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स्वतंत्रता दिवस खास: आजादी के बाद भारत ने पहली बार जीता था विश्व कप, इंदिरा गांधी ने बढ़ाया था हौसला

Tue, 14 Aug 2018 10:57 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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1947 में आजादी मिलने के बाद जिस तरह भारतीय टीम के विदेशी दौरे का विशेष महत्व है उसी तरह भारत के पहले विश्व कप का भी विशेष महत्व है। 1983 में कपिल देव की कप्तानी वाली इस 'अंडरडॉग' समझी जा रही टीम ने इतिहास रच दिया।

लगातार 2 बार की चैंपियन वेस्टइंडीज को फाइनल में हराकर भारतीय क्रिकेट का नया अध्याय लिखा। आइए इस खास दिन याद करते हैं उस जीत को और फाइनल के 5 हीरो को...
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रोजर बिन्नी

रोजर बिन्नी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में करिअर के शुरूआती चार साल में खास सफल नहीं रहे, लेकिन वर्ष 1983 के लिए वनडे विश्व कप टीम में चयन के बाद स्थिति बदल गई। बिन्नी को इंग्लिश परिस्थितियां काफी रास आईं।

बिन्नी ने चेम्सफोर्ड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच विजेता प्रदर्शन (21 रन, 29/4 विकेट) कर भारतीय टीम को विश्व कप से बाहर होने से बचाया। साथ ही वेस्टइंडीज के खिलाफ फाइनल में 10 ओवर में सिर्फ 23 रन देकर खिताब जिताने में अहम रोल निभाया।
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कपिल देव

पूरे टूर्नामेंट के दौरान कपिल देव की जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई 175 रनों की पारी सबसे महत्वपूर्ण रही, जिसके दम पर भारतीय टीम ग्रुप स्तर पर ही बाहर होने से बच गई। इस पारी में कपिल देव ने 138 गेंदों में 16 चौके और 6 छक्के लगाए। वेस्ट इंडीज के खिलाफ खेले गए फाइनल मैच में भारत ने 54.5 ओवरों में सभी विकेट गंवाकर 175 रनों का स्कोर खड़ा किया था।

फाइनल में रिचर्डसन का कपिल देव के हाथों कैच आउट होना सबसे शानदार था। रिचर्डसन के बल्ले से निकला शॉट लंबा था और सभी को लगा कि यह छक्का होगा, लेकिन बाउंड्री के पास खड़े कपिल ने शानदार तरीके से कैच कर भारतीयों के चेहरे पर खुशी बिखेर दी।

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कृष्माचारी श्रीकांत

विश्व कप के फाइनल में श्रीकांत दोनों टीमों की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे। 38 रन की उनकी पारी को मोहिंदर अमरनाथ के ऑल राउंड प्रदर्शन, बलविंदर सिंह संधू की जादुई डिलीवरी और कपिल देव के करिश्माई कैच के चलते भुला दिया गया, अन्यथा उनके 38 रनों की बदौलत ही भारत 183 रन बना पाया था और फाइनल में वेस्टइंडीज को 43 रनों से हराकर पहली बार विश्व कप जीता था।
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मोहिंदर अमरनाथ

लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्ट इंडीज टीम के पास उस वक्त बेहतरीन बल्लेबाज थे और उसके लिए इस लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल नहीं था। वेस्ट इंडीज के धुंआधार बल्लेबाजों को रोकने के लिए भारतीय टीम के तेज गेंदबाजों मोहिंदर अमरनाथ और मदन लाल ने अहम भूमिका निभाई।

मोहिंदर ने 12 रनों पर 3 विकेट लिए, वहीं मदन ने भी 3 विकेट हासिल किए और वेस्ट इंडीज की पारी 140 रनों पर ही सिमट गई।
 
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बलविंदर सिंह संधू

बलविंदर सिंह संधू ने 184 रनों के छोटे लक्ष्य का पीछ करने उतरी इंडीज टीम के धुरंधर ओपनर गॉर्डन ग्रीनिज (1 रन) को बोल्ड कर भारत को पहली सफलता दिलाई थी। दरअसल, उस मैच में भारत को शुरुआती ब्रेकथ्रू की जरूरत थी, जिसे संधू ने पूरा किया और वह अपने कप्तान के विश्वास पर खरे उतरे थे।

संधू के इन-स्विंगर से अनजान ग्रीनिज वर्ल्ड कप के दौरान दूसरी बार उनके शिकार बने। दोनों ही बार संधू ने उन्हें बोल्ड किया। हालांकि वर्ल्ड कप के दौरान संधू ने 8 मैच में सिर्फ 8 विकेट ही लिए।
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