धोनी के अच्छे दोस्त और भारतीय क्रिकेट के धुरंधर बल्लेबाज सुरेश रैना ने भी उनके संन्यास के आधे घंटे के अंदर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का एलान कर दिया। इन दो संन्यास के फैसलों से फैंस चौंक गए और समझ नहीं पाए कि आखिर हो क्या रहा है। जानें...
15 अगस्त 2020… आजादी का जश्न चल रहा था, लेकिन उसी शाम भारतीय क्रिकेट के इतिहास का एक अध्याय चुपचाप, बिना किसी शोर शराबे के समाप्त हो गया। इंस्टाग्राम पर एक वीडियो और बैकग्राउंड में गाना, 'पल दो पल मेरी कहानी है', और इसी के साथ भारतीय क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। बिना किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस, बिना कोई शोर, अपनी सादगी और विनम्रता के लिए जाने जाने वाले धोनी ने उसी अंदाज में अपने करियर का वीडियो पोस्ट किया और कहा 15 अगस्त 2020 के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से मुझे रिटायर समझें।
फैंस इसे पचा पाते, उसके आधे घंटे के अंदर एक और खबर ने उनका दिल तोड़ दिया। धोनी के अच्छे दोस्त और भारतीय क्रिकेट के धुरंधर बल्लेबाज सुरेश रैना ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का एलान कर दिया। इन दो संन्यास के फैसलों से फैंस चौंक गए और समझ नहीं पाए कि आखिर हो क्या रहा है। धोनी और रैना की दोस्ती काफी मशहूर रही। 'मिस्टर आईपीएल' के नाम से मशहूर रैना माही के साथ चेन्नई सुपर किंग्स में कई वर्षों तक खेले।
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सुरेश रैना
- फोटो : ANI
रैना का अंतरराष्ट्रीय करियर
रैना ने भारत के लिए 18 टेस्ट, 226 वनडे और 78 टी20 खेले। टेस्ट में उनके नाम 26.48 की औसत से 768 रन, वनडे में 35.31 की औसत से 5615 रन और टी20 में 134.79 के स्ट्राइक रेट से 1190 रन हैं। रैना भारत के उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने तीनों प्रारूप में शतक लगाए हैं। टेस्ट में रैना के नाम एक शतक और सात अर्धशतक, वनडे में पांच शतक और 36 अर्धशतक, टी20 में एक शतक और पांच अर्धशतक रहे। इसके अलावा रैना ने टेस्ट में 13 विकेट, वनडे में 36 विकेट और टी20 में 13 विकेट लिए। रैना का अंतरराष्ट्रीय डेब्यू 2005 में हुआ था। उनका पहला मैच श्रीलंका के खिलाफ वनडे था। वहीं, उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच जुलाई 2018 में इंग्लैंड के खिलाफ हेडिंग्ले में खेला था।
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युवराज और धोनी
- फोटो : Twitter
2019 में खेला था आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास से पहले धोनी कई महीनों तक भारतीय टीम से दूर रहे थे। उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच 2019 वनडे विश्व कप के दौरान न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में खेला था। इसके बाद वह लाइमलाइट से दूर हो गए थे और किसी को कोई भनक तक नहीं लगी। धोनी सिर्फ एक कप्तान नहीं थे, वो करोड़ों भारतीयों के सपनों के सरताज थे। 2007 टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी, 2011 वनडे वर्ल्ड कप का वह छक्का, 2013 चैंपियंस ट्रॉफी की जीत… ये सब उनके नाम के साथ सुनहरे अक्षरों में दर्ज है, लेकिन इन सबके पीछे था उनका शांत चेहरा, मुश्किल समय में अडिग रहना और टीम को परिवार की तरह संभालना।
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पंत और धोनी
- फोटो : ANI
इस तरह कैप्टन कूल बने एमएस धोनी
धोनी की शांत कप्तानी, बिजली जैसी तेज स्टंपिंग और मुश्किल समय में मैच फिनिश करने की क्षमता उन्हें 'कैप्टन कूल' बनाया। धोनी ने भले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया हो, लेकिन उनका प्रभाव और प्रेरणा आज भी टीम इंडिया के खिलाड़ियों और करोड़ों फैंस के दिलों में जिंदा है। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान उनसे पूछा गया कि सीएसके के लिए खिताब जीतना या देश के लिए खेलने में से वह कौन सा पल चुनेंगे? इस पर माही ने बड़ी सरलता से जवाब दिया था- देश हमेशा पहले आता है।
