सचिन ने कहा, ‘दर्शकों के अनुकूल, हां, यह महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके लिए हम टेस्ट से एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय और फिर टी-20 तक पहुंच गए और अब तो टी-10 भी हो रहे हैं इसलिए परंपरावादियों के लिए भी कुछ होना चाहिए और यह टेस्ट क्रिकेट है।’
उन्होंने कहा, ‘बल्लेबाज, क्या टेस्ट क्रिकेट में उनकी परीक्षा होती है? कम से कम एक प्रारूप ऐसा होना चाहिए जिसमें बल्लेबाज को चुनौती मिले और यही कारण है कि इसे टेस्ट क्रिकेट कहा जाता है क्योंकि यह दो सत्र में खत्म नहीं होता। कभी कभी मुश्किल पिच पर आपको कई घंटों तक बल्लेबाजी करनी होती है।’ तेंदुलकर का मानना है कि दर्शकों के रोमांच के लिए छोटे प्रारूप मौजूद है।