दिल्ली डेयरडेविल्स की जिन चीयरलीडर्स से हम रूबरू हुए उनमें से चार लड़कियां यूरोप की थीं तो दो ऑस्ट्रेलिया से आई थीं। आईपीएल में ज्यादादातर चीयरलीडर्स यूरोप से आतीं हैं ना की रूस से। ऑस्ट्रेलिया से आई कैथरीन ने बताया कि वह पेशे से डांसर हैं और कई देशों में परफॉर्म कर चुकी हैं। हाल ही में वह 6 महीने के लिए मेक्सिको गईं थीं। कैथरीन बताती हैं, 'तीन साल की उम्र से ही मुझे डांस के लिए जुनून था और यही जुनून मुझे धीरे-धीरे चीयरलीडिंग की प्रोफेशन तक खींच लाया'
चीयरलीडिंग करते-करते उसने तुड़वा ली पसलियां
लेकिन अगर आप ये सोच रहे हैं कि इस प्रोफेशन में आने के लिए केवल डांस ही एक मापदंड है तो इंग्लैंड के मैनचेस्टर से आई डेन बैटमेन जो बता रही है वो आपको चौंकाने के लिए काफी है। डेन बैटमन कहती हैं, 'मैं 11 साल की थी जब मैंने स्कूल में चीयरलीडिंग करना शुरू किया था। स्कूल में चीयरलीडिंग करने के दौरान एक बार मेरी पसलियां टूट गईं थी. मुझे उस चोट से उबरने में काफ़ी वक्त लग गया था।'
डेन बैटमन बताती हैं कि आईपीएल में सिर्फ डांस होता है, लेकिन विदेशों में चीयरलीडर्स को फॉर्मेंशन्स भी बनानी होती हैं जिसके लिए शरीर का लचीला होना बेहद जरूरी है। वो कहती हैं कि यह एक स्पोर्ट्स की ही तरह है। हम उनती ही मेहनत और ट्रेनिंग करते हैं जितनी की मैदान पर खेल रहा खिलाड़ी करता है। डेन बताती है कि वो इससे पहले बॉक्सिंग के खेल के लिए भी चीयरलीडिंग कर चुकी हैं।
लेकिन सबसे संवेदनशील मामले की तो अभी तक हमने बात ही नहीं की और वो यह कि आखिरकार वह आईपीएल में चीयरलीडिंग करते दौरान कैसा महसूस करतीं हैं। डेन बेटमैन बताती हैं कि भारत में उन्हें आकर बहुत अच्छा लगता है और यहां उन्हें किसी सेलिब्रिटी जैसा मेहसूस होता है. लोग उनका ऑटोग्राफ मांगने आते हैं।
हालांकि दर्शकों को नसीहत देते हुए इंग्लैंड से आईं डेन बेटमैन कहती हैं कि लोगों को ये समझना चाहिए कि हम पोडियम पर डांस करतीं कोई भोग-विलास के लिए बना सामान नहीं हैं। हम लड़कियां हैं जिनका पेशा चीयरलीडिंग है। हमे इंसान की तरह समझा जाए ना की कोई हमारे शरीर पर टिप्पणी करे।