भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही टी-20 सीरीज 1-1 की बराबरी पर खड़ी है। सीरीज का अंतिम और निर्णायक मैच बुधवार शाम को बेंगलुरु में खेला जाएगा। हालांकि, सीरीज का दूसरा मैच जीतना टीम इंडिया के लिए आसान नहीं रहा। इस अदद जीत के लिए टीम को कई पापड़ बेलने पड़े।
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आखिरी टी-20 में यह है टीम इंडिया की जीत के सूत्र
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विराट कोहली
- फोटो : WorldCupT20
वनडे और टेस्ट में एकतरफा जीत दर्ज करने वाली टीम इंडिया को टी-20 में जीत दर्ज करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। पिछले कुछ समय में टीम इंडिया का प्रदर्शन उस स्तर का नहीं रहा, जिसकी उससे उम्मीद की जा रही है। आइए जानते हैं क्या टीम इंडिया के लिए टी-20 में जीत के बड़े सूत्र:
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आखिरी टी-20 में यह है टीम इंडिया की जीत के सूत्र
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रोहित शर्मा
सलामी जोड़ी
टेस्ट और वनडे के अलावा टीम इंडिया के लिए सलामी जोड़ी की समस्या टी-20 में भी खड़ी है। शिखर धवन और अजिंक्य रहाणे बड़े मंच पर खुद को साबित नहीं कर पा रहे हैं। रोहित शर्मा चोटिल होकर टीम से बाहर हैं। लोकेश राहुल की फॉर्म में नियमितता की कमी है। टी-20 में कोहली से ओपनिंग कराने का आइडिया भी फेल ही नजर आता है। ऐसे में टीम को एक विश्वसनीय सलामी जोड़ी की सख्त जरूरत है।
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सुरेश रैना
- फोटो : getty
मध्य ओवरों में रनगति
पहले दोनों टी-20 में विराट कोहली जल्द ही आउट हो गए। ऐसे में टीम इंडिया के सामने बीच के ओवरों में तेजी से रन बनाने की दिक्कत आ खड़ी हुई। युवराज सिंह, महेंद्र सिंह धोनी, सुरेश रैना और मनीष पांडे बीच को ओवरों में तेजी से रन बनाने के बजाय विकेट बचाते नजर आते हैं। ऐसे में ये खिलाड़ी जल्द ही अपना विकेट खो देते हैं। इसके चलते टीम दबाव में आ जाती है और न तो बड़े लक्ष्य बना पाती है और न ही बड़े लक्ष्य हासिल कर पाती है।
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युवराज सिंह
पावर हिटर्स की कमी
जब तक किसी टीम में 2-3 पावर हिटर्स न हों, टीम के लिए बड़ा स्कोर बना पाना और भी मुश्किल हो जाता है। इंग्लैंड के पास जोस बटलर और बेन स्टोक्स जैसे पावर हिटर्स हैं। एक समय टीम इंडिया के पाय सहवाग, पठान, युवराज और धोनी जैसे नाम थे, मगर अब इन नामों की चमक फीकी पड़ गई है। ऐसे में टीम को एक बड़े हिटर की सख्त जरूरत है।
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केदार जाधव
- फोटो : PTI
फीनिशर की कमी
धोनी भले ही सीमित ओवरों के सबसे बड़े फीनिशर रहे हों, मगर वक्त साथ टीम को उनका विकल्प नहीं मिला है। केदार जाधव ने वनडे में इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया, मगर मनीष पांडे और हार्दिक पांड्या को इस जगह पर खुद को साबित करना बाकी है। पहले 15 ओवर में 110 रन बनाने के बाद भी टीम 20 ओवरों में 160 या अधिक रन बनाने में नाकाम हो रही है।
अलग सोच की कमी
2007 के पहले टी-20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की सोच बाकी टीमों से अलग थी, जो टीम की जीत का कारण बनी थी। अब टीम इंडिया ने वो सोच छोड़ दी है, मगर बाकी टीमों ने उस सोच को अपना लिया है। बाकी टीमों ने टी-20 स्पेशलिस्ट खिलाड़ी तैयार कर लिए हैं, मगर टीम इंडिया के पास ऐसे खिलाड़ियों की कमी है। टीम इंडिया चुनिंदा नामों पर ही निर्भर करती है।