भारत और इंग्लैंड की बीच खेले गए पहले टेस्ट का नतीजा ड्रॉ रहा। इस मैच में इंग्लैंड ने किसी तरह हार बचाई। पहली पारी में पिछड़ने के बाद टीम इंडिया दूसरी पारी में लड़खड़ाती नजर आई। यदि इंग्लैंड के पास कुछ ओवर और होते, तो संभव था कि इस मैच का नतीजा उसके पक्ष में निकल सकता था।
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राजकोट टेस्ट के ड्रॉ होने के पांच सबसे बड़े कारण
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टीम इंडिया
- फोटो : getty
हालांकि, अंत में मैच को ड्रॉ घोषित किया। मैच में 1500 से अधिक रन बने और सिर्फ 29 विकेट गिरे। 4 साल बाद भारत में कोई टेस्ट ड्रॉ हुआ है। हालांकि, इस मैच के बाद भारत की घर में बादशाहत को कड़ी चुनौती मिल रही है। जानिए क्या रहे भारत-इंग्लैंड मैच ड्रॉ होने के सबसे बड़े कारण:
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राजकोट टेस्ट के ड्रॉ होने के पांच सबसे बड़े कारण
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विराट कोहली
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पिच के पेंच
राजकोट की पिच हरीभरी थी, जिसे आम भाषा में ‘पाटा विकेट’ कहा जाता है। सपाट पिच पर बल्लेबाजी करना आसान होता है, जिसके चलते इंग्लैंड पहली पारी में 500 से अधिक रन बना सका और भारत भी पहली पारी में 500 के आसपास पहुंच सका। पिच में टर्न न के बराबर था, जिसकी उम्मीद भारत में करना मुश्किल है। टॉस हारने के बाद मैच पिच के पेंच में फंस गया।
राजकोट टेस्ट के ड्रॉ होने के पांच सबसे बड़े कारण
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रविंद्र जड़ेजा
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खराब फील्डिंग
भारत और इंग्लैंड, दोनों ने ही इस मैच में अपने स्तर से नीचे की फील्डिंग की। इंग्लैंड ने अपनी पारी में कुछ कैच छोड़े, मगर भारत ने पहली पारी में आधा दर्जन से ज्यादा कैच छोड़े। शुरु के 6 ओवर में 3 कैच छूटने के बाद भारतीय फील्डरों की बॉडी लैंग्वेज ढीली पड़ती गई और वो रनों का बहाव नहीं रोक पाए।
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राजकोट टेस्ट के ड्रॉ होने के पांच सबसे बड़े कारण
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बेन स्टोक्स
- फोटो : Guardian
इंग्लैंड की बल्लेबाजी
इंग्लैंड की टीम की बल्लेबाजी की तारीफ तो हर कोई कर रहा है। इंग्लैंड के लिए 11वें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए स्टुअर्ट ब्रॉड भी एक बार टेस्ट में 150 का आंकड़ा पार कर चुके हैं। 10वें नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले जफर अंसारी फर्स्ट क्लास में ओपनर हैं। इंग्लैंड ने न सिर्फ अपनी बल्लेबाजी की गहराई का फायदा उठाया, बल्कि जरूरी साझेदारियां कर स्कोर को मजबूती दी।
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एलेस्टर कुक
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कुक की कप्तानी
इंग्लैंड के कप्तान एलेस्टर कुक को भारत के खिलाफ कप्तानी का लंबा अनुभव है। भारत के खिलाफ 6 शतक लगाने वाले कुक ने बतौर कप्तान भी खासी चतुराई दिखाई। कुक ने न सिर्फ अपने गेंदबाजों का बेहतरीन प्रयोग किया, बल्कि टीम का संतुलन भी इस प्रकार बनाया कि उनके पास बल्लेबाजी और गेंदबाजी के सभी विकल्प मौजूद थे।
अश्विन पर निर्भरता
अश्विन भारत के लिए 7 बार मैन ऑफ द सीरीज जीत चुके हैं। इस बात से साफ दिखाई पड़ता है कि अश्विन एक इम्पेक्ट खिलाड़ी हैं। अश्विन यदि विकेट नहीं भी लेते, तो विपक्षी टीम पर इतना दबाव बना देते हैं कि दूसरे छोर का गेंदबाज विकेट झटक लेता है। इंडिया को अश्विन पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता मात दे गई क्योंकि उसने सारा दांव ही अश्विन पर लगाया।