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Suresh Raina Birthday: कभी आत्महत्या का ख्याल तो कभी घर की तंगहाली, इन सबसे आगे बढ़ बने टीम इंडिया के चैंपियन खिलाड़ी

Fri, 27 Nov 2020 12:09 PM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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सुरेश रैना बर्थडे
कभी आत्महत्या का ख्याल तो कभी हाउस लोन का दबाव, कभी घर की तंगहाली तो कभी मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न, इसके बावजूद इन सबसे उबरते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में छाप छोड़ जाना। ऐसा शायद सुरेश रैना ही कर सकते थे और उन्होंने इसे किया भी। धोनी के साथ ही इसी साल 15 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने वाले रैना आज 34 साल के हो गए और परिवार के साथ मालदीव में समय बिता रहे हैं। 
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सुरेश रैना - फोटो : File
टीम इंडिया के पूर्व ऑलराउंडर सुरेश रैना ने क्रिकेट में ऊंचाइयों को छुआ और वो सबकुछ हासिल किया जो एक क्रिकेटर का सपना होता है। उन्होंने रिकॉर्ड बुक में कई कीर्तिमान बनाए तो बल्लेबाजी, फील्डिंग से लेकर गेंदबाजी तक, क्रिकेट के हर क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन किया।
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सुरेश रैना - फोटो : Getty
बात करें रैना की निजी जिंदगी की तो उन्होंने कई सारी दिक्कतों का सामना किया, उनके पिता त्रिलोकचंद रैना कश्मीरी और मां हिमाचली थी, मगर उनका जन्म उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हुआ। पिता सेना में कार्यरत थे और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बम बनाने का काम करते थे लेकिन बड़ा परिवार और कम आमदनी होने की वजह से सुरेश के लिए अपने सपनों को पूरा करना आसान नहीं था। इस वजह से उन्होंने लखनऊ जाने का फैसला किया और वहीं पर हॉस्टल में रहकर अपनी पढाई और खेल की शुरुआत की। हालांकि ये सब उनके लिए इतना आसान नहीं था। सीनियरों द्वारा प्रताड़ना और तमाम दिक्कतों के बीच वो जिंदगी से हारने लगे थे और एक समय आत्महत्या का मन बना लिया था।

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रैना को हॉस्टल में सीनियर द्वारा अमानवीयता की हद तक परेशान किया गया और इससे तंग आकर उन्होंने आत्महत्या तक करने की ठान ली थी। रैना ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया था, 'शुरुआती दिनों में जब वह ट्रेन के फर्श पर न्यूज पेपर बिछाकर सोते हुए मैच खेलने के लिए जा रहे थे तो उन्हें अपनी छाती पर वजन सा महसूस हुआ। इससे पहले की वह अपनी आंखें खोल पाते उनके हाथों को नीचे दबा दिया गया। जब आंखें खोलकर उन्होंने देखा तो एक बड़ा लड़का उनकी छाती पर बैठा था। इसके बाद उस लड़के ने रैना के चेहरे पर पेशाब कर दिया।' 
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सुरेश रैना - फोटो : ESPN
लड़के हॉस्टल में सुरेश रैना के साथ काफी निर्दयी व्यवहार करते थे। रैना के साथ इस तरह का व्यवाहर करने वाले लड़के ज्यादातर एथलेटिक्स ब्रांच के थे और वह क्रिकेट कोचों की रैना को मिलती तवज्जो के कारण जलते थे। रैना के मुताबिक, 'कुछ लड़के दूध की डोल्ची में गंदगी वगैराह डाल देते थे, हम इसे छन्नी की मदद से साफ किया करते। सर्दियों की कड़कड़ाती रात में भी सुबह तीन बजे दूध की डोल्ची बिखेर देते थे। 
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सुरेश रैना
इन तमाम दिक्कतों और प्रताड़नाओं के बावजूद रैना ने हार नहीं मानी और एक नए संकल्प के साथ हॉस्टल छोड़ दूसरी जगह चले गए। उन्होंने एयर इंडिया से क्रिकेट की शुरुआत की और इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। रैना ने 2005 में वनडे, 2006 में टी-20 और 2010 में टेस्ट में टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया। 
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सुरेश रैना
उनका टेस्ट करियर कुछ खास नहीं रहा मगर उन्होंने वनडे और टी-20 दोनों जगह अपना दबदबा बनाया और टीम के मध्यक्रम के भरोसेमंद बल्लेबाज, एक शानदार फील्डर और काम चलाऊ गेंदबाज बने। रैना ने तीनों फॉर्मेट में शतक जमाया। उन्होंने आईपीएल में 5300 से अधिक रन बनाए। उन्होंने तीनों फॉर्मेट में करीब 8000 रन बनाए और 60 से अधिक विकेट लिए। रैना ने फील्डिंग में वनडे में 100 कैच पकड़े। 
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