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35 साल पहले आज ही के दिन विश्व विजेता बना था भारत, उस फाइनल की ऐसी 10 बातें जो आप शायद ही जानते हो

Mon, 25 Jun 2018 07:04 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली
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भारतीय क्रिकेट इतिहास में आज का दिन बेहद खास माना जाता है। आज से ठीक 35 साल पहले यानी 25 जून 1983 को भारतीय क्रिकेट टीम ने पहली बार विश्व कप जीतकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। कपिल देव की अगुवाई वाली उस टीम ने लगातार 2 बार विश्व कप जीत चुकी वेस्टइंडीज को शिकस्त दी थी।
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- फोटो : twitter
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया महज 183 रन पर ऑलआउट हो गई थी। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि अब भारतीय टीम यह खिताबी मुकाबला जीत पाएगी, लेकिन गेंदबाजों ने कमाल करते हुए दिग्गज बल्लेबाजों से लैस वेस्टइंडीज टीम को महज 140 रन पर समेटते हुए अपना पहला विश्व कप जीता। आइए एक नजर डालते हैं 1983 वर्ल्ड कप फाइनल से जुड़ी उन बातों पर, जिसे आप शायद ही जानते होंगे।
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सफेद कपड़ों में खेले गए 1983 विश्व कप के मैच 60 ओवर्स के थे। बाद में क्रिकेट का स्वरूप बदला, इस तरह भारत एकमात्र ऐसी टीम बन गई, जिसने जिसने 60ओवर, 50 ओवर और टी-20 विश्व कप जीता है। याद हो कि 2011 विश्व कप में मुकाबले 50 ओवर के थे, 2007 में भारत ने पहला टी-20 विश्व कप जीत कर ये अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम किया।

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1983 फाइनल मैच में कोई भी बल्लेबाज अर्धशतक नहीं लगा सका था। इस मैच के सर्वश्रेष्ठ स्कोरर कृष्माचारी श्रीकांत थे जिन्होंने 38 रनों की अहम पारी खेली थी। इस भारतीय सलामी बल्लेबाज ने फाइनल में 38 रन की अपनी पारी में 7 चौके और 1 छक्का भी जड़ा था।
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लॉर्ड्स में खेले गए फाइनल मुकाबले में हार के बावजूद वेस्टइंडीज दिग्गज विवियन रिचर्ड्स सबसे आगे रहे। उन्होंने 117.85 के स्ट्राइक रेट से 28 गेंदों में 33 रन बनाए थे। यह इस मैच का सर्वाधिक स्ट्राइक रेट था।
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दिग्गज बल्लेबाजों सजी वेस्टइंडीज टीम के सामने 183 रन का मामूली लक्ष्य था, बावजूद इसके वेस्टइंडीज के 7 बल्लेबाज दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच सके थे।  भारत के 8 बल्लेबाजों ने दहाई का आंकड़ा छुआ था।
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भारत ने इस मैच में अपने आखिरी 7 विकेट 93 रनों पर गंवा दिए थे जबकि वेस्टइंडीज ने आखिरी 9 विकेट 90 रनों पर खोए थे।

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1983 वर्ल्ड कप फाइनल में वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज जोएल गार्नर ने 12 में से 4 ओवर मेडन फेंके थे, जबकि कपिल देव ने 11 में से 4 ओवरों में कोई रन नहीं दिया था।

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वेस्टइंडीज की ओर से लैरी गोम्स सबसे महंगे गेंदबाज साबित हुए थे। हालांकि उन्होंने कपिल देव और यशपाल शर्मा के रूप में 2 अहम विकेट जरूर झटके, लेकिन  इसके लिए 11 ओवर्स 49 रन भी खर्च कर डाले।

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वेस्टइंडीज की ओर से विवियन रिचर्ड्स ने 7 चौके लगाए लेकिन उनकी टीम के दूसरे बल्लेबाज कुल 3 चौके और एक ही छक्का लगा सके। डेसमंड हैंस ने 2, क्लाइव लॉयड ने 1 चौका मारा, जबकि जेफ डुजॉन ने एक छक्का लगाया था।

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मोहिंदर अमरनाथ ने इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में तो मैन ऑफ द मैच अवॉर्ड जीता ही था लेकिन फाइनल में भी वो जीत के हीरो बने। मोहिंदर अमरनाथ ने 26 रन बनाने के साथ-साथ 3 विकेट भी लिए थे।
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वेस्टइंडीज के महान कप्तान क्लाइव लॉयड ने 1983 वर्ल्ड कप हारने के बाद कप्तानी छोड़ दी थी। हालांकि इसके बाद वेस्टइंडीज बोर्ड और सीनियर खिलाड़ियों ने उनसे दोबारा कप्तानी संभालने की गुजारिश की थी।
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