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महेंद्र सिंह धोनी
- फोटो : PTI
आईपीएल में अब भी खेल रहे हैं धोनी
माही की फैन फॉलोइंग इतनी है कि आज भी जब वह आईपीएल में खेलने के लिए मैदान पर आते हैं, तो फैंस की खुशी का कोई ठिकाना नहीं होता। उनके बल्ले की धार भले ही पहली की तरह नहीं रही हो, लेकिन उनकी एक झलक फैंस को खुश करने के लिए काफी है। धोनी अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं और इस बात को वह खुद स्वीकार कर चुके हैं। 44 साल के हो चुके माही अगले सीजन में खेलेंगे या नहीं, यह भी तय नहीं है। फैंस को यह पता नहीं है कि उन्होंने धोनी को आखिरी बार खेलते देख लिया है या नहीं। वह इसी आशा में हैं कि माही फिर मैदान में उतरेंगे और सीएसके को एक बार फिर चैंपियन बनाएंगे।
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धोनी
- फोटो : ANI
धोनी की कप्तानी में शीर्ष पर पहुंची भारतीय टीम
धोनी के नेतृत्व में भारतीय टीम सभी प्रारूपों में शीर्ष पर रही थी। उनकी कप्तानी में भारत दिसंबर 2009 से 18 महीनों के लिए टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष पर रहा था। धोनी की कहानी क्रिकेट के इतिहास में सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक है। रेलवे स्टेशन पर टिकट कलेक्टर के रूप में काम करने के बाद वह भारत के सबसे बड़े ट्रॉफी कलेक्टर भी बन गए। उन्होंने 2004 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था।
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जडेजा, रैना और धोनी
- फोटो : ANI
धोनी का अंतरराष्ट्रीय करियर
चेन्नई सुपर किंग्स में 'थाला' के रूप में जाने जाने वाले धोनी ने भारत के लिए 98 टी20 खेले, जिसमें 126.13 के स्ट्राइक रेट से 37.60 की औसत से 1,617 रन बनाए। उनके नाम इस प्रारूप में दो अर्धशतक हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 56 रन है। टेस्ट की बात करें तो धोनी ने 90 मैच खेले, जिसमें 38.09 की औसत से 4,876 रन बनाए। उन्होंने 224 के सर्वश्रेष्ठ स्कोर के साथ छह शतक और 33 अर्धशतक बनाए। वह टेस्ट में भारत के लिए 14वें सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। एक कप्तान के रूप में उन्होंने 60 टेस्ट मैचों में भारत का नेतृत्व किया, जिसमें से उन्होंने 27 मैच जीते, 18 हारे और 15 ड्रॉ रहे। सच कहें तो धोनी के 'पल दो पल की यह कहानी', आने वाले कई युगों तक सुनाई जाएगी।
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महेंद्र सिंह धोनी
- फोटो : ANI
धोनी की खास उपलब्धियां
धोनी बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया को व्हाइटवॉश करने वाले एकमात्र भारतीय कप्तान भी हैं। ऐसा उन्होंने 2010-11 और 2012-13 की सीरीज में किया था। भारत ने 72 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत की अगुआई करते हुए 41 में जीत दर्ज की और 28 हारे, एक बराबरी पर रहा जबकि दो नतीजे हासिल करने में नाकाम रहे। उनका जीत प्रतिशत 56.94 है। आईसीसी खिताब के लिए भारत का मार्गदर्शन करने के अलावा, उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) और चैंपियंस लीग टी20 में चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) को फ्रेंचाइजी का गौरव भी दिलाया है।
सीएसके को दिलाए हैं पांच खिताब
उन्होंने सीएसके को 2010, 2011, 2018, 2021 और 2023 में पांच आईपीएल खिताब दिलाए हैं। धोनी की कप्तानी में सीएसके ने 2010 और 2014 में चैम्पियंस लीग टी20 का खिताब जीता है। धोनी ने 2016 से 2017 में सीएसके के बैन होने पर राइजिंग पुणे सुपरजाएंट्स के लिए खेले थे। आईपीएल में धोनी ने 278 मैच खेले हैं। इनमें उन्होंने 38.30 की औसत और 137.45 के स्ट्राइक रेट से 5,439 रन बनाए हैं। उन्होंने टूर्नामेंट में 24 अर्धशतक भी लगाए हैं। उनके नाम 158 कैच और 47 स्टंपिंग भी हैं।