यशस्वी जायसवाल
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यशस्वी की एक और बड़ी बात यह है कि उन्होंने इतने दर्द सिर्फ इसलिए सहे ताकि उनके संघर्ष की कहानी कभी भदोही तक न पहुंचे, जिससे उनका क्रिकेट करियर खत्म हो जाए। यशस्वी अपना पेट पालने के लिए आजाद मैदान में राम लीला के दौरान पानी-पूरी (गोलगप्पे) और फल बेचने में मदद करते थे। मगर ऐसे भी दिन थे, जब उन्हें खाली पेट सोना पड़ता था क्योंकि जिन ग्राउंड्समैन के साथ वह रहते थे, वह आपस में लड़ाई करते थे और खाना नहीं बनाते थे।