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स्कूल क्रिकेट में ही रखी अपनी सफलता की नींव, अब बनाया ऐतिहासिक मुकाम, नाम है पृथ्वी शॉ

Sun, 07 Oct 2018 09:12 AM IST
मुकेश झा, अमर उजाला, नई दिल्ली
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prithvi shaw
टीम इंडिया ने शनिवार को दो मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले में वेस्टइंडीज को पारी व 272 रन से करारी मात दी। भारतीय टीम के लिए यह ऐतिहासिक जीत है। यह जीत टीम इंडिया को हमेशा याद रहेगी, क्योंकि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में भारतीय क्रिकेट टीम की यह सबसे बड़ी जीत है।
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पृथ्वी शॉ
टीम इंडिया की इस विशाल जीत को 18 वर्षीय युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ के लिए भी याद रखा जाएगा। यह इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने डेब्यू मैच में जिस तरह का कीर्तिमान रचा, ऐसा अभी तक किसी युवा खिलाड़ी ने इतनी कम उम्र में नहीं रचा था। शॉ 18 वर्ष 329 दिन में शतक डेब्यू मैच में शतक जड़ने वाले सबसे युवा भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए और कई तोड़े। मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करने के लिए इस युवा नायाब सितारा को मैन ऑफ द मैच से नावाजा गया। शॉ के लिए खुशी का ठिकाना नहीं था। और होगा भी क्यों नहीं पहला मुकाबला, पहला शतक और मैन ऑफ मैच। तीनों एक साथ तो खुशी से लबरेज होना तो लाजमी है।

 
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prithvi shaw
वो कहते है न कि पूत के पैर पालने में ही दिख जाते हैं। 18 वर्षीय सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ ने पहली बार स्कूली क्रिकेट में धमाल मचाकर सुर्खियों में आए थे। रणजी ट्रॉफी और दिलीप ट्रॉफी में शतक जड़ कर आगाज करने और अपनी कप्तानी में इसी साल भारत को अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप का खिताब दिलाने वाले शॉ अपने डेब्यू मैच को इतना खास बनाया, जिसे शायद ही वो कभी भूल पाएंगे। पृथ्वी ने अपनी प्रतिभा का ऐसा परचम लहराया, जिसे कुछ दशक तक भूलना काफी मुश्किल होगा।

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team india
इंग्लैंड दौरे पर 1-4 से करारी हार झेलने वाली टीम इंडिया ने अपनी पूरी कसक वेस्टइंडीज के खिलाफ निकाल दी। इंग्लैंड दौरे पर भी वंडर ब्वॉय पृथ्वी शॉ का चयन हुआ था, लेकिन वहां उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला था। इसके बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ भी इस युवा बल्लेबाज का सिलेक्शन किया गया और पहले ही में उन्होंने जबरदस्त कमाल दिखाया। वह टीम इंडिया की तरफ से टेस्ट में पदार्पण करने वाले 293वें खिलाड़ी बने।

 
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पृथ्वी शॉ - फोटो : self
पृथ्वी शॉ को देखकर ऐसा लग ही नहीं रहा था कि वह अपना पहला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं। हां, ऐसा होगा भी क्यों ? जो खिलाड़ी अपने रणजी डेब्यू में शतक, दलिप ट्रॉफी डेब्यू में शतक जमा चुका हो। वह तो आत्मविश्वास से भरा होगा ही। वेस्टइंडीज के खिलाफ बल्लेबाजी करने उतरे शॉ काफी उत्साहित, खुशी से लबरेज, चेहरे की खिलखिलाहट और आत्मविश्वास से परिपूर्ण लग रहे थे। ये सारी चीजें सब बयां कर रही थी कि यह 18 वर्षीय नायाब सितारा आज कुछ कर दिखाएगा। आखिर हुआ भी वही जो होना था। पृथ्वी शॉ ने शतक जड़ सबको अचंभा कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने कई रिकॉर्ड्स अपने नाम किए और कई तोड़े।
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पृथ्वी शॉ
शॉ ने अपने डब्यू मैच में जो किया वह इतिहास है। डेब्यू मैच में उन्होंने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए 'क्रिकेट के भगवान' माने जाने वाले टीम इंडिया के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को भी को भी इस मायने में पीछे छोड़ दिया। दरअसल, पृथ्वी शॉ सचिन तेंदुलकर के बाद सबसे कम उम्र में टेस्ट डेब्यू करने वाले भारतीय खिलाड़ी हैं। मगर तेंदुलकर ने अपने डेब्यू मैच में पाकिस्तान के खिलाफ सर्फ 15 रन बनाए थे और शॉ ने 134 रन की बेहतरीन पारी खेली।

 
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पृथ्वी शॉ
वेस्टइंडीज के खिलाफ टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही। 3 रन के स्कोर पर सलामी बल्लेबाज केएल राहुल आउट होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद पृथ्वी शॉ और चेतेश्वर पुजारा की जोड़ी ने टीम इंडिया को बेहतरीन शुरुआत दी। दोनों बल्लेबाजों के बीच 206 रन की जबरदस्त साझेदारी हुई। शॉ ने 154 गेंदों में 19 चौकों की मदद से 134 रन की धामकेदार खेली। वहीं, पुजारा 89 रन बनाकर आउट हो गए।

 

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पृथ्वी शॉ
गुरुवार से शुरू हुए राजकोट टेस्ट में पृथ्वी शॉ को कप्तान विराट कोहली ने खुद 293 नंबर की टेस्ट कैप सौंपकर टीम में शामिल किया था। टॉस से पहले टीम इंडिया ने हर्डल बनाकर पृथ्वी शॉ को ये सम्मान दिया। 9 नवम्बर 1999 को जन्में शॉ पहली बार 14 साल की उम्र में साल 2013 में सुर्खियों में आए थे। उस समय उन्होंने रिजवी स्कूल की तरफ से खेलते हुए अंडर-16 स्कूल टूर्नामेंट में 300 गेंदों में 546 रन बनाकर विश्व रिकॉर्ड कायम किया था। शॉ ने पिछले साल रणजी और दलीप ट्रॉफी के डेब्यू मैच में शतक जड़कर टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड की बराबरी की।

 
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पृथ्वी शॉ
बता दें कि शॉ का बचपन उनका काफी संघर्ष में बीता है। वह प्रैक्टिस करने के लिए रोजाना 2 घंटे का सफर तय करके मुंबई में विरार से चर्चगेट तक जाते थे। क्रिकेट अभ्यास छोड़ना उनके लिए किसी पाप से कम नहीं था। शॉ ने प्रथम श्रेणी मैच में 8 शतक और 5 अर्धशतक बनाए हैं, जबकि लिस्ट ए मैच में उन्होंने 22 मैचों में 3 शतक और 5 अर्धशतक अपने नाम किए हैं। कुल मिलाकर शॉ का प्रदर्शन शुरू से ही शानदार रहा, जिसका नतीजा है कि उन्हें टीम इंडिया में मौका मिला।
